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Ajola Grass Farming Business Idea: पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा तैयार करने और अतिरिक्त आमदनी कमाने के लिए अजोला की खेती किसानों के लिए एक बेहतरीन विकल्प बन रही है. कम लागत, कम जगह और सीमित पानी में तैयार होने वाले अजोला प्लांट को जयपुर के चिमनपुरा गांव के युवा किसान विक्रम यादव ने सफलतापूर्वक शुरू किया है. एक क्यारी तैयार करने में मात्र 2 से 3 हजार रुपये का खर्च आता है और इससे अच्छी खासी कमाई की जा सकती है. अजोला में प्रचुर मात्रा में प्रोटीन और पोषक तत्व पाए जाते हैं, जो पशुओं के स्वास्थ्य और दूध उत्पादन के लिए बेहद फायदेमंद हैं.
Jaipur: पशुओं के लिए पौष्टिक हरा चारा तैयार करने और किसानों को अतिरिक्त आमदनी दिलाने के लिए ‘अजोला’ की खेती एक बेहतरीन और उभरता हुआ विकल्प साबित हो रही है. कम जगह, कम लागत और बेहद सीमित संसाधनों में तैयार होने वाली अजोला घास को पशुओं के आहार में शामिल करके पशुपालक अपने पशुओं का दूध उत्पादन और स्वास्थ्य सुधार सकते हैं. राजस्थान की राजधानी जयपुर के पास स्थित चिमनपुरा गांव के युवा किसान विक्रम यादव ने इस दिशा में एक अनुकरणीय पहल कर कृषि क्षेत्र में अपनी एक अलग पहचान बनाई है. उन्होंने पारंपरिक खेती के साथ-साथ अजोला उत्पादन का सफल बिजनेस शुरू किया है और आज वे इससे अच्छी आमदनी अर्जित कर रहे हैं.
किसान विक्रम यादव के परिवार में पारंपरिक रूप से गेहूं, जौ और चने जैसी फसलें उगाई जाती थीं, लेकिन समय के साथ ट्यूबवेल में पानी का जलस्तर लगातार नीचे जाने लगा, जिससे फसलों की पैदावार बुरी तरह प्रभावित होने लगी. इस गंभीर समस्या से निपटने के लिए विक्रम ने कुछ हटकर और नए तरीकों को अपनाने का मन बनाया. जब वे 12वीं कक्षा में पढ़ाई कर रहे थे, तभी उन्होंने कृषि विभाग की उचित सलाह ली और सब्जियों की खेती के साथ-साथ अजोला उत्पादन में अपनी गहरी रुचि दिखाई. वर्ष 2022 में उन्होंने अपने 12 एकड़ खेत में से एक एकड़ हिस्से के एक छोटे से भाग में अजोला का प्लांट स्थापित किया. उनका यह अनूठा प्रयोग पूरी तरह सफल रहा और आज वे क्षेत्र के एक प्रगतिशील किसान के रूप में जाने जाते हैं.
एक क्यारी तैयार करने में आता है मात्र 2 से 3 हजार रुपए का खर्च
युवा किसान विक्रम बताते हैं कि अजोला का प्लांट शुरू करने के लिए बहुत बड़े निवेश या भारी-भरकम बजट की आवश्यकता नहीं होती है. एक क्यारी को पूरी तरह तैयार करने में लगभग 2,000 से 3,000 रुपए तक का खर्च आता है. उनके साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, केवल एक क्यारी से लगभग 80 से 90 किलो तक अजोला आसानी से तैयार हो जाता है. बाजार में अजोला की बिक्री लगभग 100 रुपए प्रति किलो के भाव तक की जा सकती है, जबकि इसकी कुल उत्पादन लागत महज 30 से 40 रुपए प्रति किलो के आसपास बैठती है. हालांकि, मिलने वाला वास्तविक मुनाफा स्थानीय बाजार की मांग, गुणवत्ता, परिवहन और कुल उत्पादन पर निर्भर करता है.
जानिए कैसे तैयार करें अजोला का प्लांट
अजोला का प्लांट लगाने की प्रक्रिया बेहद आसान है. इसके लिए सबसे पहले खेत में किसी समतल और साफ जगह का चयन करना पड़ता है. इसके बाद जरूरत के अनुसार छोटा गड्ढा खोदकर उसमें मजबूत प्लास्टिक शीट या तिरपाल अच्छी तरह बिछाई जाती है, ताकि पानी लंबे समय तक रुका रहे. फिर इसमें उपजाऊ मिट्टी और वर्मी कम्पोस्ट का सही मिश्रण डालकर पानी भरा जाता है. अंत में इसमें अजोला कल्चर डाला जाता है. इस प्लांट को हमेशा ऐसी जगह रखना बेहद जरूरी होता है, जहां सीधी और तेज धूप से इसका बचाव हो सके और इसे पर्याप्त मात्रा में छांव मिल सके. विक्रम ने शुरुआती दौर में सिर्फ 10 किलो अजोला कल्चर खरीदा था, और अब उनके प्लांट में हर 15 दिन के भीतर 50 किलो से अधिक ताजा अजोला तैयार हो जाता है.
पशुओं के लिए किसी वरदान से कम नहीं है अजोला
अजोला में प्रचुर मात्रा में उच्च गुणवत्ता वाला प्रोटीन और कई अन्य आवश्यक पोषक तत्व पाए जाते हैं. इसे गाय, भैंस और अन्य दुधारू पशुओं के दैनिक आहार में एक बेहतरीन पूरक चारे के रूप में आसानी से शामिल किया जा सकता है. हालांकि, पशुओं को खिलाने से पहले इसे साफ पानी से अच्छी तरह धोना आवश्यक होता है और इसे उचित मात्रा में ही आहार में देना चाहिए. विशेषज्ञों की सलाह है कि अजोला का कमर्शियल प्लांट शुरू करने से पहले किसानों को स्थानीय कृषि या पशुपालन विभाग से पूरी तकनीकी जानकारी जरूर लेनी चाहिए. उत्पादन के साथ-साथ बाजार की मांग का आकलन करके किसान पशुपालन के साथ-साथ अपनी आय को कई गुना बढ़ा सकते हैं.