Saudi Arabia Bangladesh News: सऊदी हूती युद्ध की आग में झुलसा बांग्लादेश, लाखों परिवारों पर टूटा आफत का पहाड़, पाकिस्तान वाला होगा हाल?

Saudi Arabia Bangladesh News: सऊदी हूती युद्ध की आग में झुलसा बांग्लादेश, लाखों परिवारों पर टूटा आफत का पहाड़, पाकिस्तान वाला होगा हाल?


पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का असर अब उन गरीब परिवारों पर भी पड़ रहा है, जिनके लिए विदेश में नौकरी करना गरीबी से बाहर निकलने का सबसे बड़ा रास्ता है. इसकी सबसे बड़ी चोट बांग्लादेश को लग रही है. यहां के हजारों मजदूरों की रोजी-रोटी और भविष्य पर संकट मंडरा रहा है. किसी की फ्लाइट रद्द हो रही है, तो किसी को नौकरी छूटने का डर सता रहा है. विदेश जाने के लिए लाखों रुपये का कर्ज लेने वाले परिवारों को चिंता है कि अगर नौकरी हाथ से निकल गई, तो कर्ज चुकाने के लिए उन्हें फिर उधार लेना पड़ेगा. सबसे बड़ी समस्या सऊदी अरब और हूतियों के बीच की जंग के बाद हो रहा है. बांग्लादेश का विदेशी मुद्रा भंडार कम हो रहा है. सवाल यही है कि कहीं उसका हाल पाकिस्तान की तरह न हो जाए.

उधार चुकाने के लिए उधार लेना पड़ेगा?

बांग्लादेश न्यूज आउटलेट द डेली स्टार ने बांग्लादेश के सतखीरा जिले के रहने वाले 30 साल के मोहम्मद रेजाउल करीम से बात की, जिनकी कहानी इस संकट की गंभीरता बताती है. उन्होंने सऊदी अरब में नौकरी पाने के लिए 4.5 लाख टका यानी लगभग साढ़े तीन लाख का कर्ज लिया था. इस कर्ज को चुकाने में उन्हें दो साल लग गए. हाल ही में उनकी आर्थिक स्थिति थोड़ी संभलनी शुरू हुई थी, लेकिन अब उनकी चिंता फिर बढ़ गई है. 11 अक्टूबर को उनकी फ्लाइट रद्द हो गई, जिसके बाद वह बांग्लादेश में ही फंस गए. रेजाउल को डर है कि अगर वह 5 नवंबर को वीजा की समयसीमा खत्म होने से पहले सऊदी अरब नहीं लौट पाए, तो उन्हें दोबारा 4 से 5 लाख टका तक का कर्ज लेना पड़ सकता है.

रेजाउल सऊदी अरब के दम्माम में एक रिहायशी होटल में काम करते हैं. परिवार में वह अकेले कमाने वाले हैं. उनकी कमाई से माता-पिता, बेटी और छोटे भाई का खर्च चलता है. आर्थिक तंगी के कारण उन्हें सेकेंडरी स्कूल सर्टिफिकेट पूरा करने के बाद इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग का डिप्लोमा कोर्स भी छोड़ना पड़ा था. उन्होंने कहा, ‘अगर हम गरीब नहीं होते, तो विदेश में काम करने क्यों जाते?’

बांग्लादेश में गरीबी बढ़ने से विदेश की नौकरी पर निर्भरता

बांग्लादेश में बड़ी संख्या में परिवार विदेश में काम करने वाले अपने सदस्यों की कमाई पर निर्भर हैं. विश्व बैंक के अनुमान के मुताबिक, देश में गरीबी दर 2022 के 18.7 फीसदी से बढ़कर 2026 में 22.5 फीसदी हो गई. रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 21 लाख और लोग गरीबी की चपेट में आ गए. इसके अलावा, लगभग 6.2 करोड़ लोग ऐसे हैं, जो किसी आर्थिक झटके के कारण गरीबी में जा सकते हैं. ऐसे हालात में विदेश की नौकरी केवल बेहतर कमाई का जरिया नहीं, बल्कि पूरे परिवार को आर्थिक संकट से बाहर निकालने की उम्मीद भी है. लेकिन पश्चिम एशिया में युद्ध और हवाई सेवाओं में रुकावट ने इस उम्मीद को कमजोर कर दिया है.

सऊदी अरब जाने वाली फ्लाइटें प्रभावित

सऊदी अरब बांग्लादेशी प्रवासी मजदूरों के लिए सबसे बड़ा विदेशी रोजगार बाजार है. यमन के हूती विद्रोहियों के हमलों और सऊदी हवाई अड्डों पर सुरक्षा प्रतिबंधों के कारण उड़ानें प्रभावित हुई हैं. 14 अक्टूबर तक जो आंकड़ों आए उसके मुताबिक, इन पाबंदियों से 100 उड़ानों पर असर पड़ा था और करीब 15,400 बांग्लादेशी यात्री प्रभावित हुए थे. उनका कहना है कि संकट का असर सिर्फ उन लोगों पर नहीं है, जो अपने देश में फ्लाइट का इंतजार कर रहे हैं. सऊदी अरब में पहले से काम कर रहे कई बांग्लादेशी मजदूर भी प्रभावित हो रहे हैं. इनमें से कुछ रोजाना या साप्ताहिक काम पर निर्भर हैं और सुरक्षा चिंताओं के कारण उनके लिए रोजगार के अवसर घटे हैं. शरीफुल हसन के मुताबिक, इस साल की शुरुआत से अब तक 33,611 बांग्लादेशी मजदूर सऊदी अरब से लौट चुके हैं.

कर्ज, नौकरी और कमाई- तीनों पर एक साथ दबाव

सेंटर फॉर पॉलिसी डायलॉग के फेलो प्रोफेसर मुस्तफिजुर रहमान ने बताया कि मौजूदा संकट बांग्लादेश के विदेशी रोजगार बाजार पर तीन तरह का दबाव डाल रहा है. पहला, विदेश में काम कर रहे कुछ मजदूरों की कमाई घट रही है. दूसरा, विदेश जाने के लिए कर्ज लेकर टिकट खरीद चुके लोगों को यात्रा रद्द होने या टलने से अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है. तीसरा, विदेश जाने वाले नए मजदूरों की संख्या घट सकती है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर संकट जल्द नहीं सुलझा, तो आने वाले दिनों में ये तीनों समस्याएं और गंभीर हो सकती हैं.

बांग्लादेश के सामने विदेशी मुद्रा का भी सवाल

विदेशों में काम करने वाले बांग्लादेशी नागरिकों की कमाई देश की अर्थव्यवस्था के लिए भी अहम है. विदेश से आने वाला पैसा परिवारों के खर्च, बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर चलाने में मदद करता है. साथ ही, यह बांग्लादेश के विदेशी मुद्रा भंडार और बाहरी भुगतान संतुलन को सहारा देता है. रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब में करीब 35 लाख बांग्लादेशी रहते हैं. मौजूदा वित्त वर्ष की पहली तिमाही के दौरान वहां से बांग्लादेश को 1.95 अरब डॉलर की रकम मिली, जो कुल रेमिटेंस का 19.2 फीसदी थी. बांग्लादेश की सालाना 30 अरब डॉलर से अधिक की रेमिटेंस का लगभग आधा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है. बांग्लादेश इकोनॉमिक रिव्यू 2025 के अनुसार, वित्त वर्ष 2024-25 में विदेश में नौकरी पाने वाले बांग्लादेशी मजदूरों में से 86 फीसदी सऊदी अरब, ओमान, कतर, संयुक्त अरब अमीरात और कुवैत गए थे.



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