रेहड़ी, सब्जी और चाय दुकान के लिए भी जरूरी है GST? एक्सपर्ट से समझिए नियम
Last Updated:
छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए जीएसटी को लेकर कई सवाल रहते हैं. टैक्स एक्सपर्ट रमेश प्रसाद के मुताबिक सालाना 40 लाख रुपये से अधिक टर्नओवर होने पर ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूरी है. हालांकि, फ्रेंचाइजी लेने या दूसरे राज्यों से व्यापार करने पर यह नियम अलग हो सकता है.
GST Rules: बिहार में स्मॉल और मीडियम बिज़नेस के साथ छोटे व्यापार भी लाखों की संख्या में है. बड़ी दुकानों के अलावा छोटे टी स्टॉल, ठेले, छोटी किराना दुकान, चाय की दुकान, सब्जी की दुकान और ग्रामीण स्तर पर छोटे-छोटे कारोबार भी हैं और यही उनकी कमाई का जरिया है. ऐसे में सवाल उठता है कि क्या छोटे दुकानदारों या स्ट्रीट वेंडर्स को जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराना जरूरी है? क्या उनको भी जीएसटी रिटर्न फाइल करना है? आइए एक्सपर्ट के जरिए बारीकी से जीएसटी नियम को समझते हैं.
जहानाबाद जिला निवासी एडवोकेट सह टैक्स कंसलटेंट रमेश प्रसाद ने जीएसटी फाइल के नियम को आसान भाषा में समझाया है.
GST रजिस्ट्रेशन किनके लिए जरूरी
एडवोकेट रामेश्वर प्रसाद ने कहा कि हमारे देश में जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स को 1 जुलाई 2017 को लागू किया गया. इस नियम को लेकर कई लोगों में कंफ्यूजन की भी स्थिति बनी लेकिन धीरे-धीरे यह स्थिति सामान्य होती चली गई. हालांकि कुछ वर्ग ऐसे भी हैं जिनका आज भी यह जानने की जरूरत है कि आखिर जीएसटी क्या है और किस स्थिति में जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है? उनको मैं बताना चाहूंगा कि जीएसटी की बहुत सारे नियम और कानून है.
GST के दायरे का क्या है लिमिट?
वो आगे बताते हैं कि जीएसटी उन्हीं दुकानदारों, उद्योग करने वालों को रजिस्ट्रेशन करवाना पड़ता है. जिनका 1 साल में 40 लख रुपए का सेल लिमिट पार कर जाता है वो इस नियम के दायरे में आते हैं. उनका हर हाल में जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी है. कुछ पहाड़ी राज्यों में सेल लिमिट 20 लाख रुपए है और इस आंकड़ा को पार करते ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाना जरूरी हो जाता है.
कम्पनी का लेना है फ्रेंचाइजी तो करें यह काम
एक्सपर्ट ने यह भी कहा कि कुछ ऐसे भी व्यापारी हैं, जिनका छोटा सा व्यापार है और आउट ऑफ़ स्टेट ₹100000 से अधिक हो जाता है तो उनकी भी यह जिम्मेदारी हो जाती है कि वह जीएसटी रजिस्ट्रेशन जरूर करवाएं. वहीं, किसी कंपनी का फ्रेंचाइजी लेना है तो आपको उस स्थिति में जीएसटी लेना अनिवार्य है. अन्यथा कंपनी से आपको माल नहीं मिल पाएगा.
इस स्थिति में इनवॉयस और कैश मेमो पास रखें
रमेश प्रसाद का यह भी कहना है कि कुछ मामलों में दुकान को देख कर भी सेल टैक्स की नजर जा सकती है. वैसी स्थिति से बचने को जब से आपने दुकान की शुरुआत की तब से आपको यह स्पष्ट करना है कि हम हर एक खरीदारी से लेकर बेचने तक की वस्तुओं के लिए कैश मेमो का प्रयोग करें. यह आपका सबूत का काम करेगा और आप सेल टैक्स से बच सकते हैं.
ऐसे करवाएं GST रजिस्ट्रेशन
जीएसटी रजिस्ट्रेशन करवाने के लिए दुकान का एक प्रूफ जरूरी है. अगर आपके नाम से दुकान है तो बहुत अच्छा है. अगर आपके नाम से नहीं है और परिवार के नाम से है तो उनसे एक कंसेंट लेटर₹1000 का स्टांप पेपर पर लगा सकते हैं. यदि आप किराए पर ले रहे हैं तो किराए का किरायानामा भी बना सकते हैं. इसके बाद फोटोग्राफ्स, आधार कार्ड और पैन नंबर दस्तावेज के रूप में लगेंगे. इन दस्तावेजों के साथ ऑनलाइन करने पर जीएसटी कार्यालय से एक नंबर जनरेट हो जाता है. नंबर जनरेट होते हैं जीएसटी फाइलिंग के दो तरीके सामने आते हैं पहले आप रिटर्न फाइल 1 महीने में करेंगे और दूसरा 3 महीनेमें. इस प्रकार से आप जो सही लगे वह कर सकते हैं.