धरती से अचानक वायुमंडल गायब हो जाए तो क्या होगा? साइंस के नजरिए से समझें
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धरती की सबसे बड़ी ताकत उसका वायुमंडल है, मगर कभी सोचा है कि अगर यही वायुमंडल अचानक से खत्म हो जाएगा तो क्या होगा? हमारे चारों ओर जो गैसों का कवर है वह हटते ही क्या हमारा जीवन रह पाएगा? वैज्ञानिकों के मुताबिक वायुमंडल से अगर एक गैस भी खत्म हुई तो जीवन पर संकट आ सकता है.
कभी सोचा है कि अगर धरती से अचानक वायुमंडल गायब हो जाए तो कया होगा. अक्सर इसे लेकर सोशल मीडिया पर बहस चलती है. दरअसल धरती पर जीवन का अस्तित्व ही वायुमंडल की वजह से है. यह गैसों की ऐसी परत है जो हमारे ग्रह को चारों ओर से घेरे है. इसमें 78.08% नाइट्रोजन, 20.95% ऑक्सीजन, 0.93% आर्गन और करीब 0.04% कार्बन डाइऑक्साइड होती है. इसके अलावा हाइड्रोजन, हीलियम जैसी गैसें भी मौजूद होती हैं. पृथ्वी का गुरुत्वाकर्षण इन गैसों को अपने आसपास बनाए रखता है. जो सांस लेने के लिए ऑक्सीजन देता है और सूर्य से आने वाली हानिकारक किरणों को रोकता है. (सभी फोटो-pixabay)
वायुमंडल अगर कभी अचानक गायब हो गया तो सबसे ज्यादा असर धरती पर रहने वाले जीवों को होगा. दरअसल सांस लेने के लिए ऑक्सीजन की जरूरत होती है. वायुमंडल खत्म होने पर वायुदाब ही नहीं रहेगा तो सांस लेना मुश्किल हो जाएगा. ऑक्सीजन न होने से व्यक्ति बेहोश होगा और कुछ दिन ही पलों में जीवन पर संकट आ जाएगा. पेड़ पौधे और जानवरों पर भी संकट आ जाएगा. पक्षी आसमान में नहीं उड़ सकेंगे. अगर कुछ देर तक कोई जीवित रहेगा तो वह पानी में रहने वाले जीव हैं क्योंकि पानी की ऑक्सीजन एकदम से खत्म नहीं होगी. हालांकि धीरे-धीरे उनके जीवन पर भी संकट आ जाएगा.
वायुमंडल का काम धरती पर दबाव बनाए रखना होता है. यह सूरज की गर्मी को भी रोकता है. इसके खत्म होते ही झीलों, नदियों और समुद्रों का पानी उबलने लगेगा. तापमान इतना ज्यादा हो जाएगा कि जीवन की संभावना भी खत्म हो जाएगी. जब रात होगी तो इतनी ज्यादा ठंड होगी कि यही पानी जम जाएगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक यहां मंगल ग्रह जैसे हालात हो सकते है. वैज्ञानिकों के मुताबिक कभी मंगल पर भी वायुमंडल था, मगर अरबों साल पहले हालात बदले तो वायुमंडल खत्म हो गया.
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वायुमंडल गायब होने पर आसमान काला नजर आएगा. वैज्ञानिकों के मुताबिक आसमान का नीला रंग सूर्य की रेाशनी से वायुमंडल में मौजूद नाइड्रोन और ऑक्सीजन के अणुओं के टकराने की वजह से होती है. जब यह बिखरती है तो हमें आसमान नीला दिखाई देता है. जब वायुमंडल नहीं होगा तो ये काला नजर आएगा. बादल बनेंगे मगर इन्हें रोकने के लिए कोई वायुमंडल ही नहीं होगा. ऐसे में बारिश होने की संभावना ही खत्म हो जाएंगीं.
वायुमंडल के बिना पशु-पक्षी और इंसान छोड़िए धरती पर आवाज तक नहीं हेागी. दरअसल आवाज को यात्रा करने के लिए किसी माध्यम की जरूरत पड़ती है. पानी और ठोस पदार्थों में ध्वनि तरंगों के रूप में आगे बढ़ती है. वायुमंडल गायब होने से आवाज एक जगह से दूसरी जगह पहुंचेगी ही नहीं. अगर कोई स्पेस सूट में हो तो उसे कंपन महसूस होगा मगर आवाज नहीं सुनाई देगी. दिन में बहुत ज्यादा गर्मी होगी और रात में बेहद ठंड, जैसे चांद पर होती है.
स्पेस से बहुत सारे एस्टेरॉयड आते हैं. धरती का वायुमंडल उनसे हमेशा सुरक्षा देता है. वायुमंडल खत्म होने के बाद ये सभी उल्कापिंड सीधे धरती तक आएंगे. ऐसे में धरती का हाल चंद्रमा ओर बुध जैसा हो जाएगा. एस्टेरॉयड अभी भी आते हैं, मगर धरती के वायुमंडल से टकराने की वजह से टूटकर टुकड़ों में बदल जाते हैं.
वायुमंडल में 78% नाइट्रोजन है. ये डायरेक्टर इंसानों के काम नहीं आती, मगर इसका मतलब ये नहीं कि ये गैर जरूरी है. हमारे शरीर में मौजूद प्रोटीन और डीएनए की संरचना मे नाइट्रोजन के परमाणु इस्तेमाल होते हैं. बिजली चमकने जैसी प्राकृतिक प्रक्रियाएं भी नाइट्रोजन चक्र में योगदान देती हैं. अगर वायुमंडलीय नाइट्रोजन गायब हो जाए, तो समय के साथ नाइट्रोजन चक्र बाधित हो सकता है। इससे पौधों की वृद्धि और उन पर निर्भर खाद्य शृंखलाओं पर गंभीर असर पड़ेगा. इसके अलावा अन्य गैसों का अनुपात बढ़ जाएगा ऐसे में ऑक्सीजन का दबाव भी बढ़ेगा जो शरीर के लिए जहर का काम कर सकती है.