नई दिल्ली (Kruthika IRS UPSC Success Story). जब जिंदगी परीक्षा लेती है तो हर रास्ता बंद नजर आने लगता है. लेकिन कुछ लोग मुश्किलों से डरकर झुकते नहीं, बल्कि हर दीवार को सफलता की खिड़की बना देते हैं. कर्नाटक के हासन शहर में पली-बढ़ी कृतिका की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. जिस उम्र में बच्चे अपने माता-पिता के प्यार के साए में सपने देखते हैं, उस उम्र में कृतिका ने अपने ही पिता की बेरुखी और तिरस्कार झेला. बेटी होने की वजह से उनके जन्म पर पिता खुश नहीं थे.
बचपन से शुरू हो गया संघर्ष
माता-पिता के अलग होने के बाद स्कूल के बच्चे भी कृतिका से दूर भागने लगे थे. चौथी क्लास में उनके गणित में 100 में से 99 नंबर आए. जो बच्चे उनसे बात भी नहीं करते थे, वे खुद चलकर उनके पास आने लगे. इस घटना ने छोटी सी कृतिका को सिखा दिया कि समाज में पहचान बनाने और सम्मान हासिल करने के लिए अपनी काबिलियत के दम पर बड़े मुकाम हासिल करने होंगे. इसी सोच ने आगे चलकर उन्हें यूपीएससी की कठिन राह की तरफ मोड़ा.
यूपीएससी में 4 बार फेल, फिर अचानक चमकी किस्मत
कृतिका की तैयारी बेहद शानदार होती थी. कोचिंग के मेंटर्स और मॉक इंटरव्यू पैनल के जज उनकी तारीफ करते नहीं थकते थे. लेकिन फिर भी फाइनल लिस्ट में उनका नाम नहीं होता था. 4 बार लगातार फेल होने के बाद वे टूट चुकी थीं. एक रात वे अंधेरे कमरे में उदास बैठी थीं, तब लैपटॉप की स्क्रीन पर उन्होंने साइकोलॉजी की एक थ्योरी पढ़ी- ‘रोसेंथल इफेक्ट’ (Rosenthal Effect) या पिग्मेलियन इफेक्ट. इसका मतलब होता है: हम खुद से या दूसरे हमारे बारे में जैसी उम्मीद रखते हैं, हमारी जिंदगी वैसी ही बनने लगती है.
कृतिका ने समझीं अपनी गलतियां
मनोविज्ञान के इस सिद्धांत ने कृतिका को सोचने पर मजबूर कर दिया. कृतिका को समझ आ गया कि कमी उनकी पढ़ाई में नहीं, बल्कि उनके अचेतन मन में छिपे इस डर में थी कि ‘शायद मैं आईएएस अफसर नहीं बन पाऊंगी’. उन्होंने अपनी सोच बदली, खुद पर भरोसा कायम किया और इसके बाद लगातार दो बार यूपीएससी सीएसई परीक्षा क्रैक की. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2018 में 100वीं रैंक हासिल कर वह आईआरएस अधिकारी बन गईं.
शुरुआती गलतियां: अखबार के पन्नों से एआरसी रिपोर्ट तक
- तीसरे अटेंप्ट से सिर्फ 2 महीने पहले उन्हें पता चला कि प्रीलिम्स के लिए मॉक MCQs सॉल्व करना जरूरी होता है. तब उन्होंने ‘इनसाइट्स ऑन इंडिया’ की टेस्ट सीरीज ली.
- दूसरे अटेंप्ट (पहले मेन्स) में 20 में से सिर्फ 16 सवाल ही हल कर पाईं. तब उन्हें समझ आया कि पूरा पेपर हल करना ही पास होने की सबसे पहली शर्त है.
- चौथे अटेंप्ट में उन्हें अपने ऑप्शनल सब्जेक्ट (पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन) के लिए ‘ARC रिपोर्ट्स’ की अहमियत समझ में आई.
IRS कृतिका से सीखें सफलता के 3 नियम
कृतिका की लंबी यात्रा हर उस एस्पिरेंट के लिए गाइड है, जो किसी न किसी मोड़ पर खुद को अकेला या असफल महसूस करता है. उनके अनुभव से मिलने वाले सबसे बड़े सबक ये हैं:
- दुनिया से कटकर पढ़ाई न करें: कई लोगों को लगता है कि UPSC के लिए पूरी दुनिया से कट जाना सही है. लेकिन जब तक आप सीनियर्स और मेंटर्स से बात नहीं करेंगे, तब तक आपको पता नहीं चलेगा कि क्या पढ़ना है और क्या छोड़ना है.
- दूसरों की गलतियों से सीखें: अक्लमंद इंसान वही है जो दूसरों की गलतियों को देखकर खुद को सुधार ले, न कि खुद सारे गलत कदम उठाकर अपना समय बर्बाद करे.
- पेपर अधूरा न छोड़ें: परीक्षा केंद्र में चाहे कुछ भी हो जाए, पूरा पेपर लिखकर आएं. समय आपके मुताबिक नहीं चल रहा हो, तब भी अपने लक्ष्य पर नजर टिकाए रखें.