जोधपुर में दो गायिकाओं का ऐसा मिलन, गीतों का मतलब सुन पोलैंड की सिंगर रो पड़ीं


Last Updated:

पोलैंड की गायिका कैरोलिना चिचा और राजस्थानी लोक गायिका अनीता डांगी ने जोधपुर आरआईएफएफ में अपनी प्रस्तुति से सबका दिल जीत लिया. दोनों की भाषा अलग थी, लेकिन उनके गीतों का संदेश एक जैसा था. जब कैरोलिना ने दोनों गीतों का मतलब सुना, तो वह भावुक हो गईं. जानिए, संगीत के जरिए कैसे दो संस्कृतियों के बीच प्यार और इंसानियत का रिश्ता जुड़ा.

Top Deals Inside

जोधपुर में दो गायिकाओं का ऐसा मिलन, गीतों का मतलब सुन पोलैंड की सिंगर रो पड़ींZoom

पोलैंड की गायिका कैरोलिना चिचा और राजस्थान की लोक गायिका अनीता डांगी

जोधपुर:  कभी-कभी दो लोगों की भाषा अलग होती है, देश अलग होते हैं, लेकिन दिल की बात एक जैसी होती है. जोधपुर में कुछ ऐसा ही देखने को मिला, जब पोलैंड की गायिका कैरोलिना चिचा और राजस्थान की लोक गायिका अनीता डांगी ने अपने गीतों के जरिए दो संस्कृतियों को जोड़ दिया. दोनों के गीतों का मतलब एक जैसा निकला, तो कैरोलिना अपने आंसू नहीं रोक पाईं. संगीत के इस खूबसूरत मेल में प्यार, इंसानियत और यूक्रेनी शरणार्थियों के दर्द के लिए एकजुटता का संदेश भी छिपा था.

47 वर्षीय कैरोलिना चिचा ने जोधपुर राजस्थान इंटरनेशनल फोक फेस्टिवल (आरआईएफएफ) में अपने पहले गीत का नाम ‘चुजेन टू लव’ रखा. इस गीत में उनकी मातृभाषा और यूक्रेनी भाषा के शब्दों का मेल है. इसके जरिए उन्होंने उन यूक्रेनी शरणार्थियों के प्रति एकजुटता दिखाई, जिन्हें 2022 में रूस के साथ युद्ध शुरू होने के बाद अपना देश छोड़ना पड़ा.

क्या संगीत को राजनीति से दूर रखना चाहिए?

22 अक्टूबर को मेहरानगढ़ किले में शुरू हुए जोधपुर आरआईएफएफ में प्रस्तुति देने से पहले कैरोलिना के मन में सवाल था कि क्या संगीत को राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए. उन्होंने कहा कि संगीत प्रेम और इंसान होने के एहसास से जुड़ा है. पिछले साल उन्होंने अपनी प्रस्तुति में फलस्तीन की आजादी से जुड़ी कुछ पंक्तियां भी शामिल की थीं.

हालांकि, अनीता डांगी के साथ काम करने के दौरान उन्हें महसूस हुआ कि संस्कृतियां अलग होने के बावजूद लोगों की भावनाएं और सपने एक जैसे होते हैं. उनके मुताबिक, संस्कृतियों के बीच संवाद के लिए राजनीतिक स्तर पर भी सहमति जरूरी है.

तीन दिन में तैयार हुई खास प्रस्तुति

कैरोलिना और अनीता ने सिर्फ तीन दिनों में अपनी संयुक्त प्रस्तुति तैयार कर ली. दोनों हर दिन करीब दो घंटे अभ्यास करती थीं. उनकी प्रस्तुति का मुख्य विषय दो संस्कृतियों के बीच संवाद था. कैरोलिना के एक गीत में इंसान के भीतर ब्रह्मांड से जुड़ाव तलाशने की बात थी. इसके जवाब में अनीता ने भक्ति गीत ‘सांवरियो घट माई रे’ गाया, जिसका संदेश है कि ईश्वर मनुष्य के हृदय में ही निवास करते हैं.

जब अनुवादक ने दोनों को उनके गीतों का अर्थ समझाया, तो कैरोलिना को एहसास हुआ कि दोनों एक ही बात कह रही थीं. उन्होंने बताया कि यह जानकर वह अपने आंसू नहीं रोक सकीं. यह प्रस्तुति दिखाती है कि संगीत की भाषा अलग हो सकती है, लेकिन उसका एहसास पूरी दुनिया में एक जैसा होता है.



Source link