अब हर मदरसे में रहेगी सरकार की निगरानी, बच्चों का कराना होगा रजिस्ट्रेशन, मौलवी को माननी होंगी ये बातें


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Dehradun News: काफी समय से ये बात सामने आ रही है कि बाहरी राज्यों से बच्चे तालीम के लिए उत्तराखण्ड आ रहे हैं, बच्चे कहां जा रहे हैं या उनकी क्या स्थिती है, यह पता नहीं चल पाता. अब यहां बच्चों की निगरानी के लिए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. APAAR ID यानि ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी के तहत शुरू किया गया.

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अब हर मदरसे में रहेगी सरकार की निगरानी, बच्चों का कराना होगा रजिस्ट्रेशनZoom

उत्तराखंड मदरसा

देहरादून: उत्तराखंड के मदरसों में अब पढ़ने वाले बच्चों की मॉनटिंग अपार आईडी के जरिये होगी, शिक्षा विभाग बच्चों का डाटाबैंक तैयार कर रहा है, जिसमें बच्चे की सारी डिटेल पता चलेगी. अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के अध्यक्ष सुरजीत गांधी का कहना है कि बच्चों को लेकर हमेशा यह बात उठती रही कि बाहरी राज्यों से बच्चे तालीम के लिए उत्तराखण्ड आ रहे हैं, बच्चे कहां जा रहे हैं या उनकी क्या स्थिती है, यह पता नहीं चल पाता. अब जब अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में है, तो बच्चों को लेकर स्थिति साफ हो सकेगी.

दरअसल अब प्रदेश के 33 मदरसों में धार्मिक और स्कूल एजुकेशन साथ-साथ चल रही है. अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण अस्तित्व में आने के बाद व्यवस्था में बदलाव के दांवे हैं. देहरादून में अब तक कुल 33 मदरसे अल्पसंख्यक शिक्षा प्राधिकरण के दायरे में आए हैं, जिनमें से ज्यादातर में बच्चे बोर्डिंग में रह रहे हैं. देहरादून के किशनपुर इलाके के रजिस्टर्ड मदरसे में न्यूज18 की टीम पहुंची तो यहां ज्यादातर बच्चे बिहार के ही पाए गए.

पड़ताल में हुआ बड़ा खुलासा
खास बात ये है कि एक भी लड़की यहां पढ़ती नहीं पाई गई. न्यूज18 ने पड़ताल की तो पता चला कि देहरादून के मदरसों में लड़कियों की संख्या बेहद कम है. बच्चियां दीनी तालीम लेने अलग से आती हैं, उनका समय अलग है. साथ ही लड़के और लड़कियों को अलग-अलग ही दीनी तालीम दी जाती है. बच्चों की मॉनिटरिंग के लिए अब शिक्षा विभाग अपार आईडी जेनरेट कर रहा है.

क्या है अपार आईडी?
APAAR ID यानि ऑटोमेटेड परमानेंट एकेडमिक अकाउंट रजिस्ट्री जिसे राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और वन नेशन, वन स्टूडेंट आईडी के तहत शुरू किया गया, जिसमें स्टूडेन्ट्स की 12 अंकों की एक डिजिटल पहचान दी गई है. प्राइमरी क्लास से लेकर हायर एजुकेशन लेने वाले हर स्टूडेन्ट्स की यह पहचान होगी, जो डीजी लॉकर से जोड़ी गई है. इसमें स्टूडेन्ट्स के सर्टिफिकेट, मार्कशीट और एकेडमिक डाटा बेस रहेगा. यह स्टूडेन्ट्स के स्कोर को भी देखेगी. इसके अलावा स्कूल बदलने पर भी इससे ट्रांसफर सर्टिफिकेट लेना आसान होगा.

प्रदेश में सरकार ने अवैध तरीके से चल रहे 19 मदरसे अब तक सील किए हैं, जबकि 227 मदरसों ने खुद ही अपने मदरसों में ताला लगा लिया है. लेकिन जो सरकारी नियमों से चल रहे हैं, वहां भी अभी सिस्टम को समझना मुश्किल हो रहा है. कुछ मॉडर्न स्कूल या मदरसों के नाम पर जो संस्थाएं चल रही हैं, वहां भी व्यवस्था को पटरी पर आने में अब वक्त लग रहा है. लेकिन जिस तरीके से बच्चों की पढ़ाई को लेकर जो संशय रहता था, वो भी अब सिस्टम के दायरे में लाया जा रहा है.



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