IIT Madras Success Story: पढ़ाई करने की कोई उम्र नहीं होती. अगर कुछ नया सीखने की इच्छा हो तो 60 साल की उम्र में भी दोबारा किताबें उठाई जा सकती हैं. इसकी मिसाल हैं मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण जिन्होंने 61 साल की उम्र में फिर से पढ़ाई शुरू करने का फैसला किया. वह कोई ऐसे व्यक्ति नहीं हैं जिन्हें पहले पढ़ने का मौका नहीं मिला. उन्होंने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और दो एमटेक की डिग्रियां हासिल की हैं. इसके बाद कई दशक तक टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में काम किया और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (SEBI) में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) जैसे बड़े पद की जिम्मेदारी संभाली.
इतना लंबा करियर होने के बावजूद एक दिन उन्हें महसूस हुआ कि दुनिया बदल चुकी है और उनकी पुरानी डिग्रियों के समय पढ़ाई जाने वाली तकनीक अब काफी पीछे छूट गई है. बस, यहीं से उन्होंने दोबारा छात्र बनने का फैसला किया. उन्होंने आईआईटी मद्रास के बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लीकेशंस प्रोग्राम में दाखिला लिया और 61 साल की उम्र में यह डिग्री हासिल की हालांकि यह सफर आसान नहीं था. पढ़ाई के दौरान कभी याददाश्त ने परेशान किया, कभी परिवार की जिम्मेदारियां सामने आईं और एक समय सर्जरी भी करानी पड़ी लेकिन उन्होंने सीखना नहीं छोड़ा. आइए जानते हैं कि मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण कौन हैं, कहां तक पढ़ाई की है और इतने लंबे करियर के बाद फिर से आईआईटी में पढ़ने का फैसला क्यों किया.
IIT Madras, Success Story: 61 साल की उम्र में आईआईटी से पढाई.
कौन हैं मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण?
मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबे समय तक काम कर चुके एक अनुभवी प्रोफेशनल हैं. वह भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी SEBI में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर के पद पर काम कर चुके हैं.टेक्नोलॉजी लीडरशिप के साथ उनका जुड़ाव एजुकेशन और कंसल्टेंसी के क्षेत्र से भी रहा है. वह भारत के अलावा दूसरे देशों में भी विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाने और कंसल्टेंसी का काम कर चुके हैं.उनकी पढ़ाई भी देश के प्रतिष्ठित संस्थान आईआईटी दिल्ली से हुई है. उन्होंने यहां से एक बीटेक और दो एमटेक की डिग्रियां हासिल की लेकिन उनकी कहानी की सबसे दिलचस्प बात यह है कि इतने लंबे करियर और तीन तकनीकी डिग्रियों के बाद भी उन्होंने खुद को पढ़ाई से दूर नहीं किया.जब उन्हें लगा कि टेक्नोलॉजी की दुनिया तेजी से आगे बढ़ रही है तो उन्होंने अपनी उम्र को बाधा नहीं बनने दिया और फिर से पढ़ने का फैसला कर लिया.
1984 में IIT दिल्ली से किया था बीटेक
मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण की शैक्षणिक यात्रा कई दशक पहले शुरू हुई थी.उन्होंने 1984 में आईआईटी दिल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की थी.इसके बाद उन्होंने पढ़ाई जारी रखी और कंप्यूटर साइंस के क्षेत्र में आगे बढ़ने का फैसला किया.साल 1986 में उन्होंने आईआईटी दिल्ली से कंप्यूटर साइंस एंड इंजीनियरिंग में एमटेक पूरा किया लेकिन उनकी पढ़ाई यहीं खत्म नहीं हुई.इसके तीन साल बाद यानी 1989 में उन्होंने आईआईटी दिल्ली से इंडस्ट्रियल इंजीनियरिंग में दूसरी एमटेक डिग्री हासिल की.इस तरह उन्होंने आईआईटी दिल्ली से कुल तीन तकनीकी डिग्रियां लीं.इन डिग्रियों के बाद उन्होंने टेक्नोलॉजी और इंडस्ट्री के क्षेत्र में लंबा करियर बनाया.
SEBI में CTO जैसे बड़े पद पर किया काम
पढ़ाई पूरी करने के बाद मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण ने टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में अपना करियर आगे बढ़ाया. उन्होंने कई दशक तक टेक्नोलॉजी से जुड़ी जिम्मेदारियां संभालीं.अपने पेशेवर जीवन में वह भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड यानी SEBI के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट और चीफ टेक्नोलॉजी ऑफिसर (CTO) भी रहे.इतने बड़े पद पर काम करने के बाद भी उन्होंने सीखने की जरूरत को नजरअंदाज नहीं किया.उनका मानना है कि टेक्नोलॉजी की दुनिया लगातार बदल रही है और किसी व्यक्ति के पास पहले से कितनी भी डिग्रियां क्यों न हों, नई जानकारी हासिल करना जरूरी है.
तीन डिग्रियां और लंबा अनुभव, फिर दोबारा पढ़ाई क्यों?
मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण के पास आईआईटी दिल्ली की तीन डिग्रियां हैं. इसके अलावा वह टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में कई दशक काम कर चुके हैं.ऐसे में सवाल उठता है कि उन्हें दोबारा डिग्री लेने की जरूरत क्यों महसूस हुई?दरअसल उन्होंने महसूस किया कि उनकी पढ़ाई के समय जो तकनीक और विषय नए थे दुनिया उनसे काफी आगे निकल चुकी है.1980 के दशक में उन्होंने जो पढ़ाई की थी उसके बाद कंप्यूटर और डेटा से जुड़ी तकनीक में बड़े बदलाव आ चुके थे.उन्हें लगा कि उनकी पुरानी डिग्रियां अपने समय में महत्वपूर्ण थीं, लेकिन नई तकनीक को समझने के लिए अब नए सिरे से पढ़ाई करना जरूरी है.यही सोच उन्हें फिर से आईआईटी की पढ़ाई की ओर ले गई.
कोरोना महामारी के दौरान मिला नया रास्ता
मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण की जिंदगी में पढ़ाई का नया अध्याय कोरोना महामारी के दौरान शुरू हुआ.उस समय वह अपना कंसल्टेंसी का काम जारी रखे हुए थे.इसके अलावा वह जाम्बिया और बोत्सवाना जैसे देशों में विजिटिंग प्रोफेसर के तौर पर पढ़ाने से भी जुड़े रहे थे.महामारी के दौरान उन्हें आईआईटी मद्रास के बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लीकेशंस प्रोग्राम के बारे में जानकारी मिली.इस कोर्स ने उनका ध्यान खींचा.उन्हें लगा कि डेटा साइंस ऐसा क्षेत्र है जिसकी मौजूदा तकनीकी दुनिया में काफी उपयोगिता है.इस प्रोग्राम में पढ़ाए जाने वाले विषय आधुनिक जरूरतों से जुड़े थे.आईआईटी की पढ़ाई के स्तर पर उन्हें पहले से भरोसा था. इसलिए उन्होंने इस प्रोग्राम में दाखिला लेने का फैसला किया.
61 साल की उम्र में IIT मद्रास से हासिल की बीएस डिग्री
मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण ने आईआईटी मद्रास के बीएस इन डेटा साइंस एंड एप्लीकेशंस प्रोग्राम में दाखिला लिया.यह फैसला उनके लिए केवल एक और डिग्री हासिल करने का नहीं था.वह नई तकनीक सीखना चाहते थे और अपने ज्ञान को आज की जरूरतों के हिसाब से बेहतर बनाना चाहते थे.इस प्रोग्राम को उन्होंने 61 साल की उम्र में पूरा किया और बीएस डिग्री हासिल की.इस तरह आईआईटी दिल्ली से तीन डिग्रियां लेने और टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में लंबा करियर बनाने के बाद उनके शैक्षणिक सफर में आईआईटी मद्रास की एक और डिग्री जुड़ गई.उनकी कहानी यह दिखाती है कि किसी नए विषय की पढ़ाई शुरू करने के लिए उम्र की सीमा तय करना जरूरी नहीं है.
38 साल बाद पढ़ाई में लौटना आसान नहीं था
आईआईटी मद्रास के डेटा साइंस प्रोग्राम में दाखिला लेने के बाद मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा.सबसे बड़ी चुनौती थी इतने लंबे अंतराल के बाद दोबारा नियमित पढ़ाई करना.उन्होंने करीब 38 साल के अंतराल के बाद एक व्यवस्थित शैक्षणिक प्रोग्राम में पढ़ाई की.डेटा साइंस के लिए गणित, स्टैटिस्टिक्स और कंप्यूटर से जुड़े विषयों की अच्छी समझ जरूरी थी हालांकि उन्होंने पहले इन विषयों से जुड़ी पढ़ाई की थी लेकिन वह ज्ञान कई दशक पुराना हो चुका था.इसलिए पुराने कॉन्सेप्ट को दोबारा समझना और नई तकनीक के साथ जोड़ना उनके लिए आसान नहीं था.इसके बावजूद उन्होंने नियमित पढ़ाई और अनुशासन के सहारे इन विषयों पर काम किया.
उम्र बढ़ने के साथ याददाश्त भी बनी चुनौती
इस सफर में मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण को एक ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा जिससे कई उम्रदराज लोग खुद को जोड़कर देख सकते हैं.उन्हें महसूस हुआ कि उनकी याददाश्त अब पहले जैसी तेज नहीं रही.वह जो कुछ पढ़ते थे उसका एक हिस्सा कुछ दिनों बाद भूल जाते थे.उनके अनुभव के मुताबिक एक सप्ताह पहले पढ़ी गई जानकारी का लगभग आधा हिस्सा याद नहीं रह पाता था लेकिन उन्होंने इसे पढ़ाई छोड़ने की वजह नहीं बनने दिया. उन्होंने अपनी पढ़ाई का तरीका बदल दिया.
भूलने लगे तो छोटे-बड़े नोट्स बनाकर पढ़ाई की
जब मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण को लगा कि पढ़ी हुई बातें याद रखने में परेशानी हो रही है तो उन्होंने उसका समाधान निकाला.वह पढ़ाई के दौरान छोटे और बड़े नोट्स बनाने लगे.किसी विषय को समझने के बाद उसकी जरूरी बातें लिख लेते थे.इसके बाद वह बार-बार उन नोट्स को पढ़ते और रिवीजन करते थे.इस तरीके से उन्हें पुराने विषयों को याद रखने और नई जानकारी समझने में मदद मिली.उनका उद्देश्य अपनी याददाश्त को अचानक बेहतर बनाना नहीं था.उन्होंने अपनी सीमाओं को समझा और उसी के हिसाब से पढ़ाई करने का तरीका अपनाया.लगातार रिवीजन और अनुशासन के जरिए वह कोर्स की पढ़ाई के साथ आगे बढ़ते रहे.
कैसे निकाला पढ़ाई का समय?
61 साल की उम्र में पढ़ाई करना केवल किताबों और परीक्षाओं तक सीमित चुनौती नहीं थी.मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण के सामने परिवार की जिम्मेदारियां भी थीं.उन्हें अपनी बेटी और बेटे के भविष्य का ध्यान रखना था.वह चाहते थे कि उनके बच्चों को आगे बढ़ने के अच्छे अवसर मिलें.इसके साथ ही वह अपना कंसल्टेंसी का काम भी कर रहे थे.ऐसी स्थिति में परिवार, काम और पढ़ाई के बीच समय बांटना आसान नहीं था.कई दिन ऐसे गुजरते थे जब उनके पास आराम या खाली समय के लिए कोई मौका नहीं बचता था.फिर भी उन्होंने अपनी पढ़ाई जारी रखी.
IIT खड़गपुर और IIT कानपुर के कोर्स भी किए
मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण ने अपनी पढ़ाई को केवल आईआईटी मद्रास की डिग्री तक सीमित नहीं रखा.उन्होंने एनपीटीईएल (NPTEL) के जरिए भी अलग-अलग विषयों के कोर्स किए.इनमें आईआईटी खड़गपुर के दो कोर्स शामिल थे.पहला कोर्स कंज्यूमर बिहेवियर और दूसरा डेटा माइनिंग था.इसके अलावा उन्होंने आईआईटी कानपुर का साइंस ऑफ हैप्पीनेस एंड वेलबीइंग कोर्स भी किया.खास बात यह है कि उन्होंने इन तीनों कोर्स में शीर्ष स्थान हासिल किया.इससे उन्हें टेक्नोलॉजी के अलावा दूसरे क्षेत्रों को समझने का भी मौका मिला.
नई पढ़ाई से स्टार्टअप्स को सलाह देने में मिली मदद
मडडला वेंकटा शंकर लक्ष्मी नारायण लंबे समय से कंसल्टेंसी के क्षेत्र में काम कर रहे हैं.वह बेंगलुरु के स्टार्टअप्स के साथ भी जुड़े हुए हैं.आईआईटी मद्रास से डेटा साइंस की पढ़ाई और एनपीटीईएल के अलग-अलग कोर्स करने के बाद उन्हें अपने काम में भी फायदा महसूस हुआ. नई जानकारी से उन्हें स्टार्टअप्स से जुड़ी समस्याओं और जरूरतों को बेहतर तरीके से समझने में मदद मिली.खासकर डेटा साइंस और दूसरे आधुनिक विषयों की समझ उनके कंसल्टेंसी के काम में उपयोगी साबित हुई.इस तरह उन्होंने नई डिग्री को केवल अपने शैक्षणिक रिकॉर्ड तक सीमित नहीं रखा, बल्कि उससे मिली जानकारी को पेशेवर काम में भी इस्तेमाल किया.