Jwalamukhi Ki Bijli Kaise Banti Hai: ज्वालामुखी फटते ही राख के बादलों में चमकती है बिजली, आखिर क्या है इस खौफनाक नजारे का रहस्य?

Jwalamukhi Ki Bijli Kaise Banti Hai: ज्वालामुखी फटते ही राख के बादलों में चमकती है बिजली, आखिर क्या है इस खौफनाक नजारे का रहस्य?


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ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान राख और चट्टानों के छोटे-छोटे कण आपस में टकराते हैं. इससे विद्युत आवेश अलग-अलग हो सकते हैं और अनुकूल परिस्थितियों में बादलों के भीतर बिजली चमक सकती है. इस अनोखी प्राकृतिक घटना को ‘Dirty Thunderstorm’ कहा जाता है. यहां ‘Dirty’ का मतलब गंदगी नहीं, बल्कि राख और ज्वालामुखीय पदार्थों से भरे बादल से है. आइए समझें कि ये कैसे बनते हैं.

कल्पना कीजिए, आसमान में चारों तरफ घना अंधेरा है, ज्वालामुखी से राख का विशाल गुबार उठ रहा है और उसी राख से भरे बादल के बीच अचानक बिजली चमकने लगती है. यह नजारा जितना शानदार दिखाई देता है, उतना ही डरावना भी हो सकता है. प्रकृति की इस अनोखी घटना को ‘Dirty Thunderstorm’ कहा जाता है. लेकिन आखिर ज्वालामुखी से निकलने वाली राख के बादलों में बिजली कैसे पैदा होती है? (AI जेनेरेटेड इमेज)

राख के बादलों में कैसे चमकती है बिजली? ज्वालामुखी में विस्फोट के दौरान राख, चट्टानों के छोटे-छोटे टुकड़े और दूसरे पदार्थ तेज रफ्तार से बाहर निकलते हैं. ये कण आपस में टकराते हैं और उनके बीच विद्युत आवेश का बंटवारा हो सकता है. (AI जेनेरेटेड इमेज)

जब बादल के अलग-अलग हिस्सों में धनात्मक और ऋणात्मक विद्युत आवेश जमा होने लगते हैं, तो उनके बीच अंतर बढ़ सकता है. एक समय ऐसा आता है, जब यह अंतर हवा में इलेक्ट्रिकल डिस्चार्ज यानी बिजली की चमक पैदा कर सकता है. अंधेरे में ज्वालामुखी से उठते राख के विशाल बादल के बीच बिजली की चमक इस पूरे दृश्य को बेहद अनोखा बना देती है. ऐसा लगता है, मानो राख के गुबार के भीतर ही आसमान चमक रहा हो. (AI जेनेरेटेड इमेज)

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आखिर इसे Dirty Thunderstorm क्यों कहते हैं? आमतौर पर जब हम बिजली वाले तूफान की बात करते हैं, तो दिमाग में पानी से भरे बादल आते हैं. सामान्य तूफानों में पानी की बूंदों, बर्फ के कणों और उनकी आपसी गतिविधियों से विद्युत आवेश अलग होने में मदद मिलती है. लेकिन ज्वालामुखी के विस्फोट के दौरान बनने वाले बादल में राख और चट्टानों के कण बड़ी मात्रा में मौजूद होते हैं. इन कणों की टक्कर से भी विद्युत आवेश अलग-अलग हो सकते हैं और बिजली चमकने की स्थिति बन सकती है. इसी वजह से इसे ‘Dirty Thunderstorm’ नाम दिया गया है. यहां ‘Dirty’ का मतलब गंदगी या प्रदूषण नहीं है, बल्कि राख और ज्वालामुखीय पदार्थों से भरे बादल से है. (AI जेनेरेटेड इमेज)

क्या हर ज्वालामुखी में चमकती है बिजली? ऐसा बिल्कुल नहीं है. हर ज्वालामुखी विस्फोट के दौरान बिजली चमके, यह जरूरी नहीं. इसके लिए राख के कणों की टक्कर, विद्युत आवेशों का अलग होना और वातावरण की खास परिस्थितियां अहम होती हैं. अगर ये स्थितियां अनुकूल न हों, तो ज्वालामुखी से राख का बड़ा गुबार उठने के बावजूद बिजली दिखाई नहीं दे सकती. (AI जेनेरेटेड इमेज)

‘Dirty Thunderstorm’ दिखाता है कि ज्वालामुखी का विस्फोट केवल लावा और राख तक सीमित नहीं होता. विस्फोट से उठते कणों के बीच होने वाली भौतिक प्रक्रियाएं भी आसमान में बिजली चमकने का कारण बन सकती हैं. (AI जेनेरेटेड इमेज)

यानी राख के बादलों में चमकती बिजली किसी रहस्यमयी ताकत का कमाल नहीं, बल्कि प्राकृतिक परिस्थितियों में होने वाली विद्युत प्रक्रिया है. यही वजह है कि यह घटना वैज्ञानिकों के लिए दिलचस्प और आम लोगों के लिए हैरान कर देने वाला नजारा बन जाती है. (AI जेनेरेटेड इमेज)

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