राजा-महाराजा खिलाते थे प्रजा को ऊर्जा देने के लिए, बुरहानपुर की यह मिठाई आज भी खास; बनाई देश-विदेश में पहचान

राजा-महाराजा खिलाते थे प्रजा को ऊर्जा देने के लिए, बुरहानपुर की यह मिठाई आज भी खास; बनाई देश-विदेश में पहचान


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Burhanpur Darawa Sweets: गेहूं देकर मिठाई बनाने की सामग्री खरीदने से शुरू हुई दरावा मिठाई की कहानी अब 53 साल में देश-विदेश तक अपनी पहचान बना चुकी है. यह पारंपरिक मिठाई बुरहानपुर में बनाई जाती है.

Burhanpur Darawa Sweets: मध्य प्रदेश के बुरहानपुर की पहचान यहां की ऐतिहासिक धरोहरों और खानपान की परंपराओं से भी जुड़ी हुई है. शहर में एक ऐसी पारंपरिक मिठाई बनाई जाती है. जिसका कारोबार पिछले 53 वर्षों से लगातार चला आ रहा है. दरावा मिठाई के नाम से मशहूर इस मिठाई की कहानी भी बेहद दिलचस्प है. कभी गेहूं देकर मिठाई बनाने की सामग्री खरीदी गई थी. लेकिन आज यही मिठाई देश-विदेश तक अपनी पहचान बना चुकी है.

दुकान संचालक ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम को दुकान संचालक किशोर और सानू दरावे वाले बताते हैं कि इस मिठाई को तैयार करने की परंपरा वर्षों पुरानी है. शुरुआत के समय संसाधन सीमित थे और सामग्री जुटाना भी आसान नहीं था. इसके बावजूद मिठाई बनाने का काम शुरू किया गया. धीरे-धीरे लोगों को इसका स्वाद पसंद आने लगा और इसकी मांग बढ़ती गई. आज यह मिठाई बुरहानपुर की पारंपरिक पहचान का हिस्सा बन गई है.

दो दिन की मेहनत के बाद तैयार होती है मिठाई
दरावा मिठाई बनाना आसान काम नहीं है. इसे तैयार करने में करीब दो दिन का समय लगता है. इसके निर्माण में काफी मेहनत और धैर्य की जरूरत होती है. बनाने की पारंपरिक प्रक्रिया और इसका खास स्वाद ही इसे दूसरी मिठाइयों से अलग बनाता है. दुकानदारों के मुताबिक इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह मिठाई लगभग तीन महीने तक खराब नहीं होती. यही कारण है कि लोग इसे अपने साथ दूसरे शहरों और दूर-दराज के क्षेत्रों में भी ले जाना पसंद करते हैं.

500 रुपये किलो है कीमत
वर्तमान में दरावा मिठाई दुकान पर 500 रुपये प्रति किलो के भाव से बेची जाती है. संचालकों के अनुसार पुराने समय में राजा-महाराजा मेहनत करने वाली प्रजा को ऊर्जा देने के लिए यह मिठाई खिलाते थे. 53 साल के सफर में दराबा मिठाई ने अपनी अलग पहचान बनाई है. परंपरागत तरीके से तैयार होने वाली यह मिठाई आज भी लोगों को अपने स्वाद से आकर्षित कर रही है. गेहूं देकर सामग्री खरीदने से शुरू हुई इसकी कहानी अब बुरहानपुर की पारंपरिक मिठाई की पहचान बनकर देश-विदेश तक पहुंच चुकी है.



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