भारत में बनने वाले इंडस्ट्रियल प्रोडक्ट्स को विदेशी सस्ते सामान से मुकाबला करना पड़ता है. जब कोई विदेशी कंपनी अपने प्रोडक्ट्स भारतीय बाजार में घरेलू कंपनियों की कीमतों से काफी कम दाम पर बेचती है, तो इससे देश की कंपनियों की बिक्री और कमाई पर असर पड़ सकता है. इसी तरह के मामले में चीन से आने वाले नेचुरल माइका आधारित पर्ल इंडस्ट्रियल पिगमेंट पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी जारी रखने की सिफारिश की गई है. वाणिज्य मंत्रालय के तहत काम करने वाले डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ ट्रेड रेमेडीज (DGTR) ने इस ड्यूटी को अगले पांच साल तक बढ़ाने का प्रपोजल दिया है.
DGTR की जांच में सामने आया कि चीन से आयात होने वाले ये पिगमेंट भारतीय इंडस्ट्री की कीमतों के मुकाबले 10 से 20 फीसदी तक सस्ते थे. ऐसे में ड्यूटी जारी रखने का फोकस घरेलू कंपनियों को सस्ते आयात से होने वाले नुकसान से बचाना है. हालांकि, अभी यह केवल सिफारिश है. इसे लागू करने पर अंतिम फैसला संबंधित सरकारी प्राधिकरण को लेना है. प्रपोजल के तहत अलग-अलग चीनी उत्पादकों के लिए अलग-अलग ड्यूटी दरें तय करने की बात कही गई है. कॉस्मेटिक ग्रेड माइका पिगमेंट को इससे बाहर रखने की भी सिफारिश की गई है.
क्या है एंटी-डंपिंग ड्यूटी और क्यों जरूरी है?
एंटी-डंपिंग ड्यूटी एक तरह का अतिरिक्त आयात शुल्क है. इसे तब लगाया जाता है, जब किसी देश से आने वाले प्रोडक्ट्स भारतीय बाजार में अनुचित रूप से कम कीमत पर बेचे जाते हैं और इससे घरेलू इंडस्ट्री को नुकसान पहुंचता है या नुकसान का रिस्क पैदा होता है. माइका पिगमेंट के मामले में DGTR ने पाया कि जांच के दौरान चीन से आने वाले संबंधित उत्पाद भारतीय इंडस्ट्री की कीमतों से 10-20 फीसदी तक सस्ते थे. ऐसे में ड्यूटी जारी रखने से भारतीय कंपनियों को कीमतों के मामले में मुकाबला करने में मदद मिल सकती है.
किस कंपनी की मांग पर शुरू हुई जांच?
इस मामले में सनसेट रिव्यू प्रोसेस सुदर्शन केमिकल इंडस्ट्रीज लिमिटेड के आवेदन के बाद शुरू हुआ. सनसेट रिव्यू के जरिए यह जांच की जाती है कि मौजूदा एंटी-डंपिंग ड्यूटी खत्म होने पर संबंधित प्रोडक्ट्स का सस्ता आयात दोबारा बढ़ सकता है या नहीं और क्या इससे घरेलू उद्योग को नुकसान होने की आशंका है.
DGTR ने 5 मार्च 2026 को इस मामले में जांच शुरू करने की अधिसूचना जारी की थी. इसके लिए 1 अक्टूबर 2024 से 30 सितंबर 2025 तक की अवधि के आयात और कीमतों से जुड़े आंकड़ों का अध्ययन किया गया. समीक्षा के बाद विभाग ने मौजूदा ड्यूटी को अगले पांच साल तक जारी रखने की सिफारिश की है.
चीन की कंपनियों पर कितनी ड्यूटी लगाने का प्रस्ताव?
DGTR ने चीनी के प्रोडक्ट्स के लिए अलग-अलग दरों पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी लगाने का सुझाव दिया है.
- Fujian Kuncai Material Technology: 299 डॉलर प्रति मीट्रिक टन.
- चीन के अन्य उत्पादक- 3,144 डॉलर प्रति मीट्रिक टन.
इन दरों का प्रस्ताव संबंधित प्रोडक्ट्स के आयात पर लागू होगा. इसका मकसद सस्ते आयात से घरेलू उद्योग पर पड़ने वाले संभावित असर को कम करना है. ध्यान देने वाली बात यह है कि ये प्रस्तावित दरें हैं और अंतिम निर्णय संबंधित सरकारी प्राधिकरण की मंजूरी के बाद ही स्पष्ट होगा.
कॉस्मेटिक ग्रेड माइका पिगमेंट को राहत
इस प्रस्ताव में सभी तरह के माइका पिगमेंट को शामिल नहीं किया गया है. कॉस्मेटिक ग्रेड माइका पिगमेंट को एंटी-डंपिंग ड्यूटी के दायरे से बाहर रखने की सिफारिश की गई है. यानी प्रस्तावित शुल्क मुख्य रूप से नेचुरल माइका आधारित पर्ल इंडस्ट्रियल पिगमेंट के आयात पर केंद्रित रहेगा.
इस अंतर को समझना जरूरी है, क्योंकि इंडस्ट्रियल और कॉस्मेटिक इस्तेमाल वाले पिगमेंट की जरूरतें अलग-अलग हो सकती हैं. छूट के कारण कॉस्मेटिक ग्रेड उत्पादों पर इस प्रस्तावित ड्यूटी का सीधा असर नहीं पड़ेगा.
मौजूदा ड्यूटी कब तक लागू है?
फिलहाल, संबंधित माइका पिगमेंट पर लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी की डेडलाइन 25 फरवरी 2027 तक है. वित्त मंत्रालय पहले इसकी अवधि दो बार तीन-तीन महीने के लिए बढ़ा चुका है. अब DGTR ने सनसेट रिव्यू के बाद इसे अगले पांच साल तक जारी रखने का सुझाव दिया है.
आगे इस सिफारिश पर संबंधित प्राधिकरण फैसला लेगा. यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो भारतीय प्रोडक्ट्स को लंबे समय तक सस्ते आयात से सुरक्षा मिल सकती है. फिलहाल, पांच साल की अवधि बढ़ाने का प्रस्ताव अंतिम सरकारी मंजूरी मिलना बाकि है.