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रूस अमेरिका के लिए डीजल की पहली खेप भेज रहा है. जहाज रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से रवाना होने की जानकारी है, लेकिन अमेरिका में किस बंदरगाह पर पहुंचेगा और उसका सटीक समुद्री रूट क्या होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है. जानिए रूस से अमेरिका तक डीजल पहुंचने का संभावित रास्ता क्या हो सकता है.
रूस का टैंकर तेल लेकर अमेरिका के लिए रवाना. (सांकेतिक रूट मैप)
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच डील हुई. और अब गुरुवार यानी 22 अक्टूबर 2026 को रूस अमेरिका के लिए डीजल की पहली खेप रवाना करने जा रहा है. रूसी उप प्रधानमंत्री अलेक्जेंडर नोवाक ने बताया कि टैंकर में 40000 मीट्रिक टन डीजल होगा. रॉयटर्स के मुताबिक यह जहाज सेंट पीटर्सबर्ग से रवाना होगा.लेकिन अमेरिका में इसे किस पोर्ट पर पहुंचना है, इसकी डिटेल्स शेयर नहीं की गई है.
रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पहली खेप में लगभग 3 लाख बैरल डीजल होगा. इतने ही डीजल की बात अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भी कही थी. इसके बाद नवंबर में 5 लाख टन और फिर 10 लाख टन की सप्लाई की योजना है. यानी बात सिर्फ इस एक टैंकर पर खत्म होने वाली नहीं है. अमेरिका रूस से भर-भरकर डीजल लेने वाला है.
क्या होगा समुद्री रास्ता?
जहाज सेंट पीटर्सबर्ग पोर्ट से रवाना होगा. लेकिन अमेरिका में डिलीवरी किस पोर्ट पर होगी, इसके बारे में कोई जानकारी नहीं दी गई है. इसलिए जहाज का रूट क्या होगा और उसे अमेरिका पहुंचने में कितना वक्त लगेगा, ये पता लगाना काफी मुश्किल है. हालांकि, एक्सपर्ट के मुताबिक- सेंट पीटर्सबर्ग से जहाज बाल्टिक सागर, उत्तरी सागर और अटलांटिक महासागर के रास्ते अमेरिका जा सकता है.
रूस ने डीजल निर्यात पर रोक क्यों हटाई?
रूस ने घरेलू बाजार में ईंधन की कमी से निपटने के लिए डीजल निर्यात पर रोक लगाई थी. यूक्रेन के ड्रोन हमलों से रूसी रिफाइनरियों की प्रोडक्शन कैपेसिटी प्रभावित हुई थी. इसलिए रूस पहले अपने यहां के लिए तेल रखना चाहता था. 9 अक्टूबर को रूस ने डीजल निर्यात पर लगी रोक में ढील दी. अब मॉस्को का कहना है कि वह अपनी रिफाइनरियों की क्षमता के हिसाब से अमेरिका और दूसरे देशों को सप्लाई करेगा.
अमेरिका को क्या फायदा होगा?
अमेरिका में मिडटर्म इलेक्शन है. और इस वक्त डीजल की कीमतें आसमान पर हैं. ऐसे में रूस से एक्स्ट्रा सप्लाई मिलने से बाजार में उपलब्धता बढ़ सकती है. हालांकि, एक टैंकर से अमेरिकी बाजार की कीमतों में बड़ी गिरावट की गारंटी नहीं है. आगे कितनी खेपें आती हैं और रूस कितना उत्पादन कर पाता है, इसका असर ज्यादा अहम होगा.
यह सौदा इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि यूक्रेन युद्ध के बाद रूस और पश्चिमी देशों के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं. ऐसे माहौल में अमेरिका का रूस से डीजल मंगाना ऊर्जा कारोबार और दोनों देशों के राजनीतिक रिश्तों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है.