बिहार में 6 और CO पर एक्शन, एक पर FIR तो कई की वेतनवृद्धि रोकने का आदेश; देखें लिस्ट

बिहार में 6 और CO पर एक्शन, एक पर FIR तो कई की वेतनवृद्धि रोकने का आदेश; देखें लिस्ट


पटना. बिहार में राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने लापरवाही और अनियमितता के मामलों में छह अंचलाधिकारियों पर बड़ी कार्रवाई की है. विभाग की ओर से 26 अक्टूबर 2026 को जारी कार्रवाई की विस्तृत सूची में छह तत्कालीन अंचल अधिकारियों के खिलाफ अलग-अलग दंड और विभागीय कार्रवाई का आदेश दिया गया है. कार्रवाई में आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने से लेकर वेतनवृद्धि रोकने और आरोप पत्र गठित करने तक के फैसले शामिल हैं.

सबसे बड़ी कार्रवाई ठाकुरगंज, किशनगंज के तत्कालीन अंचल अधिकारी ओम प्रकाश भगत के खिलाफ हुई है. आरोप है कि उन्होंने ऐसी जाति के लिए पिछड़ा वर्ग का जाति प्रमाण-पत्र जारी किया, जो बिहार पंचायती राज अधिनियम-2006 की धारा 135 के तहत संबंधित आरक्षित पद की पात्रता नहीं रखती थी. विभाग ने उनके खिलाफ संचयी प्रभाव के साथ दो वेतनवृद्धि रोकने का दंड दिया है. इसके अलावा उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने का आदेश भी दिया गया है. संबंधित राजस्व अधिकारी एवं राजस्व कर्मचारी के खिलाफ भी FIR दर्ज कराने और आरोप पत्र गठित करने का आदेश दिया गया है.

इन 6 CO पर इन मामलों में हुआ एक्शन?

1. ओम प्रकाश भगत: तत्कालीन अंचल अधिकारी, ठाकुरगंज, किशनगंज
– गलत तरीके से जाति प्रमाण-पत्र जारी करने का आरोप.
– दो वेतनवृद्धि रोकने का आदेश.
– आपराधिक मुकदमा (FIR) दर्ज कराने का आदेश.
– संबंधित राजस्व अधिकारी और राजस्व कर्मचारी पर भी FIR और आरोप पत्र की कार्रवाई.

2. निश्चल प्रेम: तत्कालीन अंचल अधिकारी, किशनगंज
– बिना कार्यादेश के अग्रिम भुगतान और वित्तीय अनियमितता का आरोप.
– मामले की जांच के बाद अनुशासनिक कार्रवाई शुरू करने का आदेश.

3. जितेंद्र कुमार सिंह: तत्कालीन अंचल अधिकारी, अकोढ़ीगोला, रोहतास
– दाखिल-खारिज वाद में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं करने का आरोप.
– संयुक्त जमाबंदी के बावजूद सभी जमाबंदी रैयतों को सूचना दिए बिना दाखिल-खारिज स्वीकृत करने का आरोप.
– तीन वेतनवृद्धि रोकने का आदेश.

4. ललन कुमार मंडल: तत्कालीन अंचल अधिकारी, बरारी, कटिहार
– अतिक्रमित भूमि को खाली नहीं कराने का आरोप.
– सरकारी आदेश संख्या 660/2023 का समय पर अनुपालन नहीं करने का आरोप.
– आरोप पत्र गठित किया गया.

5. महेश प्रसाद सिंह: तत्कालीन अंचल अधिकारी, मनसाही, कटिहार
– भूमि सुधार उपसमाहर्ता के आदेश के विपरीत दाखिल-खारिज एवं खतियान में लंबित नामांतरण वाद स्वीकार करने का आरोप.
– आरोप पत्र गठित किया गया.

6. राज नारायण राजा: तत्कालीन अंचल अधिकारी, हथुआ, गोपालगंज
– विभागीय निर्देश के विपरीत दाखिल-खारिज वादों को लंबे समय तक लंबित रखने का आरोप.
– चार वाद एक साल से अधिक समय तक लंबित रखने का उल्लेख.
– दो वेतनवृद्धि रोकने का आदेश.

बिना कार्रवाई के अग्रिम भुगतान का मामला

किशनगंज के तत्कालीन अंचल अधिकारी निश्चल प्रेम के खिलाफ बिना कार्यादेश के अग्रिम भुगतान करने और वित्तीय अनियमितता करने का आरोप है. उनके मामले में जांच के बाद अनुशासनिक कार्रवाई प्रारंभ करने का आदेश दिया गया है.

तीन वेतनवृद्धि रोकने का आदेश

अकोढ़ीगोला, रोहतास के तत्कालीन अंचल अधिकारी जितेंद्र कुमार सिंह पर दाखिल-खारिज वाद में आपत्ति दाखिल करने की तिथि से पहले ही वाद का निष्पादन करने का आरोप है. संयुक्त जमाबंदी होने के बावजूद सभी जमाबंदी रैयतों को सूचना दिए बिना दाखिल-खारिज स्वीकृत करने का भी आरोप है. विभाग ने उनके खिलाफ संचयी प्रभाव के बिना तीन वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया है.

दो अधिकारियों के खिलाफ आरोप पत्र गठित

बरारी, कटिहार के तत्कालीन अंचल अधिकारी ललन कुमार मंडल पर अतिक्रमित भूमि को खाली नहीं कराने और सरकारी आदेश संख्या 660/2023 का समय पर अनुपालन नहीं करने का आरोप है. उनके खिलाफ आरोप पत्र गठित किया गया है. वहीं मनसाही, कटिहार के तत्कालीन अंचल अधिकारी महेश प्रसाद सिंह पर भूमि सुधार उपसमाहर्ता, कटिहार के पारित आदेश के विपरीत दाखिल-खारिज एवं खतियान में लंबित नामांतरण वाद को स्वीकार करने का आरोप है. उनके खिलाफ भी आरोप पत्र गठित किया गया है.

गोपालगंज के तत्कालीन CO की भी वेतनवृद्धि रोकी

गोपालगंज के तत्कालीन अंचल अधिकारी राज नारायण राजा पर विभागीय निर्देश के विपरीत दाखिल-खारिज वादों को लंबे समय तक लंबित रखने का आरोप है. सूची के अनुसार चार वादों को एक वर्ष से अधिक समय तक लंबित रखा गया और बार-बार स्मार के बावजूद कारण-पृच्छा समर्पित नहीं की गई. विभाग ने उनके खिलाफ संचयी प्रभाव के बिना दो वेतनवृद्धि रोकने का आदेश दिया है.

कार्रवाई से अधिकारियों में हड़कंप

राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग की इस कार्रवाई से अंचल स्तर पर अधिकारियों में हड़कंप मच सकता है. विभाग ने अलग-अलग मामलों में जांच और आरोपों की प्रकृति के आधार पर दंड तय किया है. एक अधिकारी के खिलाफ जहां आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने तक का आदेश दिया गया है, वहीं अन्य अधिकारियों पर वेतनवृद्धि रोकने और आरोप पत्र गठित करने जैसी कार्रवाई की गई है.



Source link