Mono Rail: सुंदरनगर में शुरू हुई हिमाचल की पहली मोनो रेल, 25 लाख आया है खर्च, 85 किसानों को होगा फायदा

Mono Rail: सुंदरनगर में शुरू हुई हिमाचल की पहली मोनो रेल, 25 लाख आया है खर्च, 85 किसानों को होगा फायदा


मंडी.  हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले के सुंदरनगर उपमंडल के साथ लगते पलौहटा गांव में प्रदेश की पहली बागवानी मोनो रेल विधिवत रूप से शुरू हो गई है. गुरुवार 22 अक्तूबर को बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने 25 लाख की लागत से बनी इस मोनो रेल का विधिवत शुभारंभ किया. 300 मीटर के इस ट्रैक को पायलट प्रोजेक्ट के तहत बनाया गया है.

जानकारी के अनुसार, पलौहटा कलस्टर 28 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला हुआ है जहां पर जापानी फलों का उत्पादन होता है. बागवानी मंत्री जगत सिंह नेगी ने बताया कुछ समय पहले जब वे यहां पर आए थे उन्होंने मोनो रेल की जरूरत को महसूस करते हुए इस प्रोजेक्ट पर कार्य करने के निर्देश दिए थे. उन्होंने बताया कि एचपी शिवा परियोजना के तहत निचले हिमाचल के 7 जिलों पर 1100 करोड़ की धनराशि खर्च की जा रही है जिसके तहत 6 हजार हेक्टेयर भूमि पर कार्य हो रहा है. इसमें मंडी जिला की एक हजार हेक्टेयर भूमि शामिल है. उन्होंने बताया कि भविष्य में इस मोनो रेल के प्रोजेक्ट को अन्य जिलों में भी शुरू किया जाएगा ताकि बागवानों को राहत मिल सके.

मंत्री नेगी ने बताया कि मंडी जिले में लगभग 1,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बागवानी विकास का कार्य पूरा करने की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं. फरवरी माह तक निर्धारित क्षेत्र में पौधरोपण कार्य पूरा करने का लक्ष्य है. बागवानी मंत्री ने बताया कि पलोहटा-II क्लस्टर में 28.44 हेक्टेयर क्षेत्र को जापानी फल (पर्सिमन) की फ्यूयू किस्म की व्यावसायिक खेती के लिए विकसित किया गया है. इस क्लस्टर में कुल 13,386 पौधे रोपित किए गए हैं, जिससे क्षेत्र के 85 किसान लाभान्वित हो रहे हैं. इनमें 73 पुरुष और 12 महिला किसान शामिल हैं.

सफलता मिलने पर अन्य क्लस्टरों में भी लगेगी मोनोरेल

जगत सिंह नेगी ने कहा कि विदेशों में बागवानी के क्षेत्र में इस प्रकार की तकनीकों का उपयोग किया जा रहा है. बागवानी विभाग की ओर से स्थापित यह मोनोरेल एक पायलट प्रोजेक्ट है. इसके परिणामों का आकलन किया जाएगा. यदि यह व्यवस्था सफल रहती है, तो भविष्य में प्रदेश के अन्य बागवानी क्लस्टरों में भी आवश्यकता के अनुसार इस तरह की सुविधा स्थापित की जाएगी. मोनोरेल के माध्यम से खाद, उर्वरक तथा अन्य आवश्यक सामग्री को बाग के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाना आसान होगा. इसके अतिरिक्त फल तैयार होने के बाद उन्हें ढुलाई के माध्यम से बाहर निकालने में भी सुविधा मिलेगी. इससे बागवानों को भारी सामान उठाकर ले जाने में लगने वाले श्रम और समय की बचत होगी.

क्लस्टर में आधारभूत सुविधाओं पर 1.65 करोड़ रुपये खर्च

उन्होंने कहा कि पलोहटा-II क्लस्टर में बागवानी को बढ़ावा देने के लिए विभिन्न आधारभूत सुविधाओं के विकास पर लगभग 1.65 करोड़ रुपये व्यय किए गए हैं. इसमें परियोजना के तहत भूमि विकास पर लगभग 32 लाख रुपये, सौर ऊर्जा आधारित बाड़बंदी पर 46.55 लाख रुपये तथा ड्रिप सिंचाई प्रणाली स्थापित करने पर करीब 85.94 लाख रुपये खर्च शामिल हैं. इसके अतिरिक्त किसानों को बागवानी के लिए आवश्यक कृषि सामग्री भी उपलब्ध करवाई गई है. क्लस्टर में 61 क्विंटल नीम खली पर 1,03,999 रुपये तथा मल्च शीट पर 14,46,432 रुपये खर्च किए गए हैं. पौधों की छंटाई के लिए आठ सेक्येटर भी उपलब्ध करवाए गए हैं, जिनकी लागत 24,000 रुपये है. जापानी फल की फ्यूयू किस्म के पौधों पर 20,59,544 रुपये खर्च किए गए हैं. मनरेगा के अंतर्गत भी 5,32,180 रुपये व्यय किए गए हैं. इसके अलावा किसानों के लिए आवश्यक उर्वरकों की व्यवस्था भी की गई है. इस मोनो रेल के शुरू होने से बागवानों को अपनी फसलों की ढुलाई के लिए इंसानी मदद की कम जरूरत रहेगी और फसलों को सुरक्षित ढंग से सड़क मार्ग तक पहुंचाया जा सकेगां.



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