जब टकराए दो न्यूट्रॉन तारे, सेकंड के हजारवें हिस्से में पैदा हुआ ब्रह्मांड का सबसे खतरनाक दैत्य ‘मैग्नेटर’

जब टकराए दो न्यूट्रॉन तारे, सेकंड के हजारवें हिस्से में पैदा हुआ ब्रह्मांड का सबसे खतरनाक दैत्य ‘मैग्नेटर’


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जब टकराए दो न्यूट्रॉन तारे, पैदा हुआ ब्रह्मांड का सबसे खतरनाक दैत्य ‘मैग्नेटर’

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अंतरिक्ष के सबसे शक्तिशाली चुंबकीय पिंड ‘मैग्नेटर’ के जन्म को लेकर वैज्ञानिकों को बड़ी जानकारी मिली है. जापान के फुगाकु सुपरकंप्यूटर पर किए गए सिमुलेशन से पता चला है कि जब दो कम द्रव्यमान वाले न्यूट्रॉन तारे आपस में टकराते हैं, तो ब्लैक होल बनने के बजाय एक मैग्नेटर का निर्माण हो सकता है. इस टकराव के दौरान महज एक मिलीसेकंड में चुंबकीय क्षेत्र 300 गुना तक बढ़ जाता है.

नई दिल्ली: ब्रह्मांड में न्यूट्रॉन तारे अपने भयंकर चुंबकीय क्षेत्र के लिए जाने जाते हैं. इनमें से लगभग एक फीसदी तारे ऐसे होते हैं, जिनका चुंबकीय खिंचाव सामान्य न्यूट्रॉन तारों से भी हजार गुना ज्यादा ताकतवर होता है. खगोल विज्ञान में इन्हें ‘मैग्नेटर’ कहा जाता है. लंबे समय से वैज्ञानिक यह समझने की कोशिश कर रहे थे कि आखिर ये महाशक्तिशाली पिंड बनते कैसे हैं. अब इस रहस्य का जवाब मिलता दिखाई दे रहा है. जापान के सबसे तेज ‘फुगाकु’ सुपरकंप्यूटर पर एक नया सिमुलेशन किया गया है.

तारों की टक्कर के बाद ब्लैक होल क्यों नहीं बना?

आम तौर पर जब दो न्यूट्रॉन तारे टकराते हैं, तो वे सीधे ब्लैक होल में बदल जाते हैं. ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उनका कुल वजन एक तय सीमा से ज्यादा हो जाता है. भौतिक विज्ञान में इस वजन की सीमा को टीओवी लिमिट कहा जाता है. यह लिमिट हमारे सूरज के द्रव्यमान से लगभग 2.6 गुना ज्यादा होती है.

अगर दोनों तारों का कुल वजन इस सीमा से कम रहता है, तो वे ब्लैक होल नहीं बनते. वैज्ञानिक टीम ने सिमुलेशन में ऐसे ही हल्के न्यूट्रॉन तारों की टक्कर करवाई. इस टक्कर के बाद दोनों तारे मिलकर एक अकेले महाकाय तारे में तब्दील हो गए.

मिलीसेकंड में 300 गुना कैसे बढ़ गई ताकत?

सुपरकंप्यूटर सिमुलेशन में वैज्ञानिकों ने देखा कि दोनों तारों के छूते ही उनके भीतर का न्यूट्रॉन फ्लुइड भयंकर उथल-पुथल से भर गया. फिजिक्स की भाषा में इसे ‘केल्विन-हेल्महोल्ट्ज इंस्टेबिलिटी’ कहा जाता है. इसे आप मोमबत्ती बुझने के बाद उठने वाले धुएं के छल्लों की तरह समझ सकते हैं. जब धुआं ऊपर उठता है, तो वह सीधा जाने के बजाय अचानक तेजी से घूमने लगता है.

तारों के आपस में मिलते ही न्यूट्रॉन पदार्थ इतनी तेजी से मिक्स हुआ कि उसका चुंबकीय क्षेत्र कई गुना फैल गया. सिर्फ एक मिलीसेकंड के भीतर तारे की चुंबकीय ताकत 300 गुना से भी ज्यादा बढ़ गई. वैज्ञानिकों का मानना है कि अंतरिक्ष में दिखने वाले तेज रेडियो बर्स्ट और गामा किरणों के विस्फोट के पीछे भी इन्हीं मैग्नेटर्स का हाथ होता है.

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