अगर आपसे पूछा जाए कि दिल्ली को प्रदूषित करने में किसका योगदान ज्यादा हो सकता है? तो हो सकता है कि आपका जवाब ट्रक, कारें या फैक्ट्रियां हो. लेकिन इस सवाल का असली जवाब जानकर आप माथा पकड़ लेंगे. आंकड़े बता रहे हैं कि दिल्ली की सड़कों पर दौड़ रहीं बाइकें यहां की हवा में सबसे जहर घोलने में सबसे अव्वल हैं. दिल्ली के 77 फीसदी से ज्यादा बाइकर्स प्रदूषण नियंत्रण प्रमाणपत्र (पीयूसीसी) के बिना दौड़ रहे हैं.
टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक इस साल दोपहिया वाहन यानी मोटरसाइकिल और स्कूटर पीयूसीसी सर्टिफिकेट के नियमों का उल्लंघन करने में सबसे आगे चल रहे हैं.
ट्रैफिक पुलिस के आंकड़ों के मुताबिक, एक जनवरी से 20 अक्टूबर तक दिल्ली में कुल 4,41,911 पीयूसीसी चालान काटे गए. इनमें से 3,40,759 चालान यानी 77.1 प्रतिशत दोपहिया वाहनों पर लगे. यानि इन बाइकर्स के पास वैध पीयूसी सर्टिफिकेट ही नहीं था या एक्सपायर्ड था. इस दौरान कारों का हिस्सा महज 19.6 प्रतिशत रहा, यानी 86,450 चालान कारों के काटे गए. दोनों मिलाकर कुल उल्लंघनों का करीब 97 प्रतिशत हिस्सा बनते हैं.
क्या कम प्रदूषण फैलाते हैं दोपहिया?
यह आंकड़ा उन लोगों के लिए चौंकाने वाला है जो मानते हैं कि दोपहिया वाहन कम प्रदूषण फैलाते हैं और शहर की भीड़भाड़ में आसान विकल्प हैं. लेकिन वैध पीयूसीसी न रखने की लापरवाही इन वाहनों के मालिकों में सबसे ज्यादा दिख रही है. राजधानी के टॉप पांच रिपीट ऑफेंडर्स में भी दोपहिया वाहन प्रमुखता से शामिल हैं.
दिल्ली में लागू नो पीयूसीसी नो फ्यूल पॉलिसी
अक्टूबर की शुरुआत से दिल्ली में ‘नो पीयूसीसी, नो फ्यूल’ नीति सख्ती से लागू की गई है. बिना वैध प्रमाणपत्र के पेट्रोल पंप पर ईंधन नहीं मिल रहा. फिर भी कई बाइकर्स इस नियम से अनजान या बेपरवाह नजर आते हैं. कई लोगों को तो पता भी नहीं है कि पीयूसी क्या होता है और कुछ लोगों को ये नहीं पता कि ये एक्सपायर्ड भी होता है.
बसों और ट्रकों के मामले कम
बाकी चालान अन्य श्रेणियों में बंटे हुए हैं. लाइट गुड्स वाहनों पर 5,163, थ्री-व्हीलर पर 4,734, कमर्शियल कार और वैन पर 2,516 चालान लगे. भारी वाहनों, बसों और ग्रामीण सेवा वाहनों के आंकड़े अपेक्षाकृत कम हैं. ये आंकड़े ऐसे समय आए हैं जब दिल्ली सर्दी के प्रदूषण सीजन में प्रवेश कर चुकी है. वाहनों से निकलने वाला धुआं शहर की खराब हवा का एक बड़ा कारण माना जाता है.
विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार को नियमों को और सख्ती से लागू करना चाहिए. इस आंकड़े से साफ है कि दिल्ली की कारें अपेक्षाकृत कम प्रदूषण फैलाती हैं क्योंकि ज्यादातर बीएस-IV, बीएस-VI मानकों वाली हैं या सीएनजी पर चलती हैं. दोपहिया वाहनों के मामले में ऐसा नहीं है. वहीं पहले भी कई आंकड़े आए हैं कि दिल्ली में दोपहिया वाहनों की संख्या भी काफी ज्यादा है.