इत्तू सी डिवाइस, पढ़ लेगी दिमाग की हर खुराफात, 8500 न्यूरॉन्स पर होगी पैनी नजर
Last Updated:
Smallest Wearable Brain Monitor: हम सभी सोचते हैं कि आखिर हमारा दिमाग काम कैसे करता है, तो इसी पहेली को सुलझाने का काम किया है वैज्ञानिकों ने. उन्होंने एक ऐसी माइक्रो मिनी डिवाइस बनाई है, जो दिमाग के अंदर चलने वाली हर हलचल को रिकॉर्ड कर सकती है.
ब्रेन मॉनिटर देख सकेगा दिमाग की हर हरकत. (क्रेडिट- Tsinghua University)
Smallest Wearable Brain Monitor: इंसान का दिमाग कैसे सोचता है, भावनाएं कैसे पैदा होती हैं और सामाजिक व्यवहार के पीछे क्या एक्टिविटीज काम करती हैं? विज्ञान के सामने आज भी ऐसे कई सवाल हैं. अब चीन के वैज्ञानिकों ने एक ऐसी छोटी-सी तकनीक विकसित की है, जो इन रहस्यों को समझने में बड़ी मदद कर सकती है. वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने दुनिया का सबसे छोटा ब्रेन मॉनिटर बना लिया है, जिसे पहना भी जा सकता है क्योंकि इसका वजन सिर्फ एक ग्राम है.
इस वायरलेस डिवाइस का नाम ‘एयरस्कोप’ है. इसे चीन की सिंघुआ यूनिवर्सिटी और चीनी PLA मेडिकल स्कूल के वैज्ञानिकों ने मिलकर विकसित किया है. इससे जुड़ा रिसर्च साइंस जर्नल नेचर में पब्लिश हुआ है, जिसमें बताया गया है कि इस माइक्रो मिनी डिवाइस के जरिये दिमाग की हर गतिविधि को न सिर्फ देखा जा सकेगा बल्कि उसे रिकॉर्ड भी किया जा सकेगा.
एक साथ 8500 से ज्यादा न्यूरॉन्स पर नजर
एयरस्कोप की सबसे बड़ी खासियत यह है कि जब इसकी टेस्टिंग हुई तो यह एक ही समय में चूहे के दिमाग की 8500 से अधिक तंत्रिका कोशिकाओं यानी न्यूरॉन्स की गतिविधियों को रिकॉर्ड कर सकता है. न्यूरॉन्स वे कोशिकाएं हैं, जो दिमाग में सूचनाओं का आदान-प्रदान करती हैं. पहले इस तरह की गतिविधियों को रिकॉर्ड करने के लिए जानवरों का सिर स्थिर रखना पड़ता था या उन्हें तारों से जुड़े उपकरणों के साथ देखा जा सकता था. ऐसे में ये मुश्किल होता था कि उनके नेचुरल मूवमेंट को समझा जा सके. अब एयरस्कोप की मदद से ये काम आसान हुआ है. नाममात्र का वजन होने की वजह से यह उपकरण हर वक्त पहना जा सकता है.
कैसे मदद देगा ये डिवाइस ?
- डिप्रेशन और मानसिक स्वास्थ्य: वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर सकते हैं कि दिमाग की गतिविधियों में कौन-से बदलाव भावनात्मक स्थितियों और अवसाद से जुड़े होते हैं. इससे भविष्य में बेहतर उपचार विकसित करने के नए रास्ते खुल सकते हैं.
- दिमाग और व्यवहार का अध्ययन: जानवरों के आपसी व्यवहार, प्रतिस्पर्धा और सामाजिक संबंधों के दौरान न्यूरॉन्स कैसे सक्रिय होते हैं, इसका अधिक बारीकी से अध्ययन किया जा सकेगा.
- ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस: यह तकनीक भविष्य में दिमाग के संकेतों को समझने वाले उपकरणों को ज्यादा सटीक बनाने में मदद कर सकती है. हालांकि इसके लिए अभी और शोध की जरूरत है.
- कैंसर और प्रतिरक्षा विज्ञान: इसके विकासकर्ता मानते हैं कि भविष्य में ऐसी इमेजिंग तकनीक का उपयोग शरीर में बीमारियों के विकास और कोशिकाओं के बीच होने वाली गतिविधियों को समझने में भी किया जा सकता है.
कैसे बनाई गई डिवाइस?
वैज्ञानिकों ने इस डिवाइस के लेंस तैयार करने और वीडियो में अलग-अलग विषयों को लगातार पहचानने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद ली. इसकी वायरलेस तकनीक बड़ी मात्रा में तस्वीरों का डेटा भेजने में भी सक्षम है. फिलहाल एयरस्कोप का परीक्षण चूहों पर किया गया है. इसलिए इसे इंसानों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली तैयार तकनीक नहीं माना जा सकता लेकिन अगर आगे के शोध सफल रहे, तो दिमाग को समझने में आसानी हो जाएगी.