अधिकतम स्पीड से घूमते ही अपने दो टुकड़े कर लेगा ब्लैक होल! नई थ्योरी से हड़कंप
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ब्लैक होल आपस में टकराकर एक हो जाते हैं, यह तो सब जानते हैं. अब वैज्ञानिकों ने कैलकुलेशन के जरिए दिखाया है कि क्या एक ब्लैक होल टूटकर दो हो सकता है. जर्नल फिजिकल रिव्यू डी में छपी स्टडी के मुताबिक अगर कोई ब्लैक होल अपनी अधिकतम गति से घूम रहा हो, तो वह दो हिस्सों में बंट सकता है. यह प्रक्रिया स्पेस-टाइम में पैंट यानी पतलून जैसी टोपोलॉजी बनाती है.
क्या दो हिस्सों में बंट सकता है ब्लैक होल? (AI Generated Image)
ब्लैक होल्स ब्रह्मांड के सबसे रहस्यमय और ताकतवर ऑब्जेक्ट्स में गिने जाते हैं. अब तक वैज्ञानिक मानते आए हैं कि जब दो ब्लैक होल पास आते हैं, तो वे टकराकर एक विशालकाय ब्लैक होल में बदल जाते हैं. लेकिन जर्नल फिजिकल रिव्यू डी में प्रकाशित एक नई थियोरेटिकल स्टडी ने बिल्कुल उलट सवाल खड़ा किया है. क्या कोई अकेला ब्लैक होल खुद टूटकर दो अलग-अलग ब्लैक होल्स में बदल सकता है? इटली की यूनिवर्सिटी ऑफ नेपल्स और डेनमार्क के क्वांटम फील्ड थ्योरी सेंटर के फिजिसिस्ट्स की एक टीम ने इस पर गणितीय कैलकुलेशंस की हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार अगर कोई ब्लैक होल अपनी अधिकतम संभव स्पीड से अपनी धुरी पर घूम रहा हो, तो उसके दो टुकड़ों में बंटने की संभावना बन सकती है.
सामान्य तौर पर ब्लैक होल को दो टुकड़ों में टूटने से क्या रोकता है?
भौतिक विज्ञान के स्थापित नियम आमतौर पर किसी ब्लैक होल को दो टुकड़ों में बंटने की इजाजत नहीं देते हैं. इसके रास्ते में सबसे बड़ी रुकावट थर्मोडायनेमिक्स यानी ऊष्मागतिकी के नियम बनते हैं. किसी भी ब्लैक होल में एंट्रॉपी होती है. इसे आसान शब्दों में किसी सिस्टम की आंतरिक व्यवस्था की माप कहा जा सकता है. एक सामान्य और स्थिर ब्लैक होल के दो छोटे ब्लैक होल्स में टूटने पर कुल एंट्रॉपी घट जाती है. थर्मोडायनेमिक्स के सिद्धांतों के मुताबिक ऐसा होना संभव नहीं माना जाता है. यही वजह है कि खगोलविद किसी शांत ब्लैक होल के टूटने की बात को खारिज करते रहे हैं.
तेजी से घूमता हुआ ब्लैक होल फिजिक्स के नियमों को कैसे चकमा देता है?
पतलून जैसी शेप बनाकर कैसे अलग होंगे नए ब्लैक होल?
अगर कोई ब्लैक होल इस तरह दो हिस्सों में बंटता है, तो उसका बाहरी दायरा जिसे इवेंट होराइजन कहते हैं, एक अनोखा रूप लेता है. वैज्ञानिकों के मुताबिक स्पेस-टाइम में यह विभाजन एक पैंट यानी पतलून की तरह दिखता है. इसमें मुख्य हिस्सा ऊपर रहता है और नीचे दो अलग-अलग पैर जैसी शाखाएं बन जाती हैं. वैज्ञानिकों ने इसे पेयर-ऑफ-पैंट्स टोपोलॉजी नाम दिया है. इस मॉडल के जरिए वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे हैं कि स्पेस-टाइम का ताना-बाना ऐसे चरम गुरुत्वाकर्षण में कैसा बर्ताव करता है.
एक ब्लैक होल के दो हिस्सों में बंटने का इलस्ट्रेशन, जिससे पैंट जैसी आकृति बनती है. (Image Credit: Francesco Sannino)
वैज्ञानिकों का मानना है कि छोटे आदिम यानी प्रिमोर्डियल ब्लैक होल्स में इस तरह का बिखराव होने की संभावना ज्यादा होती है. अत्यधिक भारी ब्लैक होल्स की तुलना में छोटे ब्लैक होल्स तेजी से अस्थिर हो सकते हैं. इस विभाजन को सीधे तौर पर देखना बेहद कठिन होगा.
हालांकि वैज्ञानिक इसे अप्रत्यक्ष तौर पर पहचान सकते हैं. जब कोई ब्लैक होल टूटता है, तो भारी मात्रा में ऊर्जा निकल सकती है. नासा के फर्मी-लैट जैसे गामा-रे टेलीस्कोप की मदद से अंतरिक्ष में ऐसे सिग्नलों को तलाशा जा सकता है. इससे अल्बर्ट आइंस्टीन के गुरुत्वाकर्षण के सिद्धांतों से आगे की फिजिक्स को समझने में मदद मिलेगी.