खेतों में मां-बाप का पसीना देख बदली सोच, BTech छात्रों ने बना दिया स्मार्ट ऐप
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Smart App for Farmers: हैदराबाद में बीटेक के छात्रों ने किसानों की परेशानियों को दूर करने के लिए एक अनोखा स्मार्ट ऐप तैयार किया है. किसान परिवारों से आने वाले इन छात्रों ने बचपन से अपने माता-पिता को खेतों में मेहनत करते और आर्थिक चुनौतियों से जूझते देखा था. इसी अनुभव ने उन्हें किसानों के लिए कुछ नया करने की प्रेरणा दी. छात्रा वर्री अनुषा के मुताबिक, बीटेक के तीसरे वर्ष में उन्होंने अपनी तकनीकी पढ़ाई का इस्तेमाल किसानों की मदद के लिए करने का फैसला किया. दिन में कॉलेज की पढ़ाई और रात में कोडिंग करते हुए करीब नौ महीने की मेहनत के बाद उन्होंने ‘RythuVoice’ ऐप विकसित किया. इस ऐप की खासियत यह है कि कम पढ़े-लिखे किसान भी अपनी भाषा में बोलकर इसका इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें फसलों की सीधी खरीद-बिक्री, डेयरी उत्पादों का व्यापार, स्थानीय कृषि समाचार और खेत प्रबंधन जैसी सुविधाएं दी गई हैं.
हैदराबाद. इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले ज्यादातर युवा बड़ी टेक कंपनियों में आकर्षक सैलरी पैकेज और आरामदायक नौकरी का सपना देखते हैं. लेकिन कुछ छात्र ऐसे भी होते हैं जो अपने तकनीकी हुनर का इस्तेमाल समाज की जमीनी दिक्कतों को दूर करने में लगाते हैं. ऐसा ही एक सराहनीय काम इंजीनियरिंग के छात्रों ने कर दिखाया है. इंजीनियरिंग के छात्रों ने कॉलेज की पढ़ाई पूरी की और रात में कोडिंग करके किसानों के लिए RythuVoice नाम से एक खास स्मार्ट ऐप विकसित किया है.
छात्रा वर्री अनुषा ने बताया कि बीटेक के दूसरे वर्ष तक वे भी अन्य साथियों की तरह किसी अच्छी कंपनी में नौकरी हासिल करने की योजना बना रहे थे. लेकिन तीसरे वर्ष में पहुंचने के बाद उन्होंने गहराई से सोचा कि वे यह सब किसके लिए कर रहे हैं. चूंकि ये सभी छात्र किसान परिवारों से ताल्लुक रखते हैं, इसलिए बचपन से ही खेतों में अपने माता-पिता और परिजनों के कड़े पसीने और आर्थिक संघर्ष को देखा था. उन्होंने फैसला किया कि अपनी तकनीकी समझ का फायदा किसी बड़ी कॉरपोरेट कंपनी को देने के बजाय अपने ही खेतों में पसीना बहा रहे किसान परिवारों के लिए इस्तेमाल किया जाए.
किसान ऐप के जरिए ले सकते हैं कृषि संबंधी मदद
कॉलेज की नियमित कक्षाओं और प्रोजेक्ट्स को दिन में निपटाने के बाद, छात्र अपने कमरे पर लौटकर पूरी रात ऐप के डेवलपमेंट और कोडिंग पर काम करते थे. करीब 9 महीने के लगातार प्रयासों के बाद यह ऐप तैयार हो सका. किसानों की व्यावहारिक चुनौतियों को ध्यान में रखकर इस ऐप को बेहद सरल बनाया गया है. ऐप खोलते ही पढ़ने और बोलने के विकल्प मिलते हैं. कम पढ़े-लिखे या अनपढ़ किसान केवल बोलकर अपनी भाषा में ऐप से बात कर सकते हैं. हर फीचर के लिए बड़े और स्पष्ट चित्र आइकन दिए गए हैं.
किसानों को ऐप के जरिए इसका भी मिलेगा फायदा