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Dehradun News: उम्र के आखिरी पड़ाव पर जब अपनों की व्यस्तता और अकेलापन खामोशियों का सबब बन जाता है, तब सुख-दुख साझा करने वाला एक सच्चा हमसफर किसी वरदान से कम नहीं होता. जीवनसाथी खो चुके या अकेले रह गए वरिष्ठजनों को सम्मान, अपनत्व और नई उम्मीद देने के लिए ‘अनुबंध फाउंडेशन’ राजधानी देहरादून में एक भावुक और अनूठी पहल करने जा रहा है. 25 अक्टूबर को होने वाला यह आयोजन जाति-धर्म की सीमाएं लांघकर बुजुर्गों को ढलती उम्र में एक नई शुरुआत का मंच दे रहा है.
Dehradun News: जिंदगी के इस ढलते मोड़ पर जब अकेलापन अक्सर आंसुओं और खामोशियों का सबब बन जाता है, तब कोई ऐसा हमसफर मिल जाना जो सुख-दुख बांट सके, किसी वरदान से कम नहीं होता है. जीवनसाथी को खो चुके, तलाकशुदा या अकेले रह गए वरिष्ठजनों को एक बार फिर प्रेम, सम्मान और अपनापन देने के उद्देश्य से ‘अनुबंध फाउंडेशन’ देहरादून में एक अनोखी पहल करने जा रहा है. 25 अक्टूबर 2026 को अग्रवाल भवन में आयोजित होने वाला यह ‘वरिष्ठजन जीवनसाथी परिचय सम्मेलन’ धर्म और जाति के बंधनों से परे, बुजुर्गों को अकेलापन भूलकर एक नई और शांतिपूर्ण शुरुआत करने का सुनहरा अवसर देता है.
देशभर के वरिष्ठजन कर सकते हैं आवेदन
अनुबंध फाउंडेशन के सदस्य ए. के. अग्रवाल ने बताया कि आपने सामूहिक शादी समारोह के बारे में सुना होगा, जहां एक साथ कई लोगों को उनके जीवनसाथियों से मिलाया जाता है. इस काम को कई सरकारें और सामाजिक संगठन करते हैं. लेकिन उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में उनके इस फाउंडेशन ने बुजुर्गों के लिए जीवनसाथी चुनने का मंच तैयार किया है.
इसके लिए देशभर के बुजुर्ग अप्लाई कर सकते हैं. उन्होंने कहा कि इससे पहले गुजरात के सूरत में जीवनसाथी मेले का आयोजन किया गया, जिसमें देशभर से 800 आवेदन मिले और 10 की बात भी बन गई और उन्हें जीवनसाथी भी मिले. उन्होंने कहा है कि देशभर में अब तक उन्होंने कई सम्मेलन करवाकर बुजुर्गों का अकेलापन दूर किया है.
धर्म और जाति का कोई बंधन नहीं
एके अग्रवाल बताते हैं कि देहरादून के अग्रवाल भवन में रविवार के दिन होने वाले इस सम्मेलन की खास बात यह है कि इसमें बुजुर्गों के लिए कोई फाउंडेशन (बंधन) नहीं है कि आप किस धर्म या जाति से हैं. उन्होंने कहा कि बस बुढ़ापे में एक साथी की जरूरत होती है, एक सच्चा साथी हर दर्द में साथ रहता है. उम्र के आखिरी पड़ाव में कोई न कोई साथी चाहिए होता है, इसलिए यह देहरादून में पहली बार करवाया जा रहा है. बुजुर्गों के लिए जीवनसाथी मेले का आयोजन अनुबंध फाउंडेशन पहली बार देहरादून में करवा रहा है. यह फाउंडेशन बुढ़ापे में अकेलेपन के साथ जीवन जी रहे लोगों को जीवनसाथी खोजने के लिए मंच तैयार करता है.
200 जोड़ों को मिला चुका है जीवनसाथी
इसके लिए देशभर से आवेदन मंगाए जाते हैं. इस बार 70 वृद्धाओं और 200 बुजुर्गों को सम्मेलन में आमंत्रित किया गया, जिनमें से 10 जोड़ों को उनका जीवनसाथी भी मिल गया. बुढ़ापे में अकेलापन हर बुजुर्ग की परेशानी है. अनुबंध फाउंडेशन अब तक लगभग 200 जोड़ों को उनके जीवनसाथी से मिला चुका है. फाउंडेशन ने बाकायदा इसके लिए पूरा प्रोसेस तैयार किया है. इसके लिए पहले बाकायदा संस्था से संपर्क किया जाता है, इसके बाद कुछ जरूरी स्टेप्स के साथ जोड़े शादी के बंधन में बंध जाते हैं.
‘जिंदगी की सांझ में एक सच्चे साथी की तलाश’
एक बुजुर्ग महिला सविता देवी ने कहा कि पति के निधन के बाद उनका बेटा दिल्ली में नौकरी करने गया था और अब वह देहरादून में अकेली रह रही हैं. उन्हें अगर कोई सही साथी मिल जाएगा तो बची हुई जिंदगी जीना आसान हो जाएगा. उन्होंने कहा कि ‘मेरी दोनों किडनी खराब हो चुकी हैं. अपनी आंखें बंद होने से पहले पति के समान विचार वाला जीवनसाथी मिल जाए, यही मेरी अंतिम इच्छा है.’