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India’s WTC Final Scenario: क्रिकेट के गलियारों में इस समय वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के फाइनल की सरगर्मी अपने चरम पर है. हाल में दक्षिण अफ्रीका ने दूसरे टेस्ट मैच में ऑस्ट्रेलिया को पारी के अंतर से हराकर 3 मैचों की टेस्ट सीरीज में 1-1 की बराबरी हासिल कर ली. तेम्बा बावुमा की कप्तानी वाली दक्षिण अफ्रीकी टीम ने मेहमान ऑस्ट्रेलिया को एक पारी और 31 रनों के बड़े अंतर से धूल चटाकर न केवल अपनी स्थिति मजबूत की, बल्कि डब्ल्यूटीसी पॉइंट्स टेबल के समीकरणों में भूचाल ला दिया. इस हार-जीत के खेल का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि इससे भारतीय टीम के फाइनल में पहुंचने के समीकरण भी पूरी तरह से प्रभावित हुए हैं.
डरबन में खेले गए दूसरे टेस्ट मैच में दक्षिण अफ्रीका ने ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ ऐतिहासिक और एकतरफा जीत दर्ज की. इस जीत के साथ ही अफ्रीकी टीम ने तीन मैचों की टेस्ट सीरीज को 1-1 की बराबरी पर ला दिया. इस मुकाबले से पहले दक्षिण अफ्रीका की टीम पहले टेस्ट में हार के बाद तीसरे स्थान पर खिसक गई थी. हालांकि, इस शानदार जीत के बाद भी वे तीसरे स्थान पर ही बने हुए हैं, लेकिन उनका पॉइंट्स परसेंटेज (PCT) 60 से उछलकर सीधे 66.67% हो गया है. इस नतीजे ने वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप फाइनल की दौड़ को और अधिक रोमांचक बना दिया है.
शुभमन गिल (Shubman Gill) की कप्तानी वाली भारतीय टीम इस समय डब्ल्यूटीसी पॉइंट्स टेबल में 51.52% के साथ 5वें पायदान पर खड़ी है. भारत के सामने अभी भी इस चक्रमें कुल 7 टेस्ट मैच बाकी हैं. इन बचे हुए मुकाबलों में से 2 मैच उन्हें न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलने हैं, जबकि 5 कड़े मुकाबले ऑस्ट्रेलिया की धरती पर खेले जाने हैं. भारतीय फैंस के मन में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या टीम इंडिया इन बचे हुए मुकाबलों को जीतकर फाइनल का टिकट कटा सकती है, और दक्षिण अफ्रीका की जीत से भारत को क्या फायदा हुआ है?
यदि शुभमन गिल की अगुआई वाली भारतीय टीम अपने बचे हुए सातों टेस्ट मैचों में जीत हासिल कर लेती है, तो उनका अधिकतम पॉइंट्स परसेंटेज (PCT) 66.6% तक पहुंच सकता है. इस जादुई आंकड़े तक पहुंचने के बाद भारतीय खेमे को यह दुआ करनी होगी कि ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड और दक्षिण अफ्रीका में से कोई भी केवल एक टीम ही 66.6% से ऊपर फिनिश कर पाए. यदि दो या तीन टीमें इससे आगे निकल गईं, तो भारत के लिए राह मुश्किल हो जाएगी. इसलिए, भारत के लिए अपने सभी बचे हुए मैच जीतना पहली और सबसे बड़ी शर्त है.
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दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ दूसरे टेस्ट में ऑस्ट्रेलिया की हार ने भारत की उम्मीदों को संजीवनी दे दी है. इस हार ने भारत को एक ऐसा मौका दिया है जहां वे अब अपनी किस्मत का फैसला खुद कर सकते हैं, बजाय इसके कि वे दूसरी टीमों के परिणामों पर पूरी तरह निर्भर रहें.अगर ऑस्ट्रेलिया अपनी बाकी बची सीरीज में संघर्ष करता है, तो भारत के लिए रास्ता साफ हो सकता है. इसके अलावा, यदि दक्षिण अफ्रीका सीरीज के तीसरे और अंतिम मैच में भी ऑस्ट्रेलिया को हरा देता है, तो यह भारतीय टीम के लिए सोने पर सुहागा साबित होगा.
यदि भारत अपने बचे हुए सभी 7 मैच जीत जाता है, तो इसका सीधा सा मतलब यह होगा कि वे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ आगामी 5 मैचों की सीरीज में उन्हें क्लीन स्वीप (5-0 से हराना) कर रहे हैं. ऐसी स्थिति में, अगर ऑस्ट्रेलिया दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ भी एक मैच हार चुका है, तो पैट कमिंस की टीम अधिकतम 63.6% तक ही पहुंच पाएगी. यह आंकड़ा भारत के 66.6% से कम होगा. इस प्रकार, यदि भारत अपने सभी मैच जीत जाता है, तो वह आसानी से ऑस्ट्रेलिया को पीछे छोड़ते हुए टॉप-2 में अपनी जगह पक्की कर सकता है.
अगर दक्षिण अफ्रीका अपनी बाकी बची सभी 8 टेस्ट सीरीज और मैच जीत लेता है, तो उनका अधिकतम परसेंटेज 85.71% तक जा सकता है. कागजी तौर पर यह आंकड़ा भले ही बड़ा लगे, लेकिन यह भारत के लिए बहुत अधिक खतरनाक नहीं है.इसका कारण यह है कि दक्षिण अफ्रीका के जीतने का मतलब होगा कि ऑस्ट्रेलिया एक और मैच हार चुका है. ऐसी स्थिति में, यदि ऑस्ट्रेलिया दक्षिण अफ्रीका से हारता है और भारत अपने सभी 5 मैच ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ जीत जाता है, तो पैट कमिंस की टीम का अधिकतम परसेंटेज 63.63% रह जाएगा, जो भारत से कम होगा. इसलिए, भारत अंदरखाने यही चाहेगा कि दक्षिण अफ्रीका जीत दर्ज करता रहे ताकि एक स्थान पक्का हो जाए और भारत दूसरे स्थान के लिए लड़ सके.
इसके विपरीत, यदि ऑस्ट्रेलिया लगातार जीतता रहता है और दक्षिण अफ्रीका मुकाबले हारता जाता है, तो अफ्रीकी टीम पिछड़ जाएगी और ऑस्ट्रेलिया अंक तालिका में बहुत मजबूत स्थिति में पहुंच जाएगा. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए, दक्षिण अफ्रीका की तुलना में ऑस्ट्रेलिया का जीतना भारत के डब्ल्यूटीसी फाइनल में पहुंचने के सपनों के लिए ज्यादा बड़ा खतरा पैदा कर सकता है. यही वजह है कि क्रिकेट पंडित मान रहे हैं कि दक्षिण अफ्रीका का पलड़ा भारी रहना भारतीय टीम के हक में बेहतर साबित हो सकता है.
पॉइंट्स टेबल पर नजर डालें तो न्यूजीलैंड की टीम इस समय 72.22% के साथ दूसरे स्थान पर काबिज है. न्यूजीलैंड के पास अभी भी 10 मैच बाकी हैं। भारत को न्यूजीलैंड के खिलाफ भी 2 टेस्ट मैच खेलने हैं. अगर भारत उन दोनों मैचों में कीवियों को हरा भी देता है, तब भी न्यूजीलैंड के पास बाकी मैच जीतकर 75% तक पहुंचने का मौका रहेगा. यह स्थिति सीधे तौर पर भारत के लिए खतरे की घंटी है. इसलिए, भारत को न केवल अपने मैच जीतने होंगे, बल्कि यह भी उम्मीद करनी होगी कि न्यूजीलैंड की टीम अपने अन्य मुकाबलों में हारे.
क्रिकेट सिर्फ आंकड़ों का खेल नहीं है, बल्कि यह मानसिक दृढ़ता का भी इम्तिहान है. दक्षिण अफ्रीका द्वारा ऑस्ट्रेलिया को एक पारी और 31 रनों से हराना यह साबित करता है कि मौजूदा विश्व क्रिकेट में कोई भी टीम अजेय नहीं है. पैट कमिंस की ऑस्ट्रेलियाई टीम को इस करारी हार से जो मानसिक झटका लगा है, उसका फायदा भारतीय टीम आगामी सीरीज में उठा सकती है. जब एक मजबूत मानी जाने वाली टीम इस तरह से धराशायी होती है, तो विरोधी खेमे में आत्मविश्वास स्वतः ही बढ़ जाता है, और शुभमन गिल एंड कंपनी इस मनोवैज्ञानिक लाभ का पूरा फायदा उठाने की फिराक में होगी.
संक्षेप में कहें तो, डब्ल्यूटीसी 2027 के फाइनल में पहुंचने के लिए भारत का रास्ता अभी भी कांटों भरा है, लेकिन असंभव बिल्कुल नहीं है. दक्षिण अफ्रीका की हालिया जीत ने समीकरणों को भारत के अनुकूल मोड़ने का एक नायाब मौका दे दिया है. यदि भारतीय टीम अपनी घरेलू और विदेशी जमीन पर लगातार बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए अपने सभी 7 मैच जीतने में कामयाब हो जाती है, और साथ ही अन्य मुकाबलों में थोड़े से अनुकूल परिणामों की दुआ पूरी हो जाती है, तो हम निश्चित रूप से शुभमन गिल की कप्तानी में तिरंगे को डब्ल्यूटीसी फाइनल के मैदान पर शान से लहराते हुए देख सकेंगे.