लखीमपुर खीरीः जिले में धान की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. जिले में धान की कटाई का सिलसिला शुरू हो गया है. धान की फसल कटने के बाद खेतों में बड़ी मात्रा में फसल के अवशेष बच जाते हैं, जिन्हें पराली कहा जाता है. पराली का उचित प्रबंधन करना किसानों के लिए एक बड़ी चुनौती बन जाता है. कई बार किसान खेत को अगली फसल की बुवाई के लिए तैयार करने के उद्देश्य से पराली जला देते हैं.
इससे वातावरण में धुआं फैलता है और वायु प्रदूषण बढ़ने के साथ मिट्टी की उर्वरता पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है. ऐसे में आधुनिक कृषि यंत्र बेलर किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रहा है. इसकी मदद से पराली को इकट्ठा कर छोटे-छोटे गठ्ठरों में बांधा जाता है. इससे पराली जलाने की जरूरत कम होती है और फसल के अवशेषों का उपयोग करके अतिरिक्त आमदनी का रास्ता भी खुल रहा है.
बेलर मशीन और कैसे करती है काम
बेलर एक आधुनिक कृषि यंत्र है, जिसका इस्तेमाल खेतों में धान, गन्ना व अन्य फसलों की कटाई के बाद बचे हुए अवशेषों को इकट्ठा करके गठ्ठरों में बदलने के लिए किया जाता है. धान की कटाई के बाद खेत में फैली पराली को व्यवस्थित करना किसानों के लिए मेहनत और समय दोनों के लिहाज से चुनौतीपूर्ण होता है. बेलर मशीन इस काम को आसान बनाने में मदद करती है.
बेलर से पराली इकट्ठा करने से पहले खेत में रैकर का इस्तेमाल किया जाता है. रैकर की मदद से खेत में फैले फसल अवशेषों को एक जगह कतारों में इकट्ठा किया जाता है, जिससे बेलर मशीन को पराली उठाने में आसानी होती है. इसके बाद बेलर खेत में चलकर पराली को अपने अंदर खींचता है. मशीन की बनावट और मॉडल के अनुसार पराली को दबाकर गोल या चौकोर आकार के गठ्ठरों में तैयार किया जाता है. निर्धारित मात्रा में पराली एकत्र होने के बाद उसे रस्सी या अन्य निर्धारित बांधने वाली सामग्री से बांध दिया जाता है. इसके बाद तैयार गठ्ठर मशीन से बाहर निकाल दिया जाता है.
एक एकड़ खेत से निकलती है करीब 20 क्विंटल पराली
धान की कटाई के बाद खेत में बचने वाली पराली की मात्रा फसल की किस्म, पैदावार, कटाई की ऊंचाई और खेती के तरीके पर निर्भर करती है. एक एकड़ खेत से करीब 20 क्विंटल पराली निकल सकती है। यदि किसान इस पराली को खेत में जलाने के बजाय इकट्ठा करके गठ्ठरों में बदलते हैं, तो उसका उपयोग कई कामों में किया जाता है.
पराली को गठ्ठरों में तैयार करने का सबसे बड़ा फायदा यह है कि खेत से फसल अवशेषों को हटाना अपेक्षाकृत आसान हो जाता है. इससे अगली फसल की बुवाई के लिए खेत तैयार करने में भी सुविधा मिल जाती है.पराली हटाने का सही तरीका खेत की स्थिति, मिट्टी में नमी और अगली फसल की जरूरतों को ध्यान में रखकर तय करना चाहिए.
पराली से पशुओं के चारे और बायोगैस बनाने में मदद
धान की पराली का उपयोग केवल खेत से अवशेष हटाने तक सीमित नहीं है. उचित प्रबंधन के बाद इसका इस्तेमाल विभिन्न कार्यों में किया जा सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी धान की पराली का उपयोग पशुओं के चारे में किया जाता है. हालांकि, धान की पराली में पोषण की मात्रा सीमित होती है, इसलिए इसे पशुओं को संतुलित आहार के विकल्प के रूप में नहीं देना चाहिए. पशुओं की जरूरत के अनुसार इसे अन्य पौष्टिक चारे और आहार के साथ इस्तेमाल करना जरूरी है.
इसके अलावा, पराली का उपयोग बायोमास ईंधन और बायोगैस उत्पादन जैसी प्रक्रियाओं में भी किया जा सकता है इसके लिए स्थानीय स्तर पर उपलब्ध तकनीक, प्रसंस्करण व्यवस्था और संबंधित संयंत्रों की जरूरत होती है. जहां पराली की खरीद की व्यवस्था उपलब्ध है, वहां किसान इसे गठ्ठरों के रूप में बेचकर अतिरिक्त आय प्राप्त कर सकते हैं बातचीत करते हुए साबिर अली बताते हैं कि बेलर मशीन किसानों के लिए एक आधुनिक कृषि यंत्र है. किसानों को परली की समस्या से छुटकारा मिल जाएगा और जलाने की जरूरत भी नहीं होगी. अगर बात की जाए तो बेलर मशीन के द्वारा खेतों में पड़ी पराली को एक-एक छोटे-छोटे गट्ठरों में एकत्र किया जाता है. साथ ही साथ आसानी से यह परली बिक भी जाती है अगर बात की जाए तो ₹200 प्रति कुंतल के हिसाब से इस समय परली बिक रही है जिससे किसान आसानी से इनकम भी कमा सकते हैं