जवानों की तलाशी लेते चीनी सैनिक… पाकिस्तान फैला रहा था ये झूठ, ऐसी खुली पोल
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Pakistan News Today: पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया हैंडल्स ने भारतीय सेना को लेकर भ्रामक वीडियो वायरल किया. इसमें दावा किया गया कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिक भारतीय जवानों की तलाशी ले रहे हैं. भारतीय सेना ने इस दावे को फर्जी बताया है. सेना के मुताबिक, वीडियो अरुणाचल का नहीं, बल्कि मई 2026 में बेंगलुरु में हुए आतंकवाद विरोधी अभ्यास का है। सेना ने लोगों से अपुष्ट जानकारी साझा करने से बचने की अपील की है.
सेना ने झूठ की पोल खोल दी. (PTI)
पाकिस्तान की नापाक हरकतों का एक और फजीहत भरा नमूना सामने आया है. इस बार पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स ने भारतीय सेना को बदनाम करने के लिए जो प्रोपेगेंडा फैलाया, उसका सच जानकर आपके होश उड़ जाएंगे. पाकिस्तान समर्थित अकाउंट्स से एक वीडियो शेयर कर यह दावा किया गया कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिक भारतीय जवानों की तलाशी ले रहे हैं और भारत को वहां आने-जाने के लिए चीन से परमिशन लेनी पड़ रही है. लेकिन भारतीय सेना की फैक्ट चेक टीम ने इस झूठे ड्रामे का पर्दाफाश करते हुए धज्जियां उड़ा दी हैं. असल में यह वीडियो अरुणाचल का है ही नहीं बल्कि कर्नाटक के बेंगलुरु में हुए एक एंटी-टेरर ड्रिल (आतंकवाद विरोधी अभ्यास) का पुराना वीडियो है. पाकिस्तान की यह घटिया साजिश एक बार फिर बुरी तरह फ्लॉप हो चुकी है.
कर्नाटक में मई 2026 की घटना
सेना का कहना है कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिकों द्वारा भारतीय सेना के जवानों की तलाशी लेने और राज्य में आवाजाही के लिए चीनी सेना से अनुमति लेने का दावा गलत है. भारतीय सेना ने इस दावे को भ्रामक बताते हुए स्पष्ट किया है कि सोशल मीडिया पर प्रसारित किया जा रहा वीडियो अरुणाचल प्रदेश का नहीं, बल्कि कर्नाटक के बेंगलुरु में मई 2026 में हुए आतंकवाद विरोधी अभ्यास का है.
सेना ने किया फैक्ट चैक
भारतीय सेना के अनुसार, पाकिस्तान स्थित कुछ सोशल मीडिया हैंडल इस वीडियो को गलत दावे के साथ प्रसारित कर रहे हैं. इनके जरिए ऐसा दिखाने की कोशिश की जा रही है कि अरुणाचल प्रदेश में चीनी सैनिक भारतीय जवानों की जांच कर रहे हैं और भारतीय सैनिकों को राज्य में आने-जाने के लिए चीनी सेना की अनुमति लेनी पड़ती है. सेना ने इन दावों को गलत बताया है. भारतीय सेना की फैक्ट चेक टीम के मुताबिक, वीडियो की वास्तविक पृष्ठभूमि आतंकवाद विरोधी अभ्यास है. इसे चीनी सैनिकों की कार्रवाई बताकर प्रसारित करना गलत है.
पहचान, स्थान और संदर्भ बदलकर झूठा प्रचार
इस तरह वीडियो की पहचान, स्थान और संदर्भ बदलकर सीमा सुरक्षा से जुड़ी भ्रामक कहानी बनाई जा रही है. सेना ने इस मामले में गलत सूचना फैलाने के तरीके की ओर भी ध्यान दिलाया है. इसमें पुराने सैन्य अभ्यास के दृश्य को चीनी सैनिकों से जोड़ना और उसे अरुणाचल प्रदेश का बताना शामिल है. इस तरह वास्तविक सैन्य अभ्यास को सीमा पर टकराव की घटना के रूप में पेश किया जा रहा है. भारतीय सेना ने लोगों से अपील की है कि वे राष्ट्रीय सुरक्षा और सीमावर्ती क्षेत्रों से जुड़ी संवेदनशील खबरों को साझा करने से पहले उनकी सत्यता जांचें. किसी वीडियो को सही मानने से पहले उसके मूल स्रोत, स्थान और वास्तविक संदर्भ की पुष्टि करना जरूरी है. सैन्य अभ्यास और वास्तविक सैन्य टकराव के बीच अंतर समझना चाहिए तथा अपुष्ट दावों को आगे प्रसारित करने से बचना चाहिए.
पाकिस्तान से फैलाया जा रहा झूठा प्रचार
पिछले दिनों पाकिस्तानी सोशल मीडिया हैंडल्स ने भारतीय सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ को लेकर भ्रामक दावे किए थे. हालांकि वास्तविकता में यह तथ्य पूरी तरह गलत थे. सेना के अनुसार, कुछ पाकिस्तान समर्थित सोशल मीडिया अकाउंट्स सेना प्रमुख को लेकर झूठा दावा कर रहे थे. इन सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए यह अफवाह फैलाने की कोशिश की गई कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ बयान देने के कारण जनरल धीरज सेठ को पद से हटाने की तैयारी कर रहे हैं. हालांकि भारतीय सेना ने इसका खंडन करते हुए इसे दुष्प्रचार बताया था.