कौन हैं मेरठ के SSP संतोष मूर्ति, जिन्हें जज ने कोर्ट में 45 मिनट तक खड़ा रखा?

कौन हैं मेरठ के SSP संतोष मूर्ति, जिन्हें जज ने कोर्ट में 45 मिनट तक खड़ा रखा?


Meerut SSP BBGT Santosh Murthy: उत्तर प्रदेश के मेरठ के SSP बीबीजीटीएस मूर्ति इन दिनों इलाहाबाद हाईकोर्ट की एक सख्त कार्रवाई को लेकर चर्चा में हैं. दरअसल, अदालत ने एक मामले में आरोपी को पेश करने के आदेश का पालन नहीं होने पर उन्हें व्यक्तिगत रूप से तलब किया और सुनवाई के दौरान करीब 45 मिनट तक खड़े रहने का निर्देश दिया. इस मामले में कोर्ट ने मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (CJM) की भूमिका पर भी सवाल उठाए.

कौन हैं मेरठ SSP बीबीजीटीएस मूर्ति?

बीबीजीटीएस मूर्ति 2015 बैच के IPS अधिकारी हैं और उत्तर प्रदेश कैडर में तैनात हैं. उनका पूरा नाम बथल्ला बाल गंगाधर तिलक संतोष मूर्ति (Bathalla Bal Gangadhar Tilak Santosh Murthy) है. वह मूल रूप से तेलंगाना के हैदराबाद के रहने वाले हैं. उत्तर प्रदेश पुलिस की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार, उनका जन्म 12 फरवरी 1985 को हुआ था. उन्होंने कंप्यूटर साइंस में BTech और मार्केटिंग में MBA की पढ़ाई की है.

संतोष मूर्ति को अगस्त 2026 में मेरठ का सीनियर सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) नियुक्त किया गया था. इससे पहले वह झांसी में एसएसपी की जिम्मेदारी संभाल रहे थे. मेरठ में उन्हें अपराध पर नियंत्रण रखने, कानून-व्यवस्था मजबूत करने और आम लोगों की शिकायतों पर कार्रवाई सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी मिली थी.

क्यों कोर्ट में 45 मिनट तक खड़े रहे एसएसपी?

दरअसल, यह मामला मेरठ के सरधना थाना क्षेत्र की एक युवती से जुड़ा है. आरोपी नितीश उर्फ सिद्धांत उर्फ सेठी पर शादी का भरोसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप है. मामले की सुनवाई के दौरान आरोपी ने हाईकोर्ट में युवती से शादी करने का आश्वासन दिया था. इसी भरोसे के आधार पर उसे 18 मार्च को जमानत मिली थी. लेकिन जमानत मिलने के बाद उसने शादी नहीं की.

इसके बाद युवती ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर आरोपी की जमानत रद्द करने की मांग की. सुनवाई के दौरान अदालत ने आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया और उसे हाईकोर्ट में पेश करने का निर्देश दिया.

वहीं, आरोपी को हाईकोर्ट में पेश करने के बजाय मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में ले जाया गया, जहां से उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया. जब आरोपी को हाईकोर्ट के सामने पेश नहीं किया गया, तो अदालत ने इस पर नाराजगी जताई और मेरठ के SSP बीबीजीटीएस मूर्ति को व्यक्तिगत रूप से तलब किया गया.

पुलिस की चूक पर हाईकोर्ट ने जताई नाराजगी

जस्टिस अरुण कुमार सिंह देशवाल की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि गैर-जमानती वारंट जारी होने के बावजूद आरोपी को आदेश के मुताबिक हाईकोर्ट में क्यों नहीं पेश किया गया. इसके बाद, अदालत ने SSP को करीब 45 मिनट तक खड़े रहने का निर्देश दिया और भविष्य में ऐसी चूक से बचने के लिए सतर्क रहने को कहा.

SSP संतोष मूर्ति ने अदालत को बताया कि वह 28 सितंबर से 2 अक्टूबर तक छुट्टी पर थे और इस दौरान उनके जूनियर अधिकारियों से गलती हुई. हालांकि, अदालत ने कहा कि वारंट की तामीली सुनिश्चित कराने की जिम्मेदारी SSP की थी. बेंच ने उनके खिलाफ कोई दंडात्मक आदेश पारित नहीं किया, लेकिन उन्हें शाम 4 बजे तक अदालत में मौजूद रहने का निर्देश दिया.

मेरठ के CJM पर भी उठे सवाल

इस मामले में हाईकोर्ट ने केवल पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल नहीं उठाए, बल्कि मेरठ के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट के आचरण पर भी गंभीर आपत्ति जताई. अदालत के अनुसार, गैर-जमानती वारंट जारी होने और आरोपी को हाईकोर्ट में पेश करने के निर्देश की जानकारी होने के बावजूद उसे सीधे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया.

बेंच ने इस मामले में आदेश की कॉपी मेरठ के प्रशासनिक न्यायाधीश के सामने रखने का निर्देश दिया, ताकि संबंधित न्यायिक अधिकारी के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई पर विचार किया जा सके. इस तरह मामला पुलिस की चूक के साथ-साथ न्यायिक प्रक्रिया के पालन को लेकर भी महत्वपूर्ण बन गया.

कासगंज से झांसी तक संभाल चुके हैं जिम्मेदारी

बीबीजीटीएस मूर्ति ने अपने IPS करियर में उत्तर प्रदेश के कई जिलों में काम किया है. उनकी शुरुआती तैनाती गाजियाबाद में असिस्टेंट सुपरिटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) के रूप में रही. इसके बाद उन्होंने पुलिस विभाग में अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं और कानपुर देहात तथा कासगंज जैसे जिलों में भी तैनात रहे.

कासगंज में उनकी तैनाती के दौरान माफिया की संपत्तियों के खिलाफ कार्रवाई चर्चा में रही. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, वहां नफीस अहमद उर्फ कालिया से जुड़ी 100 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति जब्त की गई थी. इसके बाद अप्रैल 2025 में उन्हें झांसी का SSP बनाया गया, जहां उन्होंने करीब 16 महीने तक काम किया. वहीं, अगस्त 2026 में उनका ट्रांसफर मेरठ कर दिया गया.

मेरठ में अपराध नियंत्रण और महिला सुरक्षा पर जोर

मेरठ में कार्यभार संभालने के बाद संतोष मूर्ति ने कानून-व्यवस्था मजबूत करने, अपराध पर नियंत्रण, महिला और बच्चों की सुरक्षा तथा यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने को अपनी प्राथमिकताओं में शामिल किया. उन्होंने पुलिस थानों में लोगों की शिकायतों को गंभीरता से सुनने और भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई पर भी जोर दिया.



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