शिमला. हिमाचल प्रदेश में शिमला के पूर्व एसपी और आईपीएस अफसर संजीव गांधी मुश्किल में फंस गए हैं. सुक्खू सरकार ने अपने ही अफसर पर दो केस दर्ज किए हैं. पूर्व डीआईजी संजीव गांधी पर आरोप है कि उन्होंने शिमला के एसपी रहते हुए सरकारी पैसे का दुरुपयोग किया. सरकार ने उनके खिलाफ जांच के आदेश दिए थे और अब केस दर्ज कर लिया गया है. फिलहाल, सुक्खू सरकार की तरफ से इस मामले में प्रतिक्रिया नहीं आई है.
जानकारी के अनुसार, हाल ही में डीआईजी रहे आईपीएस संजीव गांधी मौजूदा समय में हिमाचल पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम कांगड़ा के प्रबंध निदेशक हैं. वह 2012 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं. गांधी के खिलाफ दर्ज पहले मामले में धोखाधड़ी, सरकारी धन के कथित दुरुपयोग और वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे हैं. पुलिस लाइन कैथू के कांस्टेबल की शिकायत पर पहला केस दर्ज हुआ है. दूसरा केस पुलिस थाना सदर बीएनएस की धारा 316 (5) के तहत दर्ज हुई है. इस केस में लोक सेवक या निर्धारित श्रेणी के अन्य लोगों की ओर से आपराधिक विश्वासघात से संबंधित है.
आरोप है कि जिला पुलिस के एक फंड से लगभग दो वर्ष के दौरान कुल 2,35,000 रुपये की अवैध निकासी की गई और तत्कालीन एसएसपी ने ऐसे फंड के इस्तेमाल का ब्यौरा नहीं दिया.
- 23 जनवरी 2023 को संजीव गांधी को शिमला का एसपी नियुक्त किया गया और वह करीब तीन साल इस पोस्ट पर रहे.
- 7 फरवरी 2026: शिमला के SP पद से हटाकर उन्हें कार्मिक विभाग के अधीन रखा गया. 9 फरवरी 2026 को उन्हें मिल्कफेड का मैनेजिंग डायरेक्टर नियुक्त किया गया.
- 24 फरवरी 2026: संजीव गांधी को फिर एमडी पद पर कार्यभार संभालने के बजाय कार्मिक विभाग में रिपोर्ट करने को कहा गया.
- 24 मार्च 2026: डीआईजी ट्रैफिक टूरिस्ट और रेलवे के पद पर तैनात किया गया और 24 मार्च को उन्होंने कार्यभार संभाला.
- 7 अक्तूबर 2026 को फिर से सुक्खू सरकार ने आईपीएस संजीव गांधी का तबादला किया और हिमाचल पिछड़ा वर्ग वित्त एवं विकास निगम कांगड़ा के प्रबंध निदेशक बनाया.
कांस्टेबल का आरोप है कि 2024 और 2025 के दौरान सरकारी कार्यों और प्रबंध पूरा करने की जिम्मेदारी उसे दी गई थी और उसने निजी पैसा खर्च किया था. कांस्टेबल ने 1,87,890 रुपये खर्चे किए थे. शिकायतकर्ता का आरोप है कि छह फरवरी, 2026 को संजीव गांधी ने उन्हें बुलाकर भुगतान से संबंधित वाउचर पर धोखे से राशि को निकालकर शिकायतकर्ता को देने के बजाय संबंधित फंड के खाते में डाल दी. अपने पर लगे आरोपों पर संजीव गांधी ने न्यूज 18 से फोन पर कहा कि मैं सच के साथ था और हूं और रहूंगा. सच्चाई को दुनिया की कोई ताकत नहीं झूठला सकती है.
दशहरे पर डाली थी पोस्ट
दो दिन पहले संजीव गांधी ने अपने फेसबुक पेज पर लिखा था कि नशा तस्करी के विरुद्ध संघर्ष मेरी 27 वर्षों की सेवाकालीन यात्रा में सदैव मेरी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक रहा है. शिमला जिला में अपने तीन वर्षों के सेवाकाल के दौरान नशा तस्करी के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई करते हुए 2,000 से अधिक व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया तथा लगभग 1,000 मामले दर्ज किए गए. “प्रयासों की सराहना प्रयासों का अंत नहीं, बल्कि और अधिक शक्ति, दृढ़ संकल्प एवं समर्पण के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा होती है” यह प्रेरणादायक शब्द हिमाचल प्रदेश के माननीय राज्यपाल महोदय द्वारा सभी के प्रयासों की सराहना करते हुए कहे. यह मेरे लिए गर्व एवं प्रेरणा का क्षण है. इस दौरान उन्हें राज्यपाल ने सम्मानित भी किया.
क्या सरकार के निशाने पर हैं गांधी
शिमला के एसपी से हटाने के बाद सुक्खू सरकार ने बीते दस महीने में उन्हें चार बार ट्रांसफर किया है. यहां तक कि उन्हें बीच में कोई पोस्टिंग भी नहीं दी गई थी. मिल्कफेड में तैनाती पर उन्होंने ज्वाइन नहीं किया था.
बड़ा सवाल यह है कि क्या सरकार की आंखों में गांधी खटक रहे हैं? क्योंकि संजीव गांधी और तत्कालीन डीजीपी अतुल वर्मा में तकरार देखने को मिली थी. विमल नेगी केस में उन्होंने हाईकोर्ट में हलफनामा दिया था और इस पर विवाद हो गया था. मई 2025 में गांधी ने तत्कालीन डीजीपी अतुल वर्मा और कुछ वरिष्ठ अधिकारियों पर जांच में दखल देने, गलत जानकारी अदालत में देने और जांच को प्रभावित करने जैसे आरोप लगाए थे. इस कारण सुक्खू सरकार की भी काफी किरकिरी हुई थी और आरोप लगे थे कि सरकार का अफसरों पर नियंत्रण नहीं हैं.
लोगों का गांधी को समर्थन
संजीव गांधी तेज तरार अफसर हैं. वह मूल रूप से सोलन जिले के रहने वाले हैं. शिमला में चिट्टा के खिलाफ उन्होंने एसपी रहते अभियान छेड़ा था और लोग उनकी तारीफ करते हैं. अब भी लोग उनके समर्थन में उतरे हैं और सोशल मीडिया में लिख रहे हैं कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने नशे के खिलाफ अच्छा काम किया है. संजीव गांधी बतौर एचपीएस अफसर पुलिस में भर्ती हुए थे और फिर 2012 में उन्हें आईपीएस कैडर मिला था. संजीव गांधी सीएम सुक्खू के क्लासमेट भी रहे हैं और एक समय था कि वह सीएम के करीबी भी थे.