खीर के बिना भी मना सकते हैं शरद पूर्णिमा! बस करें ये 5 काम, जानें शुभ मुहूर्त
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Sharad Purnima 2026: शरद पूर्णिमा का पर्व इस बार 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा. इस दिन खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा है, लेकिन अगर आप किसी कारण से खीर नहीं बना पा रहे हैं, तो भी घर पर आसान तरीकों से पूजा-अर्चना कर सकते हैं. भीलवाड़ा के नगर व्यास और ज्योतिषाचार्य पंडित कमलेश व्यास ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर खीर बनाना अनिवार्य नहीं है. इस दिन मां लक्ष्मी की पूजा, चंद्रदेव को अर्घ्य, दीपदान, मंत्र जाप और जरूरतमंदों को दान करने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है. पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. मां लक्ष्मी की विशेष पूजा के लिए निशिता काल रात 11 बजकर 40 मिनट से अगले दिन रात 12 बजकर 31 मिनट तक बताया गया है. श्रद्धालु अपनी सुविधा और श्रद्धा के अनुसार पूजा कर सकते हैं.
भीलवाड़ा. शरद पूर्णिमा का पर्व नजदीक आते ही घरों में पूजा-पाठ और धार्मिक तैयारियां शुरू हो गई है. इस दिन खीर बनाकर चांदनी में रखने की परंपरा विशेष रूप से प्रचलित है, लेकिन अगर किसी कारण से आप खीर नहीं बना पा रहे हैं तो भी घर पर पूजा-अर्चना कर सकते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार शरद पूर्णिमा पर मां लक्ष्मी की आराधना, चंद्रदेव को अर्घ्य, दीपदान और मंत्र जाप का विशेष महत्व है. श्रद्धालु अपनी श्रद्धा और सुविधा के अनुसार इन तरीकों को अपनाकर पर्व मना सकते हैं.
जानें शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त
ज्योतिषाचार्य पंडित कमलेश व्यास ने बताया कि शरद पूर्णिमा का पर्व इस बार 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा. पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह करीब 11 बजकर 55 मिनट से शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट तक रहेगी. इस दिन चंद्रोदय शाम करीब 5 बजे होगा. मां लक्ष्मी की विशेष पूजा के लिए निशिता काल का मुहूर्त रात 11 बजकर 40 मिनट से 26 अक्टूबर की रात 12 बजकर 31 मिनट तक रहेगा. श्रद्धालु शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद पूजा-अर्चना, दीपदान और मंत्र जाप कर सकते हैं. स्थानीय पंचांग के अनुसार समय में कुछ मिनटों का अंतर हो सकता है.
खीर नहीं बना सकते तो इन तरीकों से करें उपासना
नगर व्यास और ज्योतिषाचार्य पंडित कमलेश व्यास ने बताया कि शरद पूर्णिमा पर खीर बनाना जरूरी नहीं माना जाना चाहिए. पूजा में सबसे महत्वपूर्ण श्रद्धा और भक्ति का भाव है. घर पर कुछ आसान तरीकों से भी इस पर्व को मनाया जा सकता है. शरद पूर्णिमा को मां लक्ष्मी की आराधना के लिए विशेष माना जाता है. शाम को घर के पूजा स्थल की सफाई करें. मां लक्ष्मी के सामने घी का दीपक जलाएं और फूल अर्पित करें. अपनी क्षमता के अनुसार फल, मिठाई या मिश्री का भोग लगा सकते हैं. इसके बाद परिवार की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना करें. इस दिन रात में चंद्रमा के दर्शन कर उन्हें जल अर्पित करने की परंपरा है. एक लोटे में साफ जल लेकर श्रद्धापूर्वक चंद्रदेव को अर्घ्य दें. इस दौरान मन में शांति, परिवार की खुशहाली और अच्छे स्वास्थ्य की कामना कर सकते हैं.
चंद्रदेव की पूजा से मन को मिलती है शांति
ज्योतिषाचार्य ने बताया कि चंद्रदेव की पूजा से मन को शांति मिलती है. शरद पूर्णिमा की रात घर के मंदिर, मुख्य द्वार और आंगन में दीपक जला सकते हैं. दीपक जलाने से घर में सकारात्मक माहौल बनता है. दीपदान करते समय मां लक्ष्मी का स्मरण करें और परिवार की सुख-समृद्धि की प्रार्थना करें. सुरक्षा का ध्यान रखते हुए दीपक को सुरक्षित स्थान पर रखें. अगर आप ज्यादा सामग्री जुटाना नहीं चाहते, तो घर पर बैठकर मां लक्ष्मी के मंत्रों का जाप कर सकते हैं. परिवार के साथ भजन-कीर्तन करना भी एक अच्छा विकल्प है.
अपनी श्रद्धा के अनुसार कुछ समय ध्यान और प्रार्थना में बिताएं. इससे मन को शांति मिल सकती है और परिवार के सदस्यों को साथ बैठने का अवसर मिलता है. शरद पूर्णिमा पर अपनी क्षमता के अनुसार जरूरतमंदों को भोजन, फल, कपड़े या अन्य उपयोगी वस्तुएं दान कर सकते हैं. धार्मिक परंपराओं में दान-पुण्य को महत्व दिया गया है. किसी जरूरतमंद की मदद करना भी सेवा और सद्भाव का अच्छा तरीका है.
Disclaimer: इस खबर में दी गई जानकारी, राशि-धर्म और शास्त्रों के आधार पर ज्योतिषाचार्य और आचार्यों से बात करके लिखी गई है. किसी भी घटना-दुर्घटना या लाभ-हानि महज संयोग है. ज्योतिषाचार्यों की जानकारी सर्वहित में है. बताई गई किसी भी बात का Local-18 व्यक्तिगत समर्थन नहीं करता है.