Why Do More Cyclones In Bay of Bengal: बंगाल की खाड़ी में बने प्रचंड चक्रवाती तूफान के 28 अक्तूबर को आंध्र प्रदेश तट से टकराने की आशंका है. इस कारण आंध्र प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल और झारखंड तक में 125 किमी की रफ्तार से आंधी चलने और भारी बारिश होने की आशंका है. ऐसे में इन तमाम तटीय राज्यों में एहतियात के तौर पर हजारों लोगों को सुरक्षित स्थानों पहुंचाने की काम चल रहा है, ताकि इस आपदा से कोई बड़ा नुकसान न हो. लेकिन, बड़ा सवाल यह है कि बंगाल की खाड़ी में अपेक्षाकृत ज्यादा तूफान क्यों आते हैं. भारत करीब-करीब तीन तरफ से समंदर से घिरा है. पूर्वी क्षेत्र में भारत की बड़ी सीमा बंगाल की खाड़ी से लगती है जबकि पश्चिम और दक्षिण भारत के इलाके अरब सागर और हिंद महासागर से लगते हैं. लेकिन, चक्रवात की अधिकतर घटनाएं बंगाल की खाड़ी में देखा जाता है. इससे आंध्र प्रदेश, ओडिशा और पश्चिम बंगाल सबसे ज्यादा प्रभावित होते रहते हैं. आखिर ऐसा क्यों हैं. इस बार भी बंगाल की खाड़ी में ही प्रचंड तूफान पैदा हुआ है. इससे ओडिशा, आंध्र प्रदेश के साथ-साथ पश्चिम बंगाल और झारखंड तक में भारी बारिश और तेज आंधी चलने की आशंका है.
भारत मौसम विज्ञान विभाग के आंकड़े बताते हैं कि बंगाल की खाड़ी में अरब सागर के मुकाबले कहीं ज्यादा चक्रवाती गतिविधियां होती हैं. एक रिपोर्ट के मुताबिक 1990 से 2020 के बीच बंगाल की खाड़ी में 190 और अरब सागर में 73 चक्रवाती हलचल दर्ज किए गए. यानी बंगाल की खाड़ी में इनकी संख्या अरब सागर के मुकाबले ढाई गुने से भी ज्यादा रही. रिपोर्ट यह भी कहती है कि सामान्य तौर पर अरब सागर में बनने वाले हर एक चक्रवात के मुकाबले बंगाल की खाड़ी में करीब चार चक्रवात बनते हैं. अब सवाल यह है कि इन दोनों समुद्रों के मिजाज में इतना अंतर क्यों है? इसका जवाब समुद्र के तापमान, हवा में मौजूद नमी, वायुमंडलीय परिस्थितियों और समुद्र की भौगोलिक बनावट में छिपा है.
चक्रवात बनने के लिए समुद्र की सतह का गर्म होना बेहद जरूरी है. आमतौर पर समुद्र की सतह का तापमान 26.5 से 27 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक होने पर चक्रवात बनने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन सकती हैं. हालांकि, केवल तापमान बढ़ने से ही चक्रवात नहीं बन जाता. इसके लिए हवा और वायुमंडल की दूसरी परिस्थितियां भी अनुकूल होनी चाहिए.
बंगाल की खाड़ी में समुद्र की सतह का तापमान अक्सर 28 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच जाता है. इतना गर्म पानी हवा को ऊर्जा और नमी देता है. समुद्र के ऊपर मौजूद गर्म और नम हवा ऊपर उठती है. इससे नीचे कम दबाव बनने लगता है. आसपास की हवा इस कम दबाव वाले क्षेत्र की ओर बढ़ती है और पृथ्वी के रोटेशन यानी घूर्णन के प्रभाव से घूमने लगती है. अनुकूल परिस्थितियां बनी रहें तो यह सिस्टम धीरे-धीरे चक्रवात का रूप ले सकता है.
बंगाल की खाड़ी में गंगा, ब्रह्मपुत्र और दूसरी बड़ी नदियों का मीठा पानी भी पहुंचता है. यह पानी समुद्र की सतह पर कम लवणता वाली एक परत बनाने में मदद करता है. इसके कारण सतह का गर्म पानी नीचे मौजूद ठंडे पानी के साथ आसानी से नहीं मिल पाता. कुछ परिस्थितियों में इससे समुद्र की ऊपरी परत गर्म बनी रह सकती है और चक्रवात को ऊर्जा मिलती रहती है.
इसके उलट, अरब सागर के कुछ हिस्सों में समुद्री धाराओं, तेज हवाओं और पानी के ऊपर उठने-नीचे जाने की प्रक्रिया के कारण समुद्र की सतह अपेक्षाकृत ठंडी रहती है. इससे वहां चक्रवात बनने और उनके तेजी से मजबूत होने की परिस्थितियां कई बार कमजोर पड़ जाती हैं.
चक्रवात को ताकत देने के लिए गर्म पानी के साथ पर्याप्त नमी भी चाहिए. समुद्र से उठने वाली नम हवा ऊपर जाकर ठंडी होती है और उसमें मौजूद वाष्प संघनित होकर बादल बनाते हैं. इस प्रक्रिया में हीट निकलती है, जो चक्रवात को ऊर्जा देने में मदद करती है. बंगाल की खाड़ी आबादी वाले इलाकों से घिरी है. इस कारण नमी की पर्याप्त उपलब्धता चक्रवाती सिस्टम के विकसित होने के लिए अनुकूल परिस्थितियां बना सकती है.
दूसरी तरफ, अरब प्रायद्वीप और आसपास के शुष्क क्षेत्रों से आने वाली शुष्क हवा अरब सागर के कुछ हिस्सों में नमी कम कर सकती है. ऐसी हवा किसी डेवलप हो रहे चक्रवात की ताकत को कमजोर कर सकती है.
बंगाल की खाड़ी और अरब सागर में इन परिस्थितियों का अंतर मौसम, स्थान और समय के हिसाब से बदलता रहता है. इन परिस्थितियों का संयुक्त प्रभाव दोनों समुद्री क्षेत्रों में चक्रवातों की संख्या और तीव्रता के अंतर को समझने में मदद करता है.
बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती गतिविधियों का एक अन्य कारण दक्षिण चीन सागर और पश्चिमी प्रशांत महासागर के आसपास बनने वाले मौसमी सिस्टम भी हैं. कई बार इन क्षेत्रों में बने कम दबाव वाले सिस्टम का प्रभाव दक्षिण-पूर्व एशिया की ओर बढ़ते हुए बंगाल की खाड़ी तक पहुंच जाता है. यहां का गर्म समुद्री सतह और अनुकूल वायुमंडलीय परिस्थितियां मिलने पर ये सिस्टम दोबारा मजबूत हो जाते हैं.
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