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Donald Trump Planning Another Attack on Iran: अमेरिका-ईरान के बीच का तनाव अभी कम भी नहीं हुआ था कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से ऐसा बयान आ गया, जो इसे और भड़काने वाला है. ट्रंप ने एक बार फिर से ईरान पर ऑपरेशन एपिक फयूरी की चेतावनी दी है.
डोनाल्ड ट्रंप. (AP)
US Planning another attack on Iran: अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म होने की सूरत बन ही नहीं पा रही है. तनाव कम होता है, तो ऐसी बयानबाजी हो जाती है, जो स्थतियां और खराब कर देती है. एक बार फिर से अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव बढ़ता नजर आ रहा है. इसकी वजह ये है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया है कि यदि ईरान किसी समझौते पर सहमत नहीं होता, तो अमेरिका उसके खिलाफ दोबारा सैन्य कार्रवाई कर सकता है. ट्रंप के इस बयान से पश्चिम एशिया में युद्ध और फैलने की आशंका बढ़ गई है.
इससे पहले अमेरिका के एक सीनियर डिप्लोमेट ने भी इसी सप्ताह के अंत तक ईरान पर हमले की संभावना जताई थी. 23 अक्टूबर को फ्लोरिडा में एक रैली को संबोधित करते हुए ट्रंप ने कहा- ‘हम एक और छोटा-सा ऑपरेशन एपिक फ्यूरी कर सकते हैं.’ एपिक फ्यूरी अमेरिकी सेना के उस अभियान का नाम है, जिसका इस्तेमाल ईरान के खिलाफ युद्ध के संदर्भ में किया गया है. ट्रंप के बयान से साफ है कि वाशिंगटन, तेहरान पर समझौते के लिए दबाव बनाए रखना चाहता है.
वीकेंड में हमले की आशंका
ट्रंप के बयान से कुछ घंटे पहले तुर्किये में अमेरिका के राजदूत टॉम बैरक ने ईरान पर संभावित हमले को लेकर बड़ा बयान दिया था. खाड़ी क्षेत्र के दौरे के दौरान पॉडकास्ट होस्ट मारियो नवफल से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस वीकेंड ईरान पर हमला हो सकता है. हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि अमेरिका का उद्देश्य ईरान की सरकार को सत्ता से हटाना नहीं है. बैरक ने कहा कि अगर ईरान दुनिया, अमेरिकी सहयोगियों और खाड़ी देशों को धमकाना जारी रखता है, तो उसे इसके परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं.
ट्रंप ने कहा- मुझे नहीं पता वो क्या कह रहे हैं?
दिलचस्प बात यह है कि रैली से पहले जब ट्रंप से सप्ताहांत में हमले की संभावना के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने बैरक के बयान से दूरी बनाते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में जानकारी नहीं है. उन्होंने यह भी पूछा कि क्या बैरक उनके राजदूत हैं? ट्रंप ने ईरान के साथ समझौते की संभावना पर संदेह जताते हुए कहा कि अगर ईरान समझदारी दिखाए, तो उसे बातचीत की मेज पर आ जाना चाहिए.
ईरान से जुड़ा संघर्ष आठवें महीने के करीब पहुंच रहा है. इस दौरान अमेरिका और इजरायल के हमलों तथा लेबनान में इजरायली कार्रवाई से हजारों लोगों की मौत हुई है और लाखों लोग विस्थापित हुए हैं. युद्ध के कारण ईंधन की कीमतों में भी बढ़ोतरी हुई है. अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिड टर्म इलेक्शन से पहले यह संकट ट्रंप प्रशासन के लिए अहम चुनौती बन सकता है.