Bageshwar News : कभी 25 की उम्र में हो जाती थी शादी, अब 40-40 साल के कुंवारे…उत्तराखंड के पहाड़ों में ये कैसी आफत?

Bageshwar News : कभी 25 की उम्र में हो जाती थी शादी, अब 40-40 साल के कुंवारे…उत्तराखंड के पहाड़ों में ये कैसी आफत?


Last Updated:

Bageshwar ki local news : कभी उत्तराखंड के पहाड़ी गांवों में युवाओं की शादी 25 से 28 साल की उम्र तक हो जाती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है. इन दिनों कई गांवों में 35 से 40 साल तक के युवा अविवाहित मिल जाएंगे. बागेश्वर के आरएस परिहार लोकल 18 से बताते हैं कि इसकी वजह बेरोजगारी, पलायन, बुनियादी सुविधाओं की कमी और शादी को लेकर बढ़ती उम्मीदें हैं. शादी के लिए अब केवल लड़के का अच्छा व्यवहार और अच्छा परिवार ही जरूरी नहीं माना जाता है. परिवारों को भी लगता है कि नियमित आय के बिना शादी के बाद घर चलाना और बच्चों की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल होगा. बढ़ती आर्थिक जरूरतों का असर विवाह संबंधों पर भी साफ दिखाई देने लगा है.

बागेश्वर. उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में युवाओं की शादी में देरी और विवाह योग्य उम्र के बाद भी अविवाहित रहने का मुद्दा चर्चा में है. कभी पहाड़ के गांवों में युवाओं की शादी 25 से 28 साल की उम्र तक हो जाती थी, लेकिन अब कई गांवों में 35 से 40 साल तक के युवा अविवाहित रह रहे हैं. स्थानीय जानकार आरएस परिहार लोकल 18 से बताते हैं कि इसके पीछे बेरोजगारी, पलायन, बुनियादी सुविधाओं की कमी और शादी को लेकर बढ़ती उम्मीदें हैं. बदलते सामाजिक और आर्थिक हालात ने पहाड़ में विवाह की परंपराओं को भी प्रभावित किया है. वे कहते हैं कि पहाड़ में शादी में देरी का एक बड़ा कारण रोजगार की कमी है. गांवों में रोजगार के सीमित मौके होने के कारण बड़ी संख्या में युवा नौकरी की तलाश में हल्द्वानी, देहरादून, दिल्ली और दूसरे मैदानी क्षेत्रों की ओर जा रहे हैं. कई युवा निजी कंपनियों, दुकानों और छोटे-मोटे कामों से अपना जीवन चला रहे हैं. ऐसे में स्थायी नौकरी और अच्छी आमदनी की अपेक्षा पूरी करना उनके लिए मुश्किल हो रहा है. परिवारों को भी लगता है कि नियमित आय के बिना शादी के बाद घर चलाना और बच्चों की जिम्मेदारी उठाना मुश्किल होगा.

रिश्ता तय करना मुश्किल

आरएस परिहार कहते हैं कि शादी के लिए अब केवल लड़के का अच्छा व्यवहार और अच्छा परिवार ही जरूरी नहीं माना जाता है. कई मामलों में सरकारी नौकरी, अच्छी आमदनी, अपना मकान और शहर में रहने जैसी उम्मीदें अधिक देखी गई है. इन उम्मीदों के कारण सामान्य रोजगार करने वाले युवाओं के लिए रिश्ता तय करना मुश्किल हो रहा है. हालांकि, हर परिवार की सोच और परिस्थिति अलग होती है, लेकिन बढ़ती आर्थिक जरूरतों का असर विवाह संबंधों पर भी दिखाई दे रहा है. शिक्षा और रोजगार के लिए हो रहे पलायन का असर पहाड़ के सामाजिक जीवन पर भी पड़ रहा है. बेहतर पढ़ाई, नौकरी और सुविधाओं की तलाश में युवतियां भी बड़ी संख्या में गांवों से बाहर जा रही हैं. इससे कई गांवों में स्थायी रूप से रहने वाले युवाओं की संख्या कम हो गई है.‌ गांवों में विवाह योग्य युवक-युवतियों की संख्या घटने से स्थानीय स्तर पर रिश्ते तलाशना भी कठिन हो रहा है. दूसरी ओर, दूरस्थ गांवों में सड़क, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी सुविधाओं की कमी के कारण परिवार वहां शादी करने या बसने को लेकर चिंता जताते हैं.

करना क्या होगा

आरएस परिहार के मुताबिक, आज के युवा शादी से पहले रोजगार, आर्थिक सुरक्षा और बेहतर भविष्य को पहले रख रहे हैं. यह सोच अपने आप में गलत नहीं है, लेकिन रोजगार के सीमित मौके और बढ़ती जिम्मेदारियों के कारण कई बार विवाह का फैसला टलता रहता है. कुछ परिवारों को अच्छा रिश्ता नहीं मिल पाता‌ है. इसका असर युवाओं के साथ उनके माता-पिता पर भी पड़ता है, जो बच्चों की शादी को लेकर चिंतित रहते हैं. वे कहते हैं कि पहाड़ में युवाओं की शादी में देरी का समाधान केवल रिश्ते तलाशने तक सीमित नहीं है. इसके लिए स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने, सड़क संपर्क बेहतर बनाने और गांवों में जीवन को सुविधाजनक बनाने की जरूरत है.



Source link