UPSC Success Story: पहले MBBS किया, 2010 में IPS बने, अगले ही साल IAS, अब दिल्ली में मिली बड़ी जिम्मेदारी

UPSC Success Story: पहले MBBS किया, 2010 में IPS बने, अगले ही साल IAS, अब दिल्ली में मिली बड़ी जिम्मेदारी


IAS Success Story: यूपीएससी की सिविल सेवा परीक्षा पास करके IAS या IPS बनना लाखों युवाओं का सपना होता है.कई उम्मीदवारों को इस परीक्षा में सफलता हासिल करने के लिए वर्षों तक मेहनत करनी पड़ती है लेकिन कुछ अफसरों की कहानी ऐसी होती है जो एक बड़ी सफलता मिलने के बाद भी अपने अगले लक्ष्य के लिए मेहनत करना नहीं छोड़ते.बिहार कैडर के IAS अधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम (Dr Thiyagarajan SM) की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. उन्होंने पहले MBBS की पढ़ाई पूरी की और डॉक्टर बने. इसके बाद UPSC की तैयारी की और 2010 में IPS अधिकारी बन गए हालांकि उनका सफर यहीं नहीं रुका.उन्होंने दोबारा सिविल सेवा परीक्षा दी और अगले ही साल 2011 में IAS में सेलेक्‍ट हो गए.बिहार के गया नालंदा और दरभंगा जैसे जिलों में DM की जिम्मेदारी संभाल चुके डॉ. थियागराजन को अब केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारी मिली है.उन्हें दिल्ली में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में डायरेक्टर स्तर के पद पर नियुक्त किया गया है.

कौन हैं IAS डॉ. त्यागराजन एसएम?

डॉ. त्यागराजन एसएम मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं.उनका जन्म 20 दिसंबर 1984 को हुआ था.उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई के बाद मेडिकल के क्षेत्र में करियर बनाने का फैसला किया. इसके लिए उन्होंने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज में एडमिशन लिया और वहां से MBBS की डिग्री हासिल की. मेडिकल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उनके पास डॉक्टर के रूप में करियर बनाने का विकल्प था, लेकिन उन्होंने अपनी दिशा बदलने का फैसला किया.उन्होंने सिविल सेवा में जाने के लिए यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू की.इस तरह मेडिकल की पढ़ाई करने वाले डॉ. त्यागराजन का सफर प्रशासनिक सेवा की ओर बढ़ गया.

MBBS की डिग्री के बाद क्यों चुनी सिविल सेवा की राह?

आमतौर पर MBBS की पढ़ाई करने वाले स्‍टूडेंट डॉक्टर बनने और मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने की तैयारी करते हैं.कई छात्र पोस्ट ग्रेजुएशन करके किसी विशेष मेडिकल फील्ड में करियर बनाते हैं लेकिन डॉ. त्यागराजन ने मेडिकल की डिग्री हासिल करने के बाद सिविल सेवा में जाने का रास्ता चुना. उनकी पढ़ाई का बैकग्राउंड मेडिकल साइंस से था जबकि UPSC की परीक्षा के जरिए वह प्रशासनिक क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहते थे.यही बात उनकी कहानी को अलग बनाती है.उन्होंने एक प्रोफेशनल डिग्री हासिल करने के बाद बिल्कुल अलग क्षेत्र की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी की.

2010 में UPSC पास करके बने IPS अधिकारी

डॉ. त्यागराजन की मेहनत रंग लाई और वर्ष 2010 में उनका चयन इंडियन पुलिस सर्विस (IPS) के लिए हो गया. IPS में सेलेक्‍शन होने के बाद उन्होंने पुलिस प्रशासन के क्षेत्र में काम करना शुरू किया. उन्हें ओडिशा में असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) के रूप में जिम्मेदारी मिली. ASP के पद पर रहते हुए उन्हें पुलिस प्रशासन, कानून व्यवस्था और लॉ एनफोर्समेंट से जुड़े कामों का अनुभव मिला. मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद पुलिस सेवा में पहुंचना उनके करियर का एक बड़ा बदलाव था.

IPS बनने के बाद भी नहीं रुके, अगले ही साल बन गए IAS

2010 में IPS अधिकारी बनने के बाद डॉ. त्यागराजन ने दोबारा UPSC की सिविल सेवा परीक्षा दी.इस बार उनकी मेहनत उन्हें इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस (IAS) तक ले गई.वर्ष 2011 में उनका सेलेक्‍शन IAS के लिए हो गया.उन्हें बिहार कैडर आवंटित किया गया.इस तरह उन्होंने पहले 2010 में IPS और फिर 2011 में IAS बनने की उपलब्धि हासिल की. उनके करियर की यह बात खास है कि एक प्रतिष्ठित सिविल सेवा में चयन होने के बाद भी उन्होंने दूसरी सेवा में जाने के लिए दोबारा परीक्षा दी. IPS से IAS बनने के बाद उनकी जिम्मेदारियां भी बदल गईं.पुलिस सेवा में जहां उनका काम कानून व्यवस्था और पुलिस प्रशासन से जुड़ा था वहीं IAS बनने के बाद उन्हें जिला प्रशासन और सरकारी योजनाओं को लागू कराने जैसी जिम्मेदारियां मिलीं.

बिहार कैडर में मिली जिम्मेदारी, कई जिलों के बने DM

2011 बैच के IAS अधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम ने बिहार में कई महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर काम किया है.अपने प्रशासनिक करियर के दौरान वह गया, नालंदा और दरभंगा जैसे प्रमुख जिलों में डिस्ट्रिक्ट मजिस्ट्रेट (DM) की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं.DM के रूप में काम करते हुए किसी भी अधिकारी को जिले की कई व्यवस्थाओं की निगरानी करनी होती है.इनमें राजस्व प्रशासन, सरकारी योजनाओं को लागू कराना, अलग-अलग सरकारी विभागों के बीच तालमेल बनाना और आम लोगों की शिकायतों का समाधान करना शामिल होता है. डॉ. त्यागराजन ने बिहार के अलग-अलग जिलों में ऐसी प्रशासनिक जिम्मेदारियां निभाईं.

DM रहते हेल्थ सेक्टर से जुड़े कामों पर दिया ध्यान

डॉ. त्यागराजन के प्रशासनिक करियर में गया जिले की पोस्टिंग भी महत्वपूर्ण रही है.गया में DM रहते हुए उनका नाम स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने वालों में रहा. इनमें वंडर ऐप (Wonder App) और श्रवण श्रुति (Shravan Shruti) जैसी पहल शामिल थीं.ये पहल स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कुछ पहलुओं को मजबूत करने के प्रयासों का हिस्सा थीं.मेडिकल की पढ़ाई कर चुके डॉ. त्यागराजन के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र की समझ उनके प्रशासनिक करियर की एक खास बात रही है.गया के अलावा डॉ. त्यागराजन एसएम ने नालंदा और दरभंगा जिलों में भी DM के रूप में काम किया है.इन जिलों में उनकी जिम्मेदारी प्रशासनिक कामकाज की निगरानी, सरकारी योजनाओं को लागू कराने और अलग-अलग विभागों के बीच तालमेल बनाए रखने की रही. जिलाधिकारी के तौर पर काम करने के दौरान अधिकारियों को स्थानीय समस्याओं और आम लोगों की जरूरतों को समझते हुए फैसले लेने होते हैं.बिहार के कई जिलों में काम करने से डॉ.थियागराजन को अलग-अलग प्रशासनिक परिस्थितियों में काम करने का अनुभव मिला.

अब दिल्ली में मिली बड़ी जिम्मेदारी

बिहार कैडर के IAS अधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम को अब केंद्र सरकार में नई पोस्टिंग मिली है.उन्हें दिल्ली स्थित केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय (Ministry of Cooperation) में डायरेक्टर स्तर के पद पर नियुक्त किया गया है.यह नियुक्ति सेंट्रल डेपुटेशन यानी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के तहत की गई है.उनकी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति की अवधि पांच साल होगी.इसका मतलब है कि वह अब राज्य स्तर के प्रशासनिक कामकाज से आगे बढ़कर केंद्र सरकार के मंत्रालय में अपनी जिम्मेदारी निभाएंगे.

क्या होती है सेंट्रल डेपुटेशन?

IAS और दूसरी अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों को राज्य सरकारों के साथ केंद्र सरकार में भी काम करने का अवसर मिलता है.जब किसी राज्य कैडर के अधिकारी को निश्चित अवधि के लिए केंद्र सरकार में नियुक्त किया जाता है तो इसे सेंट्रल डेपुटेशन कहा जाता है. इस दौरान अधिकारी केंद्र सरकार के मंत्रालयों या विभागों में अलग-अलग जिम्मेदारियां निभाते हैं.उनका काम संबंधित मंत्रालय, पद और उन्हें सौंपे गए विभागीय कार्यों पर निर्भर करता है. केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के जरिए राज्य प्रशासन में काम कर चुके अधिकारियों को राष्ट्रीय स्तर की योजनाओं, नीतियों और सरकारी कार्यक्रमों से जुड़े कामों का अनुभव मिलता है.

डॉक्टर से IPS और फिर IAS बनने की कहानी

डॉ. त्यागराजन एसएम का करियर कई मायनों में अलग रहा है.तमिलनाडु के कोयंबटूर में मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद उन्होंने MBBS की डिग्री हासिल की.इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी की और 2010 में IPS अधिकारी बने.IPS बनने के बाद उन्होंने ओडिशा में ASP के रूप में काम किया लेकिन अगले ही साल 2011 में IAS के लिए चयनित हो गए.IAS बनने के बाद उन्हें बिहार कैडर मिला और उन्होंने गया, नालंदा तथा दरभंगा जैसे जिलों में DM की जिम्मेदारी निभाई.अब दिल्ली में केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में डायरेक्टर स्तर के पद पर उनकी नियुक्ति हुई है.उनकी कहानी UPSC की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए यह संदेश देती है कि किसी एक क्षेत्र में पढ़ाई करने के बाद भी दूसरे क्षेत्र में करियर बनाया जा सकता है.



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