FD Rate Hike : एफडी पर अब ये सरकारी बैंक देगा ज्‍यादा ब्‍याज, कितना मिलेगा, जानिए


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FD Rate Hike: आरबीआई के रेपो रेट बढ़ाने के बाद अब बैंकों ने फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट पर भी इंटेरेस्‍ट बढ़ाना शुरू कर दिया है. इंडियन बैंक ने अपनी एक स्‍पेशल एफडी के ब्‍याज में इजाफा कर दिया है. इस एफडी पर बैंक अब 6.75 फीसदी तक ब्‍याज देगा.

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FD Rate Hike : एफडी पर अब ये सरकारी बैंक देगा ज्‍यादा ब्‍याज, कितना मिलेगाZoom

सीनियर सिटीजंस को 7.25% की दर से ब्‍याज मिलेगा.

नई दिल्‍ली. शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता के बीच सुरक्षित निवेश की तलाश कर रहे निवेशकों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है. सरकारी बैंक, इंडियन बैंक (Indian Bank) ने अपनी स्‍पेशल एफडी ‘Ind Prosper’ पर ब्‍याज दर बढ़ाने का ऐलान किया है. बैंक ने ब्‍याज दर में 15 बेसिस प्‍वाइंट्स का इजाफा कर दिया है. अब इस एफडी में पैसा लगाने वाले आम निवेशकों को 6.75% की दर से ब्‍याज मिलेगा. वरिष्‍ठ नागरिकों को 7.25% ब्‍याज मिलेगा.

भारतीय रिजर्व बैंक ने पिछले दिनों रेपो रेट में इजाफा किया था. रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी होने से एक ओर जहां होम और कार लोन जैसे कर्ज महंगे हो गए हैं, वहीं इससे फिक्‍स्‍ड डिपॉजिट की ब्‍याज दरें बढ़ेंगी. हालांकि, रेपो रेट बढ़ने से अपने आप ही न लोन का ब्‍याज बढ़ेगा और न ही एफडी का. यह बैंक पर निर्भर करता है कि वह ब्‍याज में बढ़ोतरी करे या नहीं.

10 लाख की एफडी पर कितना मिलेगा ब्‍याज

‘Ind Prosper’ एफडी पर आम ग्राहक को 6.75% की दर से मैच्योरिटी पर कुल ₹11,43,774 मिलेंगे. इसमें शुद्ध ब्याज आय ₹1,43,774 होगी. यदि बैंक ब्याज का भुगतान हर तिमाही जोड़कर करता है, तो मैच्योरिटी की कुल रकम बढ़कर लगभग ₹11.52 लाख हो जाएगी. सीनियर सिटीजंस को 7.25% की दर से ब्‍याज मिलेगा. अगर कोई सीनियर सिटीजन 777 दिनों के लिए ₹10 लाख की एफडी कराता है, तो साधारण ब्याज पर मैच्योरिटी रकम ₹11,59,247 होगी. इसमें ₹1,59,247 केवल ब्याज ही होगा. वहीं, तिमाही कंपाउंडिंग लागू होने पर यह रकम बढ़कर करीब ₹11.60 लाख पहुंच जाएगी.

एफडी के ब्‍याज पर लगता है टैक्‍स

फिक्स्ड डिपॉजिट पर मिलने वाले ब्‍याज पर टैक्‍स लगता है.एफडी से मिलने वाले ब्याज पर निवेशक के इनकम टैक्स स्लैब के आधार पर टैक्स लगता है. आयकर नियमों के तहत इसे इनकम फ्रॉम अदर सोर्सेज माना जाता है और इसे टैक्‍सपेयर्स की कुल सालाना आय में जोड़ दिया जाता है. यदि कोई निवेशक 30% के टैक्स स्लैब में आता है, तो उसे उसी अनुपात में टैक्स देना होगा, जबकि कम स्लैब वाले निवेशकों पर टैक्स का बोझ कम रहेगा.



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