मेरे बुजुर्ग माता-पिता कहां जाएंगे…. दून एलिवेटेड रोड की जद में आ रहे घर को बचाने UK से देहरादून पहुंचीं अदिति

मेरे बुजुर्ग माता-पिता कहां जाएंगे…. दून एलिवेटेड रोड की जद में आ रहे घर को बचाने UK से देहरादून पहुंचीं अदिति


Last Updated:

Dehradun News: देहरादून में आशारोड़ी एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर विरोध कर रहे लोगों में ऐसे परिवार भी शामिल हैं, जिनके बुजुर्ग माता-पिता की जिंदगीभर की कमाई उनके घरों में लगी है. अपने माता-पिता के घर को बचाने के लिए अदिति यूके से देहरादून पहुंची हैं और एक हफ्ते से ज्यादा समय से स्थानीय लोगों के साथ धरने पर बैठी हैं. उनका कहना है कि इसी घर में उनका बचपन बीता और इससे उनकी कई यादें जुड़ी हैं. वहीं, दिल्ली में नौकरी करने वाले मयंक भी अपने पिता के रिटायरमेंट की पूंजी से बने घर को लेकर चिंतित हैं. दोनों का कहना है कि इस उम्र में बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है और वे सरकार से परियोजना के फैसले पर दोबारा विचार करने की मांग कर रहे हैं.

Top Deals Inside

देहरादून: राजधानी दून में बन रहे आशारोड़ी एलिवेटेड रोड परियोजना के दायरे में आने वाले कई घर इन दिनों सिर्फ ईंट-गारे की इमारतें नहीं, बल्कि बुजुर्ग दंपतियों की जीवनभर की पूंजी और भावनाओं का प्रतीक बन चुके हैं. इन घरों में ज्यादातर ऐसे वरिष्ठ नागरिक रह रहे हैं, जिनके बच्चे बेहतर भविष्य की तलाश में देश-विदेश में नौकरी कर रहे हैं. ऐसे ही परिवारों के साथ खड़ी होने के लिए यूनाइटेड किंगडम से मीलों का सफर तय कर देहरादून पहुंचीं अदिति इन दिनों चर्चा का केंद्र बनी हुई हैं.

अपने बुजुर्ग माता-पिता के सिर से छत छिनने के डर और घर से दूर होने के अहसास ने उन्हें विदेशी धरती पर चैन से नहीं बैठने दिया. वह इस प्रस्तावित परियोजना के खिलाफ स्थानीय नागरिकों के साथ धरने-प्रदर्शन में कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी हैं, ताकि माता-पिता की जीवनभर की मेहनत और यादों से जुड़े इस आशियाने को बचाया जा सके.

इस उम्र में मां-बाप की सुरक्षा की चिंता

अदिति ने बताया कि उनके पिता ने धर्मपुर विधानसभा क्षेत्र में घर बनाया था. उनका बचपन इसी घर में बीता है. वह इसी आंगन में पली-बढ़ीं और यहीं से उनकी विदाई हुई. उन्होंने कहा कि इस घर से उनकी बहुत सारी यादें जुड़ी हैं. जब उन्होंने अपने माता-पिता के घर पर खतरा देखा और एलिवेटेड रोड परियोजना के बारे में सुना, तो वह खुद को रोक नहीं पाईं. इसके बाद वह यूके से देहरादून पहुंचीं और पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से यहां धरने पर बैठी हैं. अदिति ने बताया कि वह बुजुर्ग माता-पिता के साथ धरने पर बैठी हैं, जिनकी बीपी और शुगर की दवाएं चल रही हैं. उन्होंने कहा कि सरकार को अपना फैसला बदलना चाहिए, ताकि उन्हें अपने माता-पिता की सुरक्षा को लेकर चिंता न करनी पड़े.

दिल्ली से पहुंचे मयंक
इसी तरह मयंक ने बताया कि वह दिल्ली में नौकरी करते हैं. उनके पिता ने रिटायरमेंट की पूंजी से देहरादून में घर बनाया था और यहां के सुरक्षित माहौल में रहने लगे थे. लेकिन अब इस परियोजना के चलते उनके घर पर संकट मंडरा रहा है. इसी वजह से उन्हें नौकरी के बीच से समय निकालकर देहरादून में प्रदर्शन के लिए आना पड़ा. उन्होंने कहा कि उन्हें यहां आए काफी समय हो गया है और अपने माता-पिता की चिंता सताती रहती है.



Source link