Study Abroad New Destinations: विदेश में पढ़ाई का बदला ट्रेंड, अब अमेरिका नहीं जाना चाहते भारतीय बच्चे, इन देशों का कर रहे रुख


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Study Abroad New Destinations: विदेश में पढ़ाई का सपना अब सिर्फ अमेरिका या ब्रिटेन तक सीमित नहीं रह गया है. नई जनरेशन के भारतीय स्टूडेंट्स अमेरिका के बजाय अन्य देशों का रुख कर रहे हैं. जानिए विदेश में वे किन कोर्स की पढ़ाई करते हैं और स्टडीज का ग्लोबल ट्रेंड कैसे बदल रहा है.

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विदेश में पढ़ाई का बदला ट्रेंड, अब अमेरिका नहीं जाना चाहते भारतीय बच्चेZoom

Study Abroad New Destinations: अब भारतीयों के बीच अमेरिका का रुझान कम हो रहा है

नई दिल्ली (Study Abroad). विदेश में पढ़ाई की बात आते ही भारतीय स्टूडेंट्स और उनके पेरेंट्स के दिमाग में सबसे पहला नाम अमेरिका का आता था. हार्वर्ड, MIT या स्टैनफोर्ड जैसे संस्थानों का क्रेज देखकर सब वहीं जाने का सपना देखते थे. लेकिन वक्त के साथ हवा का रुख भी बदल चुका है. US की स्ट्रिक्ट वीजा पॉलिसी, भारी फीस, रहने का बढ़ता खर्च और पढ़ाई के बाद जॉब सर्च वीजा को लेकर बढ़ती अनिश्चितता ने सोचने पर मजबूर कर दिया है. अब अमेरिका इकलौता और आखिरी ऑप्शन नहीं रह गया है.

नई पीढ़ी के स्मार्ट और अपडेटेड भारतीय स्टूडेंट्स केवल किसी देश के ‘ब्रांड नेम’ पर नहीं जाते. वे अपनी पढ़ाई के रिटर्न ऑन इन्वेस्टमेंट (ROI) पर ध्यान दे रहे हैं. जितना पैसा पढ़ाई में लगा रहे हैं, क्या उसकी भरपाई और करियर ग्रोथ समय पर मिलेगी या नहीं? इसी सोच के चलते भारतीय युवा अब यूरोप, एशिया और यहां तक कि Latin अमेरिका के कई उभरते शिक्षा केंद्रों का रुख कर रहे हैं. समझिए भारतीय स्टूडेंट्स विदेश में पढ़ाई के लिए कौन से नए ठिकाने चुन रहे हैं और उनकी पढ़ाई की प्रायोरिटी कैसे बदल रही है.

अमेरिका का मोहभंग: आखिर क्यों बदल रही है पसंद?

अमेरिका में पढ़ाई का खर्च आसमान छू रहा है. ऊपर से डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और एजुकेशन लोन का ब्याज छात्रों पर भारी बोझ डालता है. इसके अलावा, H-1B वीजा की अनिश्चितता और पढ़ाई पूरी होने के बाद काम करने की सीमित टाइमलाइन ने स्टूडेंट्स को सिक्योर और आसान रास्ते ढूंढने पर मजबूर कर दिया है. इसी वजह से अब स्टूडेंट्स ऐसे देशों की तलाश कर रहे हैं जहां पढ़ाई सस्ती हो, वीजा प्रक्रिया आसान हो और पढ़ाई पूरी होने के बाद काम करने का पक्का मौका मिले.

जर्मनी, आयरलैंड से लेकर जापान तक: ये बन रहे हैं नए हॉटस्पॉट

  • जर्मनी: पब्लिक यूनिवर्सिटीज में मुफ्त या बेहद कम ट्यूशन फीस के कारण जर्मनी भारतीय स्टेम (STEM) स्टूडेंट्स की पहली पसंद बनता जा रहा है.
  • आयरलैंड: आईटी, डेटा साइंस और फार्मास्यूटिकल सेक्टर के लिए आयरलैंड यूरोपीय संघ का बड़ा हब बन चुका है. यहां 2 साल का पोस्ट-स्टडी वर्क वीजा भी आसानी से मिलता है.
  • जापान और दक्षिण कोरिया: टेक और रोबोटिक्स में रुचि रखने वाले अब भाषा की दीवार तोड़कर इन एशियाई दिग्गजों का रुख कर रहे हैं. यहां स्कॉलरशिप के काफी मौके हैं.
  • नीदरलैंड्स और फ्रांस: बिजनेस मैनेजमेंट, आर्ट्स और सस्टेनेबिलिटी से जुड़े कोर्स के लिए ये देश तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.

भारतीय स्टूडेंट्स विदेशों में क्या पढ़ना चाहते हैं?

पहले ज्यादातर भारतीय स्टूडेंट्स सिर्फ कंप्यूटर साइंस, मैकेनिकल इंजीनियरिंग या एमबीए करने विदेश जाते थे, वहीं अब ट्रेंड में बड़ा बदलाव आया है. आज के युवा भविष्य की जरूरतों के हिसाब से नए और एडवांस कोर्स को तवज्जो दे रहे हैं:

  • आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग: दुनियाभर में एआई की क्रांति के चलते इसकी मांग सबसे ज्यादा है.
  • सस्टेनेबिलिटी और ग्रीन एनर्जी: क्लाइमेट चेंज, रिन्यूएबल एनर्जी और एनवायरमेंटल साइंस जैसे विषयों में भारी उछाल आया है.
  • हेल्थकेयर एंड बायोटेक: मेडिकल रिसर्च, पब्लिक हेल्थ और बायो-इन्फॉर्मेटिक्स में भारतीय स्टूडेंट्स काफी रुचि दिखा रहे हैं.
  • डेटा एनालिटिक्स और फिनटेक: फाइनेंस और टेक्नोलॉजी का कॉम्बिनेशन अब नए दौर का पसंदीदा करियर बनता जा रहा है.

पढ़ाई के लिए सही देश कैसे चुनें?

अगर आप विदेश में पढ़ाई का मन बना रहे हैं तो केवल यूनिवर्सिटी की रैंकिंग देखकर फैसला न लें. इन 3 फैक्टर्स को भी दिमाग में रखें:

  • पोस्ट-स्टडी वर्क परमिट (PSWR): चेक कर लें लें कि पढ़ाई खत्म होने के बाद वहां रुककर काम करने का कितना समय मिलेगा.
  • लोकल भाषा और कल्चर: जर्मनी या जापान जैसे देशों में पढ़ाई भले अंग्रेजी में हो, लेकिन पार्ट-टाइम जॉब और सोशल लाइफ के लिए वहां की भाषा सीखना बहुत जरूरी है.
  • पार्ट-टाइम काम के नियम: यह जरूर देखें कि उस देश में स्टूडेंट्स को हफ्ते में 20 घंटे काम करने की कानूनी अनुमति है या नहीं. इससे वहां रहने का खर्च निकल सकेगा.



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