भारत से ट्रेड डील करने को बेताब है EU, अनुवाद तक का नहीं कर रहा इंतजार, जानिए कब होगी ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’

भारत से ट्रेड डील करने को बेताब है EU, अनुवाद तक का नहीं कर रहा इंतजार, जानिए कब होगी ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’


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India-EU FTA : भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट को लेकर पिछले 19 सालों से बात चल रही थी. इसे इस साल जनवरी में अंतिम रूप दिया गया. अब इस साल के अंत तक इस पर हस्ताक्षर होने की उम्‍मीद है. यह भारत-EU का पहला ऐसा समझौता है जिसे सभी 27 यूरोपीय देशों का एकमुश्त समर्थन मिला है. इस समझौते से भारत के मैन्युफैक्चरिंग, आईटी और अन्य सेक्टर्स के लिए यूरोप का विशाल बाजार खुल जाएगा.

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उम्मीद है कि यह समझौता 2027 की शुरुआत से पूरी तरह लागू हो जाएगा.

नई दिल्‍ली. भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर कूटनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है. यूरोपीय संघ भारत के साथ इस ऐतिहासिक सौदे को अमलीजामा पहनाने के लिए इतना उत्सुक है कि वह अपने नियमों को भी लचीला बना रहा है. यूरोपीय आयोग ने यूरोपीय संघ की परिषद के समक्ष इस समझौते को जल्द मंजूरी दिलाने के लिए एक विशेष फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया का प्रस्ताव रखा है. यदि 27 सदस्य देशों का प्रतिनिधित्व करने वाली यूरोपीय संघ की परिषद इसे हरी झंडी दे देती है, तो दिसंबर में इस पर आधिकारिक मुहर लग सकती है. हिन्‍दुस्‍तान टाइम्‍स की एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि दिसंबर के दूसरे पखवाड़े में ब्रुसेल्स में ट्रेड डील पर हस्ताक्षर करने की योजना दोनों पक्ष बना रहे हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दिसंबर में अमेरिका में जी20 की बैठक में भाग लेने के बाद ब्रुसेल्स जा सकते हैं.

आमतौर पर यूरोपीय संघ में किसी भी बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौते को अंतिम रूप देने से पहले डील के ड्रॉफ्ट को 24 आधिकारिक भाषाओं में अनुवाद करता है. इसमें एक साल से अधिक का समय लग जाता है. लेकिन भारत के साथ डील को तेजी से लागू करने के लिए ईयू व्यापार आयुक्त मारोश शेफचोविच ने परिषद से आग्रह किया है कि डील को मूल अंग्रेजी संस्करण के आधार पर ही पूरा कर लिया जाए, ताकि अनुवाद के फेर में समझौते में कोई अनावश्यक देरी न हो. यूरोपीय संघ 27 देशों का एक विशाल विकसित बाजार है, जिसकी संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार लगभग 23 लाख करोड़ डॉलर है. भारत के साथ मुक्त व्यापार समझौता होने से दोनों पक्षों के बीच व्यापार, निवेश और आर्थिक सहयोग को नई गति मिलेगी.

पीयूष गोयल के बाद अब वाणिज्य सचिव जाएंगे ब्रुसेल्‍स दौरे पर

भारत-ईयू ट्रेड डील से जुड़े मुद्दों को तेजी से सुलझाने के लिए वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल इसी सप्ताह ब्रुसेल्स जा रहे हैं. वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने 22 से 27 अक्टूबर के बीच जर्मनी और नीदरलैंड का दौरा किया था. जर्मनी में उन्होंने आर्थिक मामलों की मंत्री कैथरीना राइखे और चांसलरी के आर्थिक सलाहकार लेविन होले से मिलकर इस समझौते पर चर्चा की. दूसरी ओर, 26 से 28 अक्टूबर के बीच डेविड मैकलिस्टर के नेतृत्व में यूरोपीय संसद की विदेश मामलों की समिति का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल भी नई दिल्ली आएगा.

मदर ऑफ ऑल डील्स है यह समझौता

27 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली में आयोजित शिखर सम्मेलन में भारत-ईयू ट्रेड डील को राजनीतिक स्तर पर हरी झंडी मिली थी. 17 जून, 2026 को फ्रांस के एवियन में G7 शिखर सम्मेलन के दौरान भी यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा और आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने पीएम मोदी से मुलाकात कर 2026 के अंत तक हस्ताक्षर करने की प्रतिबद्धता दोहराई थी. उम्मीद है कि यह समझौता 2027 की शुरुआत से पूरी तरह लागू हो जाएगा. इस समझौते को ‘मदर ऑफ ऑल डील्‍स’ (Mother of All Deals) कहा जा रहा है, क्योंकि इसके लागू होते ही दुनिया का सबसे बड़ा मुक्त व्यापार क्षेत्र अस्तित्व में आएगा. इसके दायरे में-

  • दुनिया की 25 प्रतिशत आबादी आएगी.
  • वैश्विक जीडीपी का 25 प्रतिशत हिस्सा शामिल होगा.
  • 27 देशों वाला यूरोपीय संघ लगभग 23 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है.

19 साल लगे हैं समझौता होने में

भारत-ईयू मुक्‍त व्यापार समझौते की नींव वर्ष 2007 में रखी गई थी, लेकिन महत्वाकांक्षाओं और शर्तों में मतभेद के चलते 2013 में बातचीत ठप हो गई थी. इसके बाद 8 मई, 2021 को दोनों पक्षों की बैठक में वार्ता को नए सिरे से गति दी गई, जिसके तहत मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के साथ-साथ निवेश संरक्षण समझौते (IPA) और भौगोलिक संकेतक (GI) पर भी सहमति बनी.

भारत-ईयू व्‍यापार

भारत वर्तमान में यूरोपीय संघ का वस्तुओं के व्यापार में 9वां और सेवाओं के व्यापार में छठा सबसे बड़ा साझीदार है. भारत और ईयू के बीच वस्तुओं का द्विपक्षीय व्यापार साल 2025 में 118 अरब यूरो रहा. भारत से मशीनरी, उपकरण, रसायन, कपड़ा, धातुएं और पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात होते हैं, जबकि यूरोपीय संघ से मुख्य रूप से मशीनरी, परिवहन उपकरण और रासायनिक उत्पाद आते हैं.



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