अम‍ित शाह मानहान‍ि केस: राहुल गांधी के कोर्टरूम में पहुंचते ही दरवाजा हो गया बंद, फ‍िर जज ने ‘3 प्‍वाइंट’ के आधार पर द‍िया फैसला


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Rahul Gandhi Defamation Case: अमित शाह मानहानि मामले में सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने राहुल गांधी को बरी कर दिया. कोर्ट ने शिकायतकर्ता को पीड़ित पक्ष नहीं माना और कथित बयान को मानहानिपूर्ण नहीं पाया. फैसले के खिलाफ शिकायतकर्ता विजय मिश्रा अपील करने की तैयारी में हैं.

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राहुल के कोर्टरूम में पहुंचते ही दरवाजा हो गया बंद, इन '3 प्‍वाइंट' पर फैसलाZoom

राहुल गांधी को अदालत ने मानहान‍ि के मामले में बरी कर द‍िया है (फोटो: पीटीआई)

नई द‍िल्‍ली. राहुल गांधी को केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह से जुड़े मानहानि मामले में बड़ी राहत मिली है. उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत ने सोमवार को उन्हें आरोपों से बरी कर दिया. कोर्ट ने फैसला सुनाते समय तीन अहम पहलुओं पर विचार किया. इनमें शिकायतकर्ता का पीड़ित पक्ष होना, कथित बयान का मानहानिपूर्ण होना और सबूत के तौर पर पेश की गई CD शामिल हैं. हालांकि, शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने कहा है कि वह इस फैसले को अपीलीय अदालत में चुनौती देंगे.

राहुल गांधी के पहुंचते ही बंद हुआ कोर्टरूम का दरवाजा
राहुल गांधी सोमवार सुबह करीब 11:10 बजे सुल्तानपुर की विशेष एमपी-एमएलए अदालत पहुंचे. उनके आने से पहले कोर्ट परिसर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी. राहुल गांधी के कोर्टरूम में दाखिल होने के बाद दरवाजा बंद कर दिया गया और इसके बाद मामले में सुनवाई हुई. इस मामले में शिकायतकर्ता विजय मिश्रा हैं. उन्होंने साल 2018 में राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी. उनका आरोप था कि राहुल गांधी ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान बेंगलुरु में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह के लिए कथित तौर पर ‘हत्यारा’ शब्द का इस्तेमाल किया था. उस समय अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. शिकायतकर्ता का कहना था कि इस टिप्पणी से बीजेपी और उसके कार्यकर्ताओं की छवि को नुकसान पहुंचा.

कोर्ट ने किन 3 पॉइंट्स के आधार पर दिया फैसला?

शिकायतकर्ता के वकील संतोष पांडे के मुताबिक, अदालत ने मामले में तीन अहम बातों पर विचार किया.
1- शिकायतकर्ता को पीड़ित पक्ष नहीं माना
कोर्ट ने माना कि शिकायतकर्ता विजय मिश्रा इस मामले में कानूनी रूप से पीड़ित पक्ष नहीं हैं. यही फैसले का एक अहम आधार रहा.

2- राहुल गांधी की टिप्पणी को मानहानि नहीं माना
अदालत ने कथित बयान को मानहानिपूर्ण नहीं पाया. इसी आधार पर राहुल गांधी को आरोपों से बरी कर दिया गया.

3 – CD को सबूत के तौर पर स्वीकार किया
शिकायतकर्ता की ओर से पेश CD को सबूत के तौर पर स्वीकार किया गया था. हालांकि, सिर्फ CD स्वीकार होने से मानहानि का आरोप साबित नहीं हुआ.

2018 में दर्ज हुआ था मानहानि का मामला
यह मामला मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के प्रचार के दौरान राहुल गांधी की ओर से बेंगलुरु में दिए गए कथित बयान से जुड़ा है. उस समय अमित शाह बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे. बीजेपी नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. उन्होंने आरोप लगाया था कि राहुल गांधी के बयान से अमित शाह की छवि के साथ बीजेपी और उसके कार्यकर्ताओं की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचा. बाद में राहुल गांधी को कोर्ट में पेश होने के लिए समन जारी किया गया. वह फरवरी 2024 में अदालत में पेश हुए थे और उन्हें जमानत मिली थी. सुनवाई के दौरान शिकायतकर्ता ने राहुल गांधी के वॉयस सैंपल की CD में मौजूद रिकॉर्डिंग से तुलना कराने की मांग भी की थी, लेकिन ट्रायल कोर्ट ने इसे स्वीकार नहीं किया.

अब आगे क्या होगा?
फैसले के बाद शिकायतकर्ता विजय मिश्रा ने कहा है कि वह आदेश की प्रमाणित कॉपी हासिल करेंगे. इसके बाद वकीलों से सलाह लेकर अपीलीय अदालत में फैसले को चुनौती देंगे. यानी फिलहाल सुल्तानपुर की अदालत ने राहुल गांधी को इस मामले में बरी कर दिया है, लेकिन शिकायतकर्ता फैसले के खिलाफ आगे कानूनी कदम उठाने की तैयारी में हैं.

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