अन्नवरम धाम: जहां भगवान सत्यनारायण के साथ हैं ब्रह्मा और प्रभु राम, दर्शन से मिलेगी सुख-समृद्धि
अन्नवरम धाम: जहां भगवान सत्यनारायण के साथ हैं ब्रह्मा और प्रभु राम, दर्शन से मिलेगी सुख-समृद्धि
Annavaram Shakthi Peetam: आंध्र प्रदेश के अन्नवरम धाम में भगवान श्री वीर वेंकट सत्यनारायण स्वामी त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में विराजमान हैं. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान के दर्शन और पूजा के बाद श्रद्धालु प्रथम तल से नीचे यंत्रालय में जाते हैं. वहां भगवान ब्रह्मा जी यंत्र रूप में प्रतिष्ठित हैं, साथ ही प्रभु श्री सत्यनारायण जी के पवित्र चरणकमलों के दर्शन होते हैं. यंत्रालय में दर्शन के बाद भक्त इस क्षेत्र के क्षेत्रपाल कोदंडधारी श्री रामचंद्रन जी के मंदिर पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि प्रभु श्री राम के दर्शन से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सफलता मिलती है. इसके बाद मंदिर प्रांगण में ही स्थित माता वन दुर्गा के दर्शन किए जाते हैं, जो क्षेत्र देवी के रूप में भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. अन्नवरम में श्री वीर वेंकट सत्यनारायण व्रत का विशेष महत्व है. मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक सत्यनारायण कथा और व्रत करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मन, वचन और कर्म से प्रभु का स्मरण करने वाले भक्तों पर श्री सत्यदेव की अपार कृपा सदैव बनी रहती है.
Annavaram Shakthi Peetam: आंध्र प्रदेश के अन्नवरम धाम में भगवान श्री वीर वेंकट सत्यनारायण स्वामी त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के रूप में विराजमान हैं. मंदिर के मुख्य गर्भगृह में भगवान के दर्शन और पूजा के बाद श्रद्धालु प्रथम तल से नीचे यंत्रालय में जाते हैं. वहां भगवान ब्रह्मा जी यंत्र रूप में प्रतिष्ठित हैं, साथ ही प्रभु श्री सत्यनारायण जी के पवित्र चरणकमलों के दर्शन होते हैं. यंत्रालय में दर्शन के बाद भक्त इस क्षेत्र के क्षेत्रपाल कोदंडधारी श्री रामचंद्रन जी के मंदिर पहुंचते हैं. श्रद्धालुओं का दृढ़ विश्वास है कि प्रभु श्री राम के दर्शन से जीवन के सभी संकट दूर होते हैं और सफलता मिलती है. इसके बाद मंदिर प्रांगण में ही स्थित माता वन दुर्गा के दर्शन किए जाते हैं, जो क्षेत्र देवी के रूप में भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करती हैं. अन्नवरम में श्री वीर वेंकट सत्यनारायण व्रत का विशेष महत्व है. मान्यता है कि यहां श्रद्धापूर्वक सत्यनारायण कथा और व्रत करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है. मन, वचन और कर्म से प्रभु का स्मरण करने वाले भक्तों पर श्री सत्यदेव की अपार कृपा सदैव बनी रहती है.