Petrol-Diesel Price Today, 25 October 2026: अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमत 116 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. ऐसे में भारतीय वाहन चालकों के मन में सवाल है कि क्या पेट्रोल और डीजल भरवाने के लिए अब ज्यादा पैसे चुकाने पड़ रहे हैं? फिलहाल 25 अक्टूबर को उपलब्ध शहरवार आंकड़ों के मुताबिक, देश के प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव दर्ज नहीं किया गया है. हालांकि, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें आगे ईंधन की लागत पर दबाव डाल सकती हैं.
25 अक्टूबर 2026 को उपलब्ध दरों के अनुसार, दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और पटना समेत प्रमुख शहरों में पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर हैं. अलग-अलग शहरों में दरों का अंतर स्थानीय टैक्स और अन्य लागतों की वजह से बना हुआ है.
देश के 17 शहरों में पेट्रोल-डीजल का भाव
तेल की कीमतों में 25 अक्टूबर 2026 को कोई बदलाव नहीं हुआ. जानिए आपके शहर में पेट्रोल और डीजल की कीमत कितनी है. कहां सबसे सस्ता पेट्रोल डीजल मिल रहा है.
| शहर | पेट्रोल का भाव (प्रति लीटर) | डीजल का भाव (प्रति लीटर) |
|---|---|---|
| दिल्ली | ₹102.12 | ₹95.20 |
| नोएडा | ₹102.12 | ₹95.56 |
| फरीदाबाद | ₹103.28 | ₹95.94 |
| गुरुग्राम | ₹102.97 | ₹95.64 |
| भोपाल | ₹114.57 | ₹99.64 |
| पटना | ₹113.37 | ₹99.36 |
| जयपुर | ₹112.69 | ₹97.78 |
| रांची | ₹105.26 | ₹100.49 |
| मुंबई | ₹111.18 | ₹97.83 |
| कोलकाता | ₹113.47 | ₹99.82 |
| तिरुवनंतपुरम | ₹115.49 | ₹104.40 |
| चेन्नई | ₹107.77 | ₹99.55 |
| लखनऊ | ₹101.89 | ₹95.36 |
| बेंगलुरु | ₹110.93 | ₹98.80 |
| भुवनेश्वर | ₹109.92 | ₹100.92 |
| चंडीगढ़ | ₹98.10 | ₹86.09 |
| हैदराबाद | ₹115.69 | ₹103.82 |
116 डॉलर के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड, WTI भी 103 डॉलर के ऊपर
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं. 24 अक्टूबर के उपलब्ध बाजार आंकड़ों के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड का भाव 116.93 डॉलर प्रति बैरल और अमेरिकी बेंचमार्क WTI क्रूड का भाव 103.44 डॉलर प्रति बैरल दर्ज किया गया था. अन्य उपलब्ध आंकड़ों में ब्रेंट क्रूड 116.72 से 117.38 डॉलर और WTI 103.27 से 103.44 डॉलर प्रति बैरल के दायरे में रहा.
एक बैरल में करीब 159 लीटर कच्चा तेल होता है. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि कच्चे तेल की कीमत को सीधे पेट्रोल की प्रति लीटर कीमत से जोड़ दिया जाए. कच्चे तेल को रिफाइन करने, परिवहन, रुपये-डॉलर की विनिमय दर, केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स और डीलर कमीशन का भी अंतिम कीमत पर असर पड़ता है.
कच्चा तेल महंगा, फिर भी पेट्रोल-डीजल के दाम क्यों नहीं बढ़े?
- तेल कंपनियों की कीमत तय करने की नीति: कंपनियां कच्चे तेल की लागत के साथ दूसरी लागतों और बाजार की परिस्थितियों को भी ध्यान में रखती हैं.
- केंद्र और राज्य सरकारों के टैक्स: अलग-अलग राज्यों में करों का अंतर होने से पेट्रोल-डीजल के दाम भी अलग-अलग रहते हैं.
- रुपये और डॉलर का एक्सचेंज रेट: भारत कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है. रुपया कमजोर होने पर तेल आयात करना महंगा पड़ सकता है.
- रिफाइनिंग और ढोने का खर्च: कच्चे तेल को पेट्रोल-डीजल में बदलने और पेट्रोल पंप तक पहुंचाने में भी लागत आती है.
- दुनियाभर में तनाव का असर: युद्ध, तेल उत्पादक देशों के फैसले और समुद्री रास्तों में रुकावट से कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आ सकती है.
क्या आने वाले दिनों में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?
कच्चे तेल का 116 डॉलर प्रति बैरल के पार जाना भारत के लिए मुसीबत की तरह है. क्योंकि हम अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात से पूरा करता है. लंबे समय तक तेल महंगा रहने पर आयात बिल और ईंधन की लागत पर दबाव बढ़ सकता है. हालांकि, सिर्फ कच्चे तेल की तेजी के आधार पर यह कहना सही नहीं होगा कि भारत में पेट्रोल-डीजल के दाम अगले दिन बढ़ जाएंगे. कीमतों में बदलाव कच्चे तेल के रुझान, रुपये की चाल, तेल कंपनियों की लागत और सरकार की नीतियों पर निर्भर करेगा.