सुहागिनें ध्यान दें! करवाचौथ पर इन गलतियों से बिगड़ सकता है व्रत, उज्जैन के आचार्य से जानें नियम

सुहागिनें ध्यान दें! करवाचौथ पर इन गलतियों से बिगड़ सकता है व्रत, उज्जैन के आचार्य से जानें नियम


उज्जैन. हिंदू धर्म में करवाचौथ का पर्व पति-पत्नी के प्रेम, विश्वास और अटूट रिश्ते का प्रतीक माना जाता है. इस दिन सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, अच्छी सेहत और खुशहाल दांपत्य जीवन की कामना के साथ व्रत रखती हैं. करवाचौथ पर महिलाएं पूरे दिन निर्जला उपवास रखती हैं, जिसमें सूर्योदय से लेकर चंद्रमा के दर्शन होने तक अन्न और जल ग्रहण नहीं किया जाता. शाम के समय महिलाएं सोलह श्रृंगार कर विधि-विधान से पूजा करती हैं. इसके बाद चंद्रदेव को अर्घ्य देकर पति के हाथों से जल ग्रहण करती हैं और व्रत का पारण करती हैं. उज्जैन के ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, इस दिन कुछ नियमों का ध्यान रखना बेहद आवश्यक है.

हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 29 अक्टूबर को रात 1 बजकर 6 मिनट से शुरू होगी. यह तिथि उसी रात 10 बजकर 9 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि और व्रत की परंपरा के अनुसार इस साल करवाचौथ 29 अक्टूबर को मनाया जाएगा.

क्यों की जाती है करवाचौथ पर चंद्र पूजा?
करवाचौथ पर चंद्रमा की पूजा का विशेष महत्व बताया गया है. माना जाता है कि चंद्रमा शांति, समृद्धि और मन की स्थिरता का प्रतीक है. उसकी पूजा करने से दांपत्य जीवन में प्रेम, विश्वास और संतुलन बढ़ता है. धार्मिक मान्यता है कि चंद्रमा को अर्घ्य देने से पति की आयु लंबी होती है और विवाह में खुशहाली बनी रहती है. इसके साथ ही यह पूजा जल और पृथ्वी तत्वों का सम्मान भी दर्शाती है, जो जीवन के आधार माने जाते हैं.

जल या अन्न ग्रहण न करें
व्रत के नियमों के अनुसार, सूर्योदय से चंद्रोदय तक कुछ भी खाने-पीने से परहेज करना चाहिए. इस दौरान न तो अन्न ग्रहण करें और न ही जल की एक बूंद पिएं. यदि अनजाने में व्रत के नियम का उल्लंघन हो जाए, तो स्नान करके स्वच्छ वस्त्र धारण करें और भगवान शिव-पार्वती से अपनी भूल के लिए क्षमा मांगें.

नवविवाहित महिलाएं ध्यान दें
अगर आप पहली बार करवाचौथ का व्रत रख रही हैं, तो इस दिन दुल्हन की तरह सजने-संवरने का विशेष महत्व माना जाता है. परंपरा के अनुसार, शादी का जोड़ा पहनना और सोलह श्रृंगार करना शुभ होता है. मान्यता है कि इससे पूजा का महत्व बढ़ता है और पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की जाती है.

धारदार वस्तुओं का उपयोग न करें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, व्रत के दिन कुछ विशेष नियमों का पालन करना जरूरी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन कैंची, सुई, चाकू और अन्य धारदार वस्तुओं का इस्तेमाल करने से बचना चाहिए. साथ ही सिलाई-कढ़ाई जैसे कामों को भी टाल देना बेहतर माना जाता है. माना जाता है कि इन नियमों का पालन करने से व्रत की पवित्रता बनी रहती है और पूजा का पूरा फल प्राप्त होता है.

काले कपड़े भूलकर भी न पहनें
करवाचौथ के दिन सुहागिन महिलाओं को कपड़ों के रंग का विशेष ध्यान रखना चाहिए. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, काले रंग को अशुभ माना जाता है, इसलिए इस दिन इसे पहनने से बचने की सलाह दी जाती है. इसके बजाय लाल, गुलाबी, पीला, नारंगी और हरा रंग पहनना शुभ माना जाता है. वहीं व्रत खोलते समय पति के हाथों से जल ग्रहण करने की परंपरा है, जिसे प्रेम, विश्वास और दांपत्य सुख का प्रतीक माना जाता है.



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