‘जम्मू-कश्मीर के लोग इसलिए बचे हुए हैं, क्योंकि पाकिस्तान अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कश्मीरियों का मुद्दा उठा रहा है.’ जम्मू-कश्मीर नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने यह बयान दिया है, जिससे विवाद गर्मा गया है. बारामुला में एनसी के एक कार्यकर्ता सम्मेलन को संबोधित करते हुए फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘पाकिस्तान कई जगहों पर जा रहा है और कश्मीरियों के बारे में बात कर रहा है. इसी वजह से जम्मू-कश्मीर के लोग बच रहे हैं. नहीं तो कश्मीरियों के प्रति भारत के इरादे सही नहीं हैं.’ फारूक अब्दुल्ला के इस बयान पर बीजेपी और वीएचपी ने बेहद तीखी प्रतीक्रिया दी है.
‘मस्जिदें, घर, दुकानें उड़ाई जा रहीं’
फारूक अब्दुल्ला ने कहा कि दिल्ली से क्या न्याय की उम्मीद की जा सकती है. उन्होंने लोगों से अपने हक के लिए आवाज उठाने की अपील की. एनसी अध्यक्ष ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा, ‘जब तक आप लोग अपने पांव पर खड़े नहीं होंगे, कभी भी अपनी इज्जत हासिल नहीं कर सकोगे. कितना ज़ुल्म हो रहा है, हमारे लोगों पर… जो बाकी हिंदुस्तान के हिस्से में हो रहा है, जहां बीजेपी की हुकूमत है, कैसे उनकी मस्जिदें उड़ाई जा रही हैं… उनके घर उड़ाए जा रहे हैं, उनकी दुकानें उड़ाई जा रही हैं. मौत और हयात (जिंदगी) अल्लाह के हाथ में है. जब तक वो नहीं लाएगा कोई मार नहीं सकता और जब ले जाएगा कोई बचा नहीं सकता.’
‘मुझे अल्लाह को भी जवाब देना है’
एनसी चीफ ने कहा कि हम देश के साथ आगे बढ़ेंगे और देश के लिए बलिदान भी देंगे, लेकिन मैं आज जो सत्ता में हैं, उनसे कहता हूं कि वे खुद को सुधारें. जम्मू कश्मीर के पूर्व सीएम ने यह भी कहा कि उन्हें सिर्फ लोगों को ही नहीं, बल्कि अल्लाह को भी जवाब देना है और इसीलिए वह जनता के सामने सच बोलते हैं. उन्होंने कहा, ‘वे बड़े-बड़े दावे करते हैं और चर्चा की बात करते हैं, लेकिन आप दिल्ली से क्या उम्मीद कर सकते हैं? क्या आप उम्मीद करते हैं कि वे आपके साथ खड़े होंगे? नहीं. हिम्मत रखो और उनका सामना करो. अगर नहीं करोगे तो हमारी पहचान मिट जाएगी. इसीलिए हमें बोलना होगा.’
इसी कार्यक्रम में फारूक अब्दुल्ला ने जम्मू-कश्मीर के मौजूदा प्रशासन पर भी निशाना साधा. उन्होंने स्वास्थ्य क्षेत्र का मुद्दा उठाते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर में पढ़ने वाले छात्रों को दो साल तक अस्पतालों में सेवा देनी होती है और अगर वे ऐसा नहीं करते तो उन्हें राज्य को 40 लाख रुपये देने होते हैं. उन्होंने कहा कि यह इकलौता राज्य है, जहां इस संबंध में फाइल पिछले एक साल से उपराज्यपाल के पास पड़ी है और कोई फैसला नहीं किया गया है.
अब्दुल्ला ने मेडिकल संस्थानों की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पहले मेडिकल संस्थान के निदेशक और समिति तय करते थे कि कौन से उपकरण लाने हैं और किन डॉक्टरों को नियुक्त करना है. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा व्यवस्था ने वो सारी शक्तियां खत्म कर दी हैं. फारूक अब्दुल्ला ने कहा, ‘मैंने उनसे पूछा कि आपने स्वायत्तता खत्म कर दी है, तो उन्होंने मेरे सामने ही इस बात को मान लिया.’
बीजेपी-वीएचपी ने किया पलटवार
फारूक अब्दुल्ला के इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतीक्रिया दी है. पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता आरपी सिंह ने कहा, ‘फारूक अब्दुल्ला को सीमा के उस पार भी देखना चाहिए और वहां के कश्मीरियों की बदहाली पर नज़र डालनी चाहिए. यहां कश्मीर में हालात अच्छे हैं, क्योंकि अनुच्छेद 370 को हटा दिया गया और कश्मीर पूरी तरह से भारत का हिस्सा बन गया.’
वहीं वीएचपी नेता विनोद बंसल ने कहा, ‘फारूक अब्दुल्ला को शर्म आना चाहिए. पाकिस्तान के लिए ऐसा बयान दे रहे हैं. ये नमकहरामी है और नमकहरामी की भी हद होती है. ये जिस थाली में खाते हैं, उसी में छेद करते हैं. पाकिस्तान के रहमोकरम पर भारत का कोई नागरिक सुरक्षित नहीं है. ये भूल गए यही पाकिस्तान क्रूरता करता था.’ वीएचपी नेता ने इसके साथ ही कहा ‘उनको सत्ता मिल गई तो भी गद्दारी नहीं छोड़ते. रहते भारत में और गाते पाकिस्तान का हैं?’ (पीटीआई इनपुट के साथ)