Last Updated:
मुरादाबाद के जिला अस्पताल में बच्चों में हकलाने की समस्या का मुफ्त इलाज किया जा रहा है. रोजाना 10 से 12 मामले सामने आ रहे हैं, जहां स्पीच थेरेपी के जरिए बच्चों को ठीक किया जा रहा है. जिला अस्पताल में कमरा नंबर 6 और कमरा नंबर 15 में ईएनटी सर्जन बैठते हैं. अगर किसी का बच्चा ठीक से बोल नहीं पा रहा है तो आप यहां पर बच्चों के डॉक्टर को कमरा नंबर 2 में दिखाएं. जिससे ये कारण पता चल सके कि बच्चे में क्या परेशानी है. उसके बाद ईएनटी सर्जन को दिखाएं.
मुरादाबादः अगर आपके बच्चे में भी बात करते पर हकलाने की समस्या है तो घबराएं नहीं इसका जिला अस्पताल में मुफ्त उपचार किया जाता है. मुरादाबाद के जिला अस्पताल में रोजाना बच्चों में हकलाने से जुड़े 10 से 12 मामले चिकित्सकों के सामने आ रहे हैं. हकलाने की समस्या से जूझने वाले बच्चे स्पीच थेरेपी के जरिये ठीक किए जा रहे हैं. इन सभी की थेरेपी मुफ्त में की जाती है और इन सभी की इस समस्या को देखते हुए उन्हें थेरेपी के जरिए ठीक किया जाता है.
जानिए क्या है हकलाने का कारण
चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजेन्द्र कुमार ने बताया कि देखिए हकलाना ठीक से बोल न पाना या रुक-रुक कर बोलना इसके बहुत सारे कारण हो सकते हैं. कई बार बच्चा जब पैदा होता है उस समय अगर देर से रोता है तो उसका मानसिक विकास ठीक से नहीं हो पाता है. वो कारण भी हो सकता है या बीच में कोई डिफेक्ट हो वो भी हो सकता है. तो सबसे पहले उसके कारण का पता करेंगे कि बच्चे में क्या परेशानी है. जिसकी वजह से वो बोल नहीं पा रहा है. जैसे एक समय होता है जब बच्चा बड़ा होता है. जैसे-जैसे पहले बैठना सीखेगा फिर बोलना सीखेगा. बोलने में पहले मामा दादा नाना जैसे सिंगल वर्ड बोलेगा. फिर और वर्ड बोलेगा. कई बार अगर ठीक से नहीं बोल पाता तो उसको स्पीच थेरेपिस्ट से सिखाना पड़ता है.
जिला अस्पताल में मिल रही ये सुविधाएं
उन्होंने बताया कि यहां पर जिला अस्पताल में कमरा नंबर 6 और कमरा नंबर 15 में ईएनटी सर्जन बैठते हैं. उसमें स्पीच थेरेपिस्ट भी हैं. तो अगर किसी का बच्चा ठीक से बोल नहीं पा रहा है तो आप यहां पर बच्चों के डॉक्टर को कमरा नंबर 2 में दिखाएं. जिससे ये कारण पता चल सके कि बच्चे में क्या परेशानी है. उसके बाद ईएनटी सर्जन को दिखाएं. कई बार क्या होता है बच्चा अगर सुन नहीं पाता है. तो उसको बोलने में भी दिक्कत हो सकती है. ईएनटी सर्जन से उसका चेकअप कराया जाए. बाल रोग विशेषज्ञ से चेकअप कराया जाए.उसके बाद जरूरत पड़ने पर स्पीच थेरेपिस्ट के पास भेजा जाएगा.जो भी परेशानी है उसको देखकर उसको सिखाया जाएगा साथ ही उसका इलाज भी किया जाएगा.
रोजाना 10 से 12 बच्चे आ रहे ओपीडी में
उन्होंने बताया कि ऐसे बच्चों की संख्या ज्यादा नहीं होती है.कुछ बच्चे ऐसे होते हैं जो देर से रोते हैं. मानसिक रूप से विकसित नहीं हो पाते हैं.ठीक से बोल भी नहीं पाते हैं. उनकी संख्या एक-दो परसेंट होती है. ऐसे ही 10-15 बच्चे बाल रोग विभाग की ओपीडी में ईएनटी ओपीडी में आते हैं. जिनको ये चीजें बताई जाती हैं.उन्होंने कहा कि ऐसे बच्चों में कोई इजाफा नहीं हुआ है. लेकिन आज सुविधाएं बढ़ गई हैं. पहले ये थेरेपिस्ट नहीं होता था. अब जिला अस्पताल में स्पीच थेरेपिस्ट है. ईएनटी सर्जन है. साथ ही बाल रोग विशेषज्ञ हैं. जैसे ही माता पिता को पता चले कि उनका बच्चा ठीक से बोल नहीं पा रहा है या उसका मानसिक विकास ठीक से नहीं हो पा रहा है. वो तुरंत बाल रोग विशेषज्ञ और ईएनटी सर्जन से आकर दिखाएं. जहां उनका मुफ्त में उपचार कर ठीक किया जाएगा.