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मिर्जापुर जिले की राजनीति की चर्चा इन दिनों सूबे की सियासी गलियारे में खूब हो रही है. क्योंकि कभी अपना दल (एस) का गढ़ कहे जाने वाले मिर्जापुर में एक तरफ से दिव्या मित्तल ने किलाबंदी कर दी है तो वहीं दूसरी अनुप्रिया पटेल के पार्टी के पूर्व सांसद पकौड़ी लाल कोल ने भी चुनौती दे दी है.
मिर्जापुर जिले में अपना दल (एस) को मिली चुनौती.
मिर्जापुरः उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव में वक्त भले ही अभी काफी बाकी है. लेकिन जोड़तोड़ के साथ नए मोर्चों का लगातार गठन हो रहा है. कहीं पूर्व आईएएस अधिकारी चुनावी मैदान में उतर रहे हैं तो कहीं नेता खुद को अपनी पुरानी पार्टी से अलग करके नई पार्टी का गठन कर रहे हैं. इसके चपेट में मिर्जापुर की राजनीति भी आ गई है. मिर्जापुर इन दिनों भले ही दिव्या मित्तल की वजह से चर्चा में हो. लेकिन अभी कुछ महीनों पहले तक ओटीटी प्लेटफॉर्म और सिनेमाघरों में आई फिल्म की वजह से चर्चा में था. फिल्म और वेब सिरीज में पूरी लड़ाई मिर्जापुर की गद्दी को लेकर रहती है. हर कोई एक-दूसरे को दबाकर मिर्जापुर पर राज करना चाहता है. फिल्म में मुन्ना त्रिपाठी और गुड्डू पंडित के बीच मिर्जापुर की कुर्सी को लेकर अदावत चलती रहती है. लेकिन असलियत में यहां न तो मुन्ना त्रिपाठी हैं और न ही गुड्डू पंडित. यहां लड़ाई है अनुप्रिया पटेल, दिव्या मित्तल और पकौड़ी राम के बीच.
कैसे मुश्किलों में फंस रही हैं अनुप्रिया पटेल
बता दें कि यूपी का विंध्य क्षेत्र और खासतौर पर मिर्जापुर अपना दल (एस) का गढ़ माना जाता है. पार्टी की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल यहां से तीन बार सांसद बनी हैं. अब उनकी ही पार्टी के रॉबर्ट्सगंज से सांसद रहे पकौड़ी लाल कोल नई राजनीतिक पार्टी बनाकर उनकी मुश्किलों को और बढ़ा दिया है. उनसे पहले आईएएस से इस्तीफा देने वालीं दिव्या मित्तल पहले ही चुनौती दे चुकी हैं. इन दोनों घटनाक्रम की चर्चा राजनीतिक गलियारों में खूब हो रही है. इस बीच सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या अनुप्रिया पटेल अपने ही घर में फंस गई हैं. उनके लिए कितनी बड़ी मुश्किलें आने वाली हैं.
पकौड़ी लाल कोल के जाने का क्या होगा असर
विंध्य समता समाज पार्टी बनाने वाले पकौड़ी लाल कोल ने अनुप्रिया पटेल की राजनीतिक मुश्किलों को बढ़ा दिया है. इस नई पार्टी के गठन को अनुप्रिया पटेल के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. बता दें कि सांसद पकौड़ी लाल कोल का मिर्जापुर और विंध्य क्षेत्र में खासतौर पर छानबे और मड़िहान विधानसभा सीटों पर कोल समाज और स्थानीय वोट बैंक पर मजबूत पकड़ है. पकौड़ी लाल कोल समाज के दिग्गज नेता माने जाते हैं. इस पांरपरिक जातीय वोट को एकजुट करने में उनकी अहम भूमिका रही है. छानबे और मड़िहान में पकौड़ी लाल के परिवार का राजनीतिक असर है. उनके परिवार से उनकी बहू रिंकी कोल अपना दल (एस) से विधायक भी हैं. पकौड़ी लाल द्वारा नई पार्टी बनाए जाने से विंध्य क्षेत्र के पारपंरिक वोट बैंक में नए बदलाव आ सकते हैं.
दिव्या मित्तल ने अपनी छवि के सहारे दी चुनौती
पूर्व आईएएस दिव्या मित्तल ने आईएएस से इस्तीफा देकर जननीति भारत नाम से नई राजनीतिक पार्टी बनाई है. चर्चा है कि वह मिर्जापुर सदर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ सकती हैं. राजनीतिक गलियारे में यह बात चल रही है जिले की डीएम रहते हुए अपने कार्यकाल के दौरान दिव्या मित्तल के प्रशासनिक फैसलों और जनहित के कार्यों के चलते दिव्या मित्तल की एक ईमानदार छवि है. इसलिए उन्होंने नई पार्टी का गठन पर मिर्जापुर सदर से चुनाव लड़ने का प्लान तैयार किया है. बता दें कि जब वह मिर्जापुर की डीएम थीं, तब कई मुद्दों को लेकर अपना दल (एस) से उनका मतभेद रहा है.
अपना दल ने कैसे शुरू की नाकेबंदी
हालांकि अब सवाल यह है कि बदली हुई राजनीतिक परिस्थिति अपना दल के लिए कितनी बड़ी राजनीतिक चुनौती होगी. क्या इससे अपना दल निपटने के लिए किसी काट की तलाश कर रही है. पार्टी के सूत्रों का कहना है कि अपना दल (एस) इसके लिए नाकेबंदी शुरू कर दी है. संगठन बूथ से लेकर जिला स्तर तक पार्टी को मजबूत कर रहा है. मिर्जापुर की सभी विधानसभाओं के शहर से लेकर गांव-गांव तक के हर घर पर पार्टी का झंडा लहराने की कवायद चल रही है. पार्टी के पदाधिकारी और कार्यकर्ता एक-एक मतदाता तक पहुंचेंगे. इस बीच दो नवंबर को अपना दल (एस) की संगठनात्मक बैठक भी होने वाली है.
पिछले चुनाव में क्या थे नतीजे
बता दें कि पिछले विधानसभा चुनाव में यहां की पांचों सीटें एनडीए की झोली में आई थी. अपना दल (एस) ने छानबे विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी. साल 2019 में राबर्ट्सगंज लोकसभा सीट से अपना दल (एस) के टिकट पर पकौड़ी लाल कोल ने चुनाव में जीत हासिल की थी. लेकिन 2024 में उनका टिकट काट दिया गया और उनकी बहू को विधानसभा चुनाव में टिकट दिया गया और इससे वह नाराज हो गए.