जामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग पर प्रदर्शन, फ्री कश्मीर वाले पोस्टर पर बवाल
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Jamia Free Kashmir Slogan Controversy: जामिया मिलिया इस्लामिया में छात्रसंघ चुनाव की मांग और ‘फ्री कश्मीर’ नारों के विवाद के बीच कांग्रेस सांसद इमरान मसूद को दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को छात्रों का समर्थन करने जाते वक्त हिरासत में ले लिया. हालांकि, पुलिस ने स्पष्ट किया कि उन्हें थाने ले जाने के बजाय मौके से ही मात्र दस मिनट में रिहा कर दिया गया, जिससे वे रात को अपने घर के लिए रवाना हो गए.
जामिया में आज दिनभर हंगामा देखने को मिला. (PTI)
नई दिल्ली. जामिया मिलिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी कैंपस इन दिनों किसी अखाड़े से कम नहीं लग रहा है. विश्वविद्यालय परिसर में कथित तौर पर फ्री कश्मीर के आपत्तिजनक नारे लिखे जाने की खबरों के बाद शुक्रवार को माहौल पूरी तरह सुलग उठा. कानून-व्यवस्था की धज्जियां उड़ती देख कैंपस के बाहर भारी-भरकम पुलिस फोर्स तैनात कर दी गई, ताकि किसी भी अनहोनी या बड़े बवाल को समय रहते रोका जा सके. बवाल की इस आग में घी डालने तब पहुंचे जब कांग्रेस सांसद इमरान मसूद धड़ल्ले से जामिया कैंपस की तरफ कूच कर गए. छात्र लंबे समय से छात्रसंघ चुनाव को दोबारा बहाल करने की मांग को लेकर जोरदार प्रदर्शन कर रहे थे. मसूद साहब इसी प्रदर्शन में छात्रों का समर्थन करने और अपनी सियासी एकजुटता दिखाने पहुंचे थे.
जैसे ही वह यूनिवर्सिटी के पास पहुंचे, दिल्ली पुलिस ने पूरी मुस्तैदी दिखाते हुए उन्हें और उनके करीब 9 साथियों को तुरंत हिरासत में ले लिया. हालांकि, इस पूरे हाई-वोल्टेज ड्रामे के बीच पुलिस ने बड़ा स्पष्टीकरण देते हुए साफ किया कि उन्हें थाने ले जाने के बजाय मौके से ही महज 10 मिनट के भीतर रवाना कर दिया गया था और रात करीब साढ़े नौ बजे तक वो अपने घर के लिए निकल चुके थे.
हिरासत में लिए जाने से ठीक पहले इमरान मसूद ने तीखे तेवर दिखाते हुए उन ताकतों पर जमकर भड़ास निकाली जो माहौल बिगाड़ने की कोशिश कर रही हैं. उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा, “कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है और यहां का बच्चा-बच्चा भी इसके खिलाफ नहीं सोच सकता. जो लोग ऐसे पोस्टर लगाकर इस छात्र आंदोलन को कमजोर करने की साजिश रच रहे हैं, मैं उनकी कड़ी निंदा करता हूं.”
उन्होंने आगे सरकार और यूनिवर्सिटी प्रशासन को आड़े हाथों लेते हुए सवाल किया कि आखिर छात्रों के जायज हकों को क्यों कुचला जा रहा है? यूनिवर्सिटी में छात्रसंघ चुनाव बहाल करने से क्यों परहेज किया जा रहा है? देश का भविष्य कहे जाने वाले इन छात्रों की आवाज दबाने की कोशिश क्यों हो रही है? बहरहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने दिल्ली की सियासत में एक बार फिर से भारी उबाल ला दिया है और यूनिवर्सिटी कैंपस में तनाव का माहौल बना हुआ है.