Indian College Students Startup Trend: लाखों-करोड़ों की सैलरी के पीछे नहीं भाग रहे एमबीए-बीटेक वाले, हर 5 में से 1 बच्चा कर रहा बिजनेस

Indian College Students Startup Trend: लाखों-करोड़ों की सैलरी के पीछे नहीं भाग रहे एमबीए-बीटेक वाले, हर 5 में से 1 बच्चा कर रहा बिजनेस


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Indian College Students Startup Trend: देश के युवाओं का मूड बदल रहा है. यह बदलाव सिर्फ उनकी पढ़ाई-लिखाई में ही नहीं, बल्कि करियर चॉइस में भी साफ नजर आ रही है. बड़ी संख्या में स्टूडेंट्स नौकरी ढूंढने वाले नहीं, बल्कि नौकरी देने वाले बन रहे हैं. GUESSS सर्वे के मुताबिक, 22% से ज्यादा कॉलेज स्टूडेंट्स पढ़ाई के साथ ही बिजनेस की दुनिया में भी कदम रख चुके हैं. जानिए इंजीनियरिंग और एमबीए स्टूडेंट्स का नया रुझान.

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Indian College Students Startup Trend: भारतीय कॉलेज स्टूडेंट्स का करियर के प्रति रुझान बदल रहा है

नई दिल्ली (College Students Startup Trend). भारतीय परिवारों में पीढ़ियों से एक सेट फॉर्मूले को सफलता का पैमाना माना जाता रहा है. ज्यादातर पेरेंट्स बच्चों को स्कूली दिनों में ही समझा देते थे कि 12वीं के बाद जितनी बढ़िया और कठिन पढ़ाई होगी, भविष्य में उतनी ही शानदार नौकरी की गारंटी मिलेगी. सभी कॉलेज के कैंपस प्लेसमेंट के जरिए नौकरी ढूंढने की कोशिश करते थे. लेकिन पिछले कुछ सालों में भारत के कॉलेज कैंपस की हवा में बड़ा बदलाव देखा जा रहा है.

अब युवा सिर्फ ‘जॉब सीकर’ (नौकरी चाहने वाले) की लाइन में नहीं खड़े हैं. वे ‘जॉब क्रिएटर’ (नौकरी देने वाले) बनने का रिस्क ले रहे हैं. उनके लिए सफलता का मतलब किसी दूसरी कंपनी के लिए काम करना नहीं, बल्कि अपना खुद का वेंचर या स्टार्टअप खड़ा करना बन गया है. ‘GUESSS इंडिया नेशनल सर्वे रिपोर्ट‘ ने इसकी पुष्टि कर दी है. IIT मंडी और रेवा यूनिवर्सिटी बेंगलुरु से समर्थित इस चौंकाने वाले सर्वे के अनुसार, 22% से अधिक भारतीय स्टूडेंट्स पढ़ाई के दौरान या तुरंत बाद अपना बिजनेस शुरू कर चुके हैं.

समझें इंजीनियरिंग और एमबीए वालों का नया ट्रेंड

पहले इंजीनियरिंग या एमबीए स्टूडेंट्स करोड़ों के पैकेज वाले कैंपस प्लेसमेंट का इंतजार करते थे. वहीं अब उनका रुख बदल चुका है. टेक्निकल स्किल्स में माहिर बीटेक स्टूडेंट्स ऐप, एआई सॉफ्टवेयर या डायरेक्ट-टू-कंज्यूमर (D2C) ब्रांड लॉन्च कर रहे हैं. वहीं, MBA स्टूडेंट्स दूसरों का बिजनेस संभालने के बजाय शुरुआती दौर के स्टार्टअप्स में को-फाउंडर बनने या खुद का बिजनेस मॉडल तैयार करने में ज्यादा दिलचस्पी दिखा रहे हैं. उनके लिए रिस्क लेना असफलता का डर नहीं, बल्कि कुछ नया सीखने का मौका बन गया है.

कॉलेज कैंपस में बदल रहा माहौल

बीते कुछ सालों में कई कॉलेजों ने अपना इंफ्रास्ट्रक्चर बदला है. लगभग हर बड़े इंजीनियरिंग और मैनेजमेंट कॉलेज में ‘इनक्यूबेशन सेंटर’ खुल चुके हैं. कॉलेज के दिनों में ही स्टूडेंट्स को प्रोटोटाइप बनाने, इनवेस्टर्स से मिलने और बिजनेस प्लान तैयार करने की ट्रेनिंग मिलने लगती है. सरकार की तरफ से मिल रही स्टार्टअप पॉलिसीज और आसान लोन ने युवाओं का हौसला बढ़ा दिया है अब कॉलेज की कैंटीन में सिर्फ नोट्स पर नहीं, बल्कि ‘वैल्यूएशन’ और ‘बिजनेस मॉडल’ पर चर्चा होती है.

टिप: अगर पढ़ाई के दौरान स्टार्टअप शुरू करना चाहते हैं तो अकेले सब कुछ करने की जगह अलग-अलग स्किल्स वाले दोस्तों (टेक एक्सपर्ट और फाइनेंस/मार्केटिंग) के साथ मिलकर ‘फाउंडर टीम’ बनाएं. नेटवर्किंग और नए आइडियाज पर एक्सपेरिमेंट करने के लिए कॉलेज के दिन बेस्ट हैं.

चुनौतियां और रिस्क: क्या रास्ता आसान है?

इन दिनों कई युवा बिजनेस शुरू करने की बात करते हैं. कई स्टार्टअप फाउंडर्स भी इसी की सलाह देते हैं. लेकिन इस रास्ते पर चलने से पहले यह समझना जरूरी है कि बिजनेस शुरू करना फूलों की सेज नहीं है. फंडिंग की कमी, मार्केट कॉम्पिटिशन और पढ़ाई के साथ तालमेल बिठाना आज भी बड़ी चुनौती है. कई बार शुरुआती असफलताओं के बाद युवा हताश भी हो जाते हैं. लेकिन परिवार और समाज के बदलते नजरिए से उन्हें समझ में आने लगा है कि फेल होना भी सीखने की प्रक्रिया का ही हिस्सा है.



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