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भारत सरकार ने कच्ची चीनी के 10 लाख मीट्रिक टन ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की डेडलाइन 31 दिसंबर तक बढ़ा दी है. वहीं, चीनी व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा घटाकर 1,000 क्विंटल कर दी गई है. सरकार के इन कदमों का मकसद जमाखोरी रोकना, बाजार में सप्लाई बनाए रखना और कीमतों पर नियंत्रण रखना है. मंत्रालय के अनुसार, अगस्त के उच्चतम स्तर से खुदरा कीमतें करीब 15% और मिल स्तर की कीमतें 28% तक गिर चुकी हैं.
अगस्त में ऊंचाई पर पहुंचने के बाद चीनी की औसत खुदरा कीमतों में करीब 15% की कमी आई है.
भारत सरकार ने एक मिलियन मीट्रिक टन कच्चे चीनी के ड्यूटी फ्री इंपोर्ट की डेडलाइन बढ़ा दी है. अब इंपोर्टर्स 31 अक्टूबर के बजाय 31 दिसंबर तक बिना ड्यूटी के कच्ची चीनी मंगा सकेंगे. गुरुवार, 22 अक्टूबर को जारी आधिकारिक अधिसूचना में इसकी जानकारी दी गई. इस फैसले से उन आयातकों को राहत मिलेगी, जिन्हें पहले तय डेडलाइन के अंदर चीनी लाते थे. सरकार के इस कदम से आयातकों को माल की खरीद और आपूर्ति की व्यवस्था करने के लिए दो महीने का अतिरिक्त समय मिल गया है.
चीनी की कीमतों और सप्लाई पर नजर रखते हुए सरकार ने व्यापारियों के लिए स्टॉक रखने की सीमा और घटा दी है. अब व्यापारी अधिकतम 1,000 क्विंटल चीनी ही अपने पास रख सकते हैं. यह नियम 15 अक्टूबर से 30 नवंबर तक लागू रहेगा. इससे पहले अगस्त में स्टॉक की सीमा 4,000 क्विंटल तय की गई थी, जिसे 15 सितंबर से घटाकर 2,000 क्विंटल कर दिया गया था. नए नियम के मुताबिक, व्यापारियों को चीनी मिलने के 30 दिनों के भीतर उसका स्टॉक बेचना भी जरूरी है.
जमाखोरी रोकने के लिए सरकार का कदम
चीनी के स्टॉक की सीमा कम करने के पीछे सरकार का मकसद बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखना और जमाखोरी पर रोक लगाना है. इससे व्यापारी जरूरत से ज्यादा चीनी जमा नहीं कर सकेंगे. सरकार को उम्मीद है कि इस फैसले से चीनी की खरीद-बिक्री में सट्टेबाजी पर लगाम लगेगी और बाजार में कीमतों को लेकर अनावश्यक दबाव कम होगा.
चीनी की कीमतों में कितनी गिरावट आई?
खाद्य मंत्रालय के मुताबिक, अगस्त में ऊंचाई पर पहुंचने के बाद चीनी की औसत खुदरा कीमतों में करीब 15% की कमी आई है. वहीं, चीनी मिलों के स्तर पर कीमतें लगभग 28% तक नीचे आ चुकी हैं. मंत्रालय ने संकेत दिया था कि आने वाले समय में कीमतों में और नरमी देखने को मिल सकती है. ऐसे में सरकार की कोशिश है कि बाजार में चीनी की पर्याप्त सप्लाई बनी रहे और आम उपभोक्ताओं को राहत मिले.
सप्लाई और गन्ने की पैदावार पर भी नजर
सरकार ने चीनी मिलों, व्यापारियों और थोक विक्रेताओं को बाजार में चीनी की सप्लाई लगातार बनाए रखने के निर्देश दिए हैं. साथ ही, कृत्रिम कमी पैदा करने के लिए स्टॉक जमा नहीं करने की सलाह दी गई है. मिलों से अपने क्षेत्रों के मौसम और खेती की परिस्थितियों के अनुसार गन्ने की पेराई शुरू करने को भी कहा गया है. इसके अलावा, सरकार अल नीनो के कारण कुछ इलाकों में कम बारिश और उसके गन्ने की पैदावार पर पड़ने वाले असर पर नजर रखेगी, ताकि उपभोक्ताओं को उचित कीमत पर चीनी मिले और किसानों के हितों की भी रक्षा हो सके.