पोर्ट ऑफ रॉटरडैम: यूरोप का वो दरवाजा, जहां से अरबों कमाने की तैयारी में भारत
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100 उद्योगपतियों को लेकर यूरोप के दौरे पर गए केंद्रीय कॉमर्स मिनिस्टर पीयूष गोयल सोमवार को नीदरलैंड के पोर्ट ऑफ रॉटरडैम पहुंचे. ये वो जगह है, जहां से भारत अरबों डॉलर कमाने की तैयारी कर रहा है. यही वो पोर्ट है, जहां भारत का माल उतरेगा और पूरे यूरोप में बिकेगा. इसलिए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होने से पहले ही सरकार सबकुछ चेक कर लेना चाहती है. यही वजह है कि पीयूष गोयल पोर्ट ऑफ रॉटरडैम पहुंच गए. वहां के अधिकारियों से बात की. लॉजिस्टिक्स पर चर्चा की. आप सोच रहे होंगे कि यह जगह इतनी इंपॉर्टेंट क्यों है?
मान लीजिए आपने कानपुर में चमड़े के जूते बनाए. सूरत में कपड़ा तैयार किया. हैदराबाद में दवा बनाई. अब इन सबको यूरोप में बेचना है. आपको लगता होगा कि माल बनाओ, जहाज पर लादो और विदेश भेज दो. फ्री ट्रेड एग्रीमेंट तो होने ही वाला है. लेकिन कहानी सिर्फ इनती नहीं है. आपका जहाज चला तो गया लेकिन उतरेगा कहां? वहां से माल गोदाम तक कैसे पहुंचेगा? वहां से जर्मनी, फ्रांस या दूसरे देशों के दुकानदारों तक कौन पहुंचाएगा? इन पर कितना पैसा खर्च होगा? यह भी गुणागणित करना पड़ता है. सबसे पहले वो पोर्ट ढूंढना पड़ता है जहां माल उतरेगा. नीदरलैंड का पोर्ट ऑफ रॉटरडैम वही जगह है. इसे आप गेटवे ऑफ यूरोप यानी यूरोप का दरवाजा कह सकते हैं. इसीलिए केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल नीदरलैंड के पोर्ट ऑफ रॉटरडैम पहुंचे.
यूरोप का नक्शा देखिए. उसके पश्चिमी हिस्से में नीदरलैंड है. इसी देश में रॉटरडैम शहर बसा है. यहां मौजूद बंदरगाह यूरोप का सबसे बड़ा समुद्री बंदरगाह है. यहीं पर भारत का माल विशाल जहाजों से भरकर आएगा. कंटेनर से सामान उतारकर छंटाई होगी और फिर उन्हें गोदामों में भेज दिया जाएगा. फिर गोदामों से सड़क, रेल या नहरों के रास्ते यूरोप के अलग-अलग इलाकों तक पहुंचाया जाएगा. यानी जहाज भारत से माल लेकर आया तो जरूरी नहीं कि सामान नीदरलैंड में ही बिके. वह यहां से जर्मनी जा सकता है, बेल्जियम पहुंच सकता है या यूरोप के दूसरे बाजारों की तरफ निकल सकता है. इसीलिए रॉटरडैम को यूरोप का प्रवेश द्वार कहा जाता है.
पहली बात, यहां कंटेनर कारोबार के साथ तेल, रसायन, ऊर्जा और दूसरे औद्योगिक सामान की आवाजाही भी होती है. बंदरगाह के आसपास गोदाम, औद्योगिक इकाइयां और माल को आगे भेजने वाली सुविधाओं का बड़ा नेटवर्क है. दूसरी बात, यहां से सामान को आगे भेजने के कई रास्ते मिलते हैं. जहाज से माल उतरा, तो उसे सड़क से ट्रक में भरकर भेज सकते हैं. रेल का इस्तेमाल कर सकते हैं. जरूरत के मुताबिक अंतर्देशीय जलमार्ग भी काम आते हैं. इसे ऐसे समझिए कि जर्मनी की किसी फैक्ट्री को मशीन के पुर्जे चाहिए. वह पुर्जे भारत से मंगाती है. माल यूरोप पहुंचने के बाद उसे जर्मनी तक पहुंचाने के लिए एक मजबूत परिवहन व्यवस्था चाहिए. रॉटरडैम जैसे केंद्र इस काम में मदद कर सकते हैं.
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तीसरी बात, यहां सिर्फ माल उतारने का काम नहीं होता. सामान को संभालना, रखना, उसकी आवाजाही का हिसाब रखना और अलग-अलग जगहों तक पहुंचाने की व्यवस्था भी इसी बड़े कारोबार का हिस्सा है. यानी रॉटरडैम कोई साधारण बंदरगाह नहीं, बल्कि माल को एक देश से दूसरे देश के बाजार तक पहुंचाने वाली पूरी मशीनरी का अहम हिस्सा है.
भारत का क्या फायदा? मान लीजिए कि गुजरात की एक कंपनी जर्मनी को मशीनों के पुर्जे बेचती है. जर्मन ग्राहक को सामान समय पर चाहिए. माल पहुंचाने में देरी हुई या ढुलाई महंगी पड़ी, तो ग्राहक किसी दूसरे देश की कंपनी से सामान खरीद सकता है. अब अगर भारतीय कंपनी को यूरोप में माल पहुंचाने का बेहतर नेटवर्क मिलता है, तो उसके लिए कारोबार बढ़ाने का अवसर बन सकता है. वह नए खरीदारों तक पहुंच सकती है और अपने माल की सप्लाई को बेहतर तरीके से व्यवस्थित कर सकती है. यही बात कपड़ा बनाने वाली कंपनी, दवा निर्यातक और दूसरे भारतीय कारोबारियों पर भी लागू होती है.
भारत अरबों रुपये कैसे कमाएगा? भारतीय कंपनियां यूरोप में ज्यादा सामान बेचती हैं, तो उनकी बिक्री बढ़ सकती है. ज्यादा ऑर्डर का मतलब ज्यादा उत्पादन, कारोबार और रोजगार के अवसर भी हो सकते हैं. दूसरा, भारतीय कंपनियां समुद्री माल ढुलाई, गोदाम, वितरण और दूसरी व्यापारिक सेवाओं में यूरोप के कारोबारियों के साथ साझेदारी कर सकती हैं. इससे नए कारोबारी अवसर पैदा हो सकते हैं. तीसरा, यूरोप के खरीदारों को अगर भारतीय कंपनियों से भरोसेमंद सप्लाई मिलती है, तो वे बार-बार ऑर्डर दे सकते हैं. इससे भारतीय कंपनियों को अपना कारोबार बढ़ाने में मदद मिलेगी.
फिर पीयूष गोयल वहां गए क्यों? भारत यूरोप में अपना कारोबार बढ़ाना चाहता है. इसके लिए व्यापार समझौतों के साथ-साथ ऐसी सुविधाओं की भी जरूरत है, जिनसे सामान यूरोपीय बाजार तक आसानी से पहुंचे. इसी वजह से पीयूष गोयल ने रॉटरडैम में समुद्री परिवहन और लॉजिस्टिक्स क्षेत्र से जुड़े लोगों के साथ बातचीत की. भारत और यूरोपीय संघ के मुक्त व्यापार समझौते यानी एफटीए भी महत्वपूर्ण है. अगर समझौते के तहत भारतीय उत्पादों को यूरोपीय बाजार में बेहतर पहुंच मिलती है, तो निर्यात बढ़ाने के अवसर पैदा हो सकते हैं. ऐसे में रॉटरडैम जैसे बंदरगाहों की अहमियत बढ़ सकती है.