भरतपुर के खेतों में गेंदा की बहार, फूलों की खेती से गांवों को मिल रही नई पहचान
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Bharatpur marigold flower farming news: राजस्थान के भरतपुर जिले के बुरावई, सुनारी और महतोली सहित कई गांवों के किसान अब पारंपरिक गेहूं और सरसों की खेती को छोड़कर बड़े पैमाने पर गेंदा और अन्य फूलों की खेती कर रहे हैं. हजारों बीघा जमीन पर की जा रही इस फूलों की खेती से किसानों को बेहतरीन मुनाफा हो रहा है, जिससे इन गांवों को अब ‘फूलों वाले गांव’ के रूप में एक नई पहचान मिलने लगी है. कम समय में अधिक आमदनी होने के कारण क्षेत्र के अन्य किसान भी अब इस आधुनिक कृषि विकल्प की ओर तेजी से आकर्षित हो रहे हैं.
Bharatpur News: बुरावई, सुनारी और महतोली में गेंदा के फूलों की खेती, हजारों बीघा में हो रहा मुनाफा
भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में कृषि के क्षेत्र में एक बेहद सकारात्मक और क्रांतिकारी बदलाव देखने को मिल रहा है. भरतपुर के बुरावई, सुनारी और महतोली सहित कई गांवों के किसान इन दिनों पारंपरिक फसलों को छोड़कर बड़े पैमाने पर फूलों की खेती की ओर रुख कर रहे हैं. कभी केवल गेहूं और सरसों की पैदावार के लिए पहचाने जाने वाले इस क्षेत्र के किसानों ने अब अपनी आय बढ़ाने के लिए अनूठा रास्ता चुना है. वर्तमान में इन गांवों के किसान हजारों बीघा से अधिक भूमि पर गेंदा और अन्य आकर्षक फूलों की व्यावसायिक खेती कर रहे हैं. फूलों की इस बंपर पैदावार से किसानों को बहतरीन मुनाफा हो रहा है, जिसके चलते धीरे-धीरे आसपास के अन्य किसान भी इस मुनाफे वाली खेती को अपनाने में गहरी रुचि दिखा रहे हैं. यही मुख्य वजह है कि बुरावई और उसके आसपास के इन इलाकों को अब इलाके में ‘फूलों वाले गांव’ के रूप में एक विशेष पहचान मिलने लगी है.
भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से किसान पारंपरिक रूप से केवल गेहूं और सरसों की फसलें ही उगाते आ रहे हैं. हालांकि, खेती की बढ़ती लागत, मौसम की अनिश्चितता और बाजार में मिलने वाले मुनाफे को लेकर आ रही लगातार चुनौतियों के बीच किसानों ने अपनी आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए नए विकल्पों पर विचार करना शुरू किया. इसी सोच के तहत बुरावई गांव के साहसी किसानों ने करीब पांच साल पहले बेहद सीमित जमीन पर फूलों की खेती का सफल प्रयोग किया था. शुरुआत में किसानों ने छोटे भूखंडों पर फूल उगाए, लेकिन इससे मिलने वाले त्वरित और शानदार आर्थिक रिटर्न को देखकर धीरे-धीरे खेती का रकबा व्यापक स्तर पर बढ़ाया जाने लगा.
हजारों बीघा जमीन पर लहलहा रहे गेंदा के फूल
किसानों का कहना है कि पहले वे सिर्फ पारंपरिक फसलों पर निर्भर थे, लेकिन उनसे अपेक्षित मुनाफा न मिलने के कारण उन्होंने लगभग तीन से पांच साल पहले फूलों की खेती की तरफ कदम बढ़ाया. इसके बाद से किसानों की आमदनी में जबरदस्त सुधार देखने को मिला है. अब स्थिति यह है कि गांव के किसान अपनी पारंपरिक फसलों के साथ-साथ बड़े रकबे में फूलों की खेती का विस्तार कर चुके हैं. वर्तमान समय में इस पूरे क्षेत्र में हजारों बीघा से अधिक जमीन पर विभिन्न किस्मों के फूल लहलहा रहे हैं. गेंदा सहित अन्य फूलों की इस खेती ने यहाँ के किसानों के सामने समृद्धि के नए द्वार खोल दिए हैं.
कृषि व्यवस्था में बदलाव और भविष्य की उम्मीदें
बुरावई, सुनारी, महतोली और अन्य आसपास के गांवों में फूलों की खेती का लगातार बढ़ता हुआ दायरा इस बात का सबसे बड़ा उदाहरण है कि आज का किसान बदलते समय के साथ खेती के आधुनिक और स्मार्ट तरीके अपनाने लगा है. यदि फूलों की मांग बाजार में यूं ही बनी रहती है और किसानों को उनकी उपज का उचित एवं समय पर बाजार भाव मिलता रहता है, तो आने वाले समय में इस पूरे बेल्ट में फूलों की खेती का दायरा और अधिक विस्तृत होने की पूरी संभावना है. इससे न केवल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी, बल्कि भरतपुर के इन गांवों की एक अलग और गौरवशाली कृषि पहचान भी पूरे प्रदेश में स्थापित होगी.