UP Chunav: ‘समाजवाद ही राम राज्य है, जो सनातन वही समाजवाद’, मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश 360 डिग्री क्यों मोड़ रहे सपा की राजनीति?

UP Chunav: ‘समाजवाद ही राम राज्य है, जो सनातन वही समाजवाद’, मुलायम सिंह यादव के बेटे अखिलेश 360 डिग्री क्यों मोड़ रहे सपा की राजनीति?


यूपी चुनाव 2027 के रण में दशहरे के मौके पर समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव एक तरफ जहां पीडीए (पिछड़ा दलित और अल्पसंख्यक) का नारा देकर चुनावी प्रचार गाड़ियां रवाना किया तो दूसरी तरफ राम राज्य की बात भी करते दिखे. सामाजिक न्याय की लड़ाई की बात करने वाली सपा 2027 के रण में हिंदुत्व की पिच भी खुद को दिखाने का हर संभव कोशिश कर रही है. सत्ताधारी बीजेपी 1990 से ही लगातार सपा पर मुस्लिम तुष्टीकरण की राजनीति का आरोप लगाती रही है. 30 अक्टूबर 1990 मुलायम सिंह की सरकार में अयोध्या में कार सेवा करने पहुंचे राम भक्तों पर पुलिस की तरफ से गोली चलाए जाने की घटना के बाद से सपा पर मुस्लिम परस्त होना चस्पा गया.

गौर करने वाली बात यह है कि उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में अपनी राजनीतिक पिच को उर्वर बनाए रखने के लिए सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव अपनी मुस्लिम परस्त राजनीति से खुद को अलग करने की भी कभी कोशिश नहीं की. बीजेपी समेत अन्य विपक्षी उन्हें चुनावी मंचों से ‘मुल्ला मुलायम’ कहते तो भी उन्होंने कभी भी इस नये नाम से खुद को अलग करने की कोशिश नहीं की. जबकि 1990 के बाद यूपी के कई चुनावों में राज्य के मुसलमान सपा से ज्यादा मायावती और बीएसपी पर भरोसा दिखाते रहे, लेकिन मुलायम सिंह यादव ने अपनी मुल्ला मुलायम वाली छवि से कभी परहेज नहीं किया.

अखिलेश भी निभाते रहे मुलायम वाली छवि

2012 में उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बनने के बाद अखिलेश यादव भी कभी भी पिता मुलायम की तरह मुस्लिम तुष्टीकरण की छवि से किसी किस्म की दूरी बनाने की कभी भी कोशिश नहीं की. अखिलेश सरकार में ही कांवड़ यात्रा में ज्यादा आवाज में डीजे बजाने पर रोक लगाई गई. वहीं ईद समेत अन्य त्योंहारों के मौके पर मस्जिदों से तेज आवाज होने वाले अजान पर कभी भी पाबंदी नहीं लगी. मुस्लिमों के त्योहारों के मौके पर उनके इलाकों में 24 घंटे बिजली देने जैसे फैसले भी अखिलेश सरकार पर ही लगे. 2017 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार श्मशान और कब्रिस्तान की जमीन आवंटन, और त्योहारों पर 24 घंटे बिजली देने में दोहरापन बर्ताव के आरोप लगाए.

2017 में योगी आदित्यनाथ के मुख्यमंत्री बनने के बाद सपा और अखिलेश यादव पर मुस्लिम परस्त होने के आरोप निरंतर बढ़ते ही जा रहे हैं. आलम यह हुआ कि अखिलेश यादव की अगुवाई में समाजवादी पार्टी का प्रदर्शन लगातार गिरता चला गया. 2014 में अखिलेश खुद राज्य के सीएम थे फिर भी उनकी पार्टी के केवल पांच सांसद जीत पाए, वो भी सभी उनके परिवार के सदस्य रहे.

2017 विधानसभा चुनाव में भी सत्ता में होने के बावजूद सपा 47 सीटों पर सिमट गई. जबकि अखिलेश ने आखिरी वक्त में कांग्रेस से गठबंधन भी किया था. 2019 के लोकसभा चुनाव में अखिलेश ने अपनी धुर विरोधी मायावती से हाथ मिलाया. इसके बाद भी सपा के केवल पांच सांसद ही जीत पाए. 2022 के विधानसभा चुनाव ओपी राजभर, जयंत चौधरी जैसे नेताओं का साथ मिलने के बाद भी सपा केवल 111 सीटें जीत पाई.

सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इशारों में सुभासपा और आरएलडी को साथ आने को कहा है.

अखिलेश यादव ने यूं अपनाया सॉफ्ट हिन्दुत्व

लगातार मिल रही हार के बाद 2024 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अखिलेश यादव ने मुस्लिम परस्त छवि को धुमिल करने के लिए सॉफ्ट हिन्दुत्व का नैरेटिव गढ़ना शुरू कर दिया. हालांकि अयोध्या में बने राम मंदिर के प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम में नहीं पहुंचने पर अखिलेश पर बीजेपी ने खूब हमले किए जो आज तक जारी हैं. लेकिन दूसरी तरफ अखिलेश पूजा-पाठ की तस्वीरें शेयर कर और खुद को भगवान श्रीकृष्ण का वशंज आदि बताकर अपनी हिंदू विरोधी छवि को मिटाने के मिशन में जुट गए.

इसी बीच शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती चर्चा में आए. वह राम मंदिर के भूमि पूजन तिथि, अर्ध निर्मित मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा जैसे मुद्दों पर बीजेपी की सरकार को घेरना शुरू किया. बस यहीं से अखिलेश यादव ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पकड़ लिया और उनके बयानों को आधार बनाकर हिन्दुत्व के मुद्दे पर बीजेपी और सीएम योगी को घेरने लगे. इसी बीच प्रयागराज कुंभ में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और उनके साथ आए बटुकों की पुलिस की ओर से हुई पिटाई के मुद्दे पर अखिलेश ने जोर शोर से बीजेपी पर हिंदू विरोधी होने के आरोप लगाने शुरू कर दिए. 2024 के लोकसभा चुनाव में अयोध्या लोकसभा सीट पर सपा की तरफ से दलित प्रत्याशी अवधेश प्रसाद को मिली जीत के बाद अखिलेश अग्रेसिव तरीके से बीजेपी को हिंदू विरोधी बताने लगे.

राम मंदिर में चोरी के बाद अखिलेश खुलकर हिंदू हितैषी बने

अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले का खुलासा करने के बाद अखिलेश यादव हिंदुत्व के मुद्दे पर आक्रामक हो चले हैं. वह लगातार बीजेपी को लकली सनातनी और नकली हिंदू हितैषी बताने में जुट गए हैं. इन सबके बीच वह खुद को असली हिंदू हितैषी बताने में जुट गए हैं. 9 जुलाई 2026 को शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती के चरणों में बैठकर अखिलेश यादव ने कहा- ‘जो सनातन है, वही समाजवाद है.’

अब तो अखिलेश यादव ने एक कदम और आगे बढ़कर राम राज्य की तुलना समाजवाद से कर दी है. यानी अब तक केवल बीजेपी ‘राम राज्य’ जैसे शब्द अपने भाषणों में प्रयोग करती रही, उसे अखिलेश यादव ने भी 2027 के यूपी चुनाव से पहले अपना लिया है.

यूपी में बदलने वाली है मुसलमानों का सियासी समीकरण.

दशहरा पर अखिलेश यादव ने राम राज्य का जिक्र करते हुए सनातन का पाठ पढ़ाया और समाजवाद से इसकी तुलना की. उन्होंने खुद को असली सनातनी बताते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के नजदीक आ रहे चुनावों को देखते हुए लोगों को असली और नकली सनातनी के बीच का फर्क समझना चाहिए.

अखिलेश यादव ने कहा-

आज के दिन हम लोग संकल्प लें के हमेशा हमेशा के लिए बुराई खत्म कर दें इस धरती से हम लोग और शुरुआत हो यूपी से जो असली राजनीतिक महाभारत होने जा रहा है उसमें हम सब लोगों को मिलकर के पीडीए की ताकत को और मजबूत करते हुए सामाजिक न्याय के राज की स्थापना के लिए जो प्रभु श्री राम ने कभी रास्ता दिखाया था राम राज्य का और कई बार हम लोग यह तर्क दे चुके हैं जो समाजवाद है वही राम राज्य है और जो राम राज्य है वही समाजवाद है और ये दोनों जो मानते हैं वही सनातनी है. सत्य का रास्ता ही सनातन का रास्ता है. दूसरे का सम्मान करने वाले ही लोग सनातनी हैं. दूसरे को न्याय दिलाने वाले लोग सनातनी हैं. धरती पर अच्छाई को लाने वाले सनातनी हैं. और जो बुराई करें वह कौन है? नकली सनातनी है. नकली सनातनी है. इसलिए हमें आपको सावधान रहना पड़ेगा.

राम राज्य पर बीजेपी ने तुरंत किया अखिलेश पर पलटवार

अखिलेश यादव के इस बयान पर उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने तुरंत पलटवार किया. उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के मुंह से सनातन की बातें शोभा नहीं देतीं, क्योंकि उनकी सरकार के दौरान हिंदुओं का अपमान हुआ और त्योहारों पर पाबंदियां लगाई गईं, जिसे जनता भूली नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अखिलेश चाहे कितना भी दिखावा कर लें, जनता उनकी सच्चाई जानती है.

मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा-

अखिलेश यादव जी ने हमेशा तुष्टीकरण की राजनीति की है और उन्होंने समाज के एक वर्ग को तुष्टीरण के कारण देश के सम बहुसंख्यक समाज को अपमानित करने का काम किया है. और प्रदेश और देश की जनता उनके चरित्र को जानती है कि किस प्रकार से ने उन्होंने वोट बैंक के रूप में अंधे होकर वोट बैंक के स्वार्थ में अंधे होकर किस प्रकार से हिंदुओं को देश के बहुसंख्यक समाज के त्योहारों को प्रतिबंधित करने का काम किया यह सब जानते हैं. समाजवादी पार्टी किस प्रकार से अराजक तत्वों के साथ है. देश में प्रदेश में अराजकता पैदा करने वालों के साथ है और वो उन्हीं के साथ खड़े हैं. आज जो भी बयानबाजी वह कर रहे हैं जो बोल रहे हैं वो कहीं ना कहीं उनका एजेंडा जो एजेंडा है वह एजेंडा स्पष्टता दिखाई देता है.

सनातन और राम राज्य जैसे शब्द अपनाने का अखिलेश को कहां से मिला कॉन्फिडेंस

दरअसल, 2024 के लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश के करीब 90 फीसदी मुसलमानों ने एक मुश्त सपा-कांग्रेस गठबंधन को वोट दिया. साथ ही पहली बार राज्य के गैर जाटव दलितों ने भी इस गठबंधन पर भरोसा किया. इसके बाद सपा को भरोसा मिला कि बीजेपी के खिलाफ लड़ाई में मुसलमान और दलित तो उनके साथ हैं ही. ऐसे में अगर उन्हें सत्ता हासिल करनी है तो उन्हें हिंदू वोटों को अपने साथ जोड़ना ही होगा. इसलिए अखिलेश यादव लगातार समाजवाद को सनातन और राम राज्य जैसे शब्दों से जोड़ते हुए दिख रहे हैं.



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