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Success Story : रेस्टोरेंट चेन शिव सागर के मालिक नारायण पुजारी कभी कैंटीन में टेबल साफ करने का काम करते थे. गरीब परिवार से आने वाले पुजारी ने करीब दस साल तक फूड इंडस्ट्री में छोटे-मोटे काम किए. फिर 1990 में रेस्टोरेंट में मैनेजर बने और फिर पार्टनर.
वित्त वर्ष 2025 में नारायण पुजारी की कंपनी का रेवेन्यू रिकॉर्ड ₹111.45 करोड़ के पार पहुंच गया.
नई दिल्ली. जेब में फूटी कौड़ी नहीं थी लेकिन आंखों में अनगिनत सपने जरूर थे. और साथ था संघर्ष करने का माद्दा. महज 13 साल का एक छोटा सा बच्चा जब अपने गांव से सपनों के शहर मुंबई के लिए चला तो किसी ने नहीं सोचा था एक दिन वह करोड़पति बनकर गांव लौटेगा. लेकिन, नारायण पुजारी ने अपनी मेहनत के दम पर वो कर दिखाया, जिसका सपना भी बहुत कम लोग देखते हैं. यह कहानी है शिव सागर (Shiv Sagar) रेस्टोरेंट चेन के मालिक नारायण पुजारी की. बचपन में एक कैंटिन में टेबल साफ करने वाले पुजारी आज करोड़पति हैं. उनकी कंपनी का सालाना रेवेन्यू 111 करोड रुपये है.
कर्नाटक के कुंडापुर में जन्मे नारायण पुजारी का बचपन तंगहाली में गुजरा. परिवार की कमजोर आर्थिक स्थिति ने उन्हें बचपन में ही जिम्मेदारियों के बोझ तले दबा दिया. 13 साल की म्र में उन्होंने गांव छोड़ा और काम की तलाश में मुंबई आ पहुंचे. पहली नौकरी एक कैंटीन में मिली. वे दिन भर ग्राहकों के उठने के बाद टेबल की सफाई करते. दिनभर की हाड़तोड़ मेहनत के बाद वे रात में नाइट स्कूल जाते थे. अगले दस साल तक वे फूड इंडस्ट्री में छोटे-मोटे काम करते रहे और बारीकी से रेस्टोरेंट चलाने के गुर भी सीखते रहे.
नौकरी से पार्टनरशिप का सफर
साल 1990 में नारायण पुजारी की किस्मत ने करवट ली. कारोबारी बाघुभाई पटेल ने मुंबई के केम्प्स कॉर्नर में शिव सागर की नींव रखी और नारायण पुजारी के काम व लगन को देखते हुए उन्हें मैनेजर नियुक्त किया. पुजारी की असाधारण मेहनत ने ऐसा असर दिखाया कि कुछ ही महीनों में पटेल ने उन्हें अपना बिजनेस पार्टनर बना लिया. शुरुआत में यह सिर्फ एक आइसक्रीम पार्लर जैसा था, जहां ‘क्वालिटी’ (Kwality) की आइसक्रीम और संडे सर्व किए जाते थे. 1991 में पटेल के निधन के बाद पूरे कारोबार की कमान पुजारी के कंधों पर आ गई.
कारोबार संभालते ही नारायण पुजारी ने मेन्यू पाव भाजी, साउथ इंडियन, चाइनीज और नॉर्थ इंडियन डिशेज के साथ पिज्जा को भी शामिल किया. 90 के दशक में मुंबईकरों के लिए पिज्जा एकदम नया स्वाद था. यह हाथों-हाथ हिट हो गया. रात के समय पाव भाजी और फ्रेश फ्रूट जूस पीने के लिए लोगों की कतारें लगने लगीं. रेस्टोरेंट में रात 2:30 बजे तक भीड़ रहती. केम्प्स कॉर्नर के बाद पुजारी ने चर्चगेट, कोलाबा और ठाणे में अपनी शाखाएं खोली. आज मुंबई, पुणे और मंगलुरु में लगभग 15 आउटलेट्स के साथ शिव सागर’फूड लवर्स का पसंदीदा ठिकाना है.
कोरोना में लगा बड़ा झटका
Tracxn के आंकड़ों के मुताबिक, वित्त वर्ष 2020 में कंपनी का राजस्व ₹34.55 करोड़ और मुनाफा ₹1.69 करोड़ पहुंच चुका था, लेकिन तभी कोरोना महामारी ने दस्तक दी. लॉकडाउन के चलते वित्त वर्ष 2021 में मुनाफा सिमटकर महज ₹55,000 रह गया. मगर कैंटीन में संघर्ष से तपे नारायण पुजारी ने हार नहीं मानी.
महामारी के बाद नारायण पुजारी ने ऐसा बाउंस बैक किया कि वित्त वर्ष 2023 में ₹72.29 करोड़, वित्त वर्ष 2024 में ₹93.76 करोड़ और वित्त वर्ष 2025 में कंपनी का रेवेन्यू रिकॉर्ड ₹111.45 करोड़ के पार पहुंच गया. इस दौरान शुद्ध मुनाफा भी बढ़कर ₹7.47 करोड़ हो गया.