‘नीलकंठ’ फॉर्मेशन में फ्रांस में बने तीन राफेल लड़ाकू विमानों ने एक साथ उड़ान भरी. राफेल भारतीय वायुसेना का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है. इसका इस्तेमाल हवाई सुरक्षा के साथ जमीन पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ कार्रवाई और अलग-अलग सैन्य अभियानों में किया जाता है. गंगा के ऊपर एक साथ उड़ते तीन राफेल दर्शकों के लिए खास आकर्षण बने. विमानों की तेज आवाज सुनकर लोगों की निगाहें आसमान की ओर उठ गईं. एक साथ उड़ान भरते समय तीनों विमानों के बीच उचित दूरी और तालमेल बनाए रखना पायलटों के कौशल को दिखाता है.
‘पशुपति’ फॉर्मेशन में चार जगुआर लड़ाकू विमान हीरे जैसी आकृति यानी डायमंड फॉर्मेशन में उड़ते नजर आए. जगुआर भारतीय वायुसेना का ऐसा विमान है, जिसका इस्तेमाल मुख्य रूप से जमीन पर मौजूद लक्ष्यों के खिलाफ हमले के लिए किया जाता है. यह कम ऊंचाई पर उड़ान भरने की क्षमता के लिए भी जाना जाता है. चारों विमानों ने एक-दूसरे के साथ तालमेल बनाकर उड़ान भरी. इस दौरान उनकी एक जैसी आकृति दर्शकों के लिए खास रही. इस फॉर्मेशन का नाम काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा है.
‘नटराज’ फॉर्मेशन में भारतीय नौसेना का पी-8आई समुद्री निगरानी विमान दो मिराज-2000 लड़ाकू विमानों के साथ उड़ान भरता नजर आया. पी-8आई का इस्तेमाल समुद्र में निगरानी और पनडुब्बियों का पता लगाने जैसे अभियानों में किया जाता है. वहीं मिराज-2000 भारतीय वायुसेना का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है. दोनों तरह के विमानों को एक साथ उड़ते देख लोगों को उनकी अलग-अलग भूमिकाओं की झलक मिली. पी-8आई आकार में बड़ा है, जबकि मिराज-2000 लड़ाकू विमान है. इस फॉर्मेशन के जरिए समुद्री निगरानी और हवाई सुरक्षा के बीच तालमेल को दिखाया गया.
‘भैरव’ फॉर्मेशन में एक सी-295 और दो डोर्नियर विमानों ने विक्ट्री फॉर्मेशन में मुख्य मंच के सामने से उड़ान भरी. सी-295 एक आधुनिक परिवहन विमान है, जिसका इस्तेमाल सैनिकों और जरूरी सामान को पहुंचाने जैसे कामों में किया जाता है. वहीं डोर्नियर विमान निगरानी, संपर्क और दूसरे सहायक कार्यों में इस्तेमाल किए जाते हैं. तीनों विमानों ने एक समूह में उड़ान भरते हुए अपनी स्थिति और आपसी दूरी बनाए रखी. इस प्रदर्शन ने दिखाया कि वायुसेना की ताकत केवल लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है. परिवहन और सहायक विमान भी सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभाते हैं.
बोइंग का भारी चिनूक हेलीकॉप्टर भी एयर शो के प्रमुख आकर्षणों में शामिल रहा. अपनी बड़ी बनावट और भारी सामान उठाने की क्षमता के लिए पहचाना जाने वाला चिनूक सैन्य अभियानों में सैनिकों और जरूरी उपकरणों को पहुंचाने का काम करता है. गंगा के ऊपर इसकी उड़ान ने दर्शकों का ध्यान खींचा. हेलीकॉप्टर की बनावट और उड़ान का अंदाज दूसरे विमानों से अलग दिखाई देता है. इसके प्रदर्शन ने भारतीय वायुसेना के हेलीकॉप्टर बेड़े की क्षमता की झलक पेश की.
एयर शो में सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान की उड़ान भी दर्शकों के लिए खास रही. यह भारतीय वायुसेना का बहुउद्देशीय लड़ाकू विमान है, जो अपनी गति, मारक क्षमता और हवाई करतबों के लिए जाना जाता है. गंगा के ऊपर इसकी गर्जना सुनकर लोग आसमान की ओर देखने लगे. अलग-अलग विमानों के फॉर्मेशन और उड़ान के जरिए भारतीय वायुसेना ने अपनी हवाई क्षमता, पायलटों के कौशल और विमानों के बीच तालमेल की झलक दिखाई.