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Jaipur Kale Ganesha Temple: जयपुर के चौड़ा रास्ता बाजार में स्थित काले गणेशजी का मंदिर अपनी अनूठी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है. यह जयपुर का सबसे छोटा प्राचीन गणेश मंदिर है, जहाँ भगवान गणपति की काले रंग की और बिना सूंड वाली बाल स्वरूप प्रतिमा के साथ लड्डू गोपाल भी विराजमान हैं. कछवाहा वंश के राजाओं और सवाई माधोसिंह के गुरु बुद्धसेन मिश्र के सानिध्य में 17वीं सदी में बने इस मंदिर में दक्षिण भारत से प्रतिमा लाई गई थी. यहाँ लगातार 7 बुधवार दर्शन करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूरी होती हैं.
Jaipur: ऐतिहासिक और प्राचीन मंदिरों के शहर जयपुर के परकोटे में कई ऐसे अद्भुत स्थल हैं जो अपनी खास मान्यताओं और परंपराओं के लिए दुनिया भर में जाने जाते हैं. जयपुर के व्यस्त और प्रसिद्ध चौड़ा रास्ता बाजार में ही एक बेहद अनोखा और प्राचीन “काले गणेशजी का मंदिर” स्थित है. जयपुर के तमाम प्राचीन गणेश मंदिरों में यह सबसे छोटा मंदिर माना जाता है. इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भक्तों को भगवान गणपति के बाल स्वरूप के दर्शन होते हैं, जो इसे अन्य मंदिरों से बिल्कुल अलग बनाते हैं.
इस मंदिर का इतिहास जयपुर की स्थापना से भी पुराना माना जाता है. मान्यताओं के अनुसार, दक्षिण भारत से भगवान गणपति की एक विशेष काले रंग की प्रतिमा को यहाँ लाकर स्थापित किया गया था. इस मंदिर में स्थापित गणपति की मूर्ति बिना सूंड वाली है, जो दुर्लभ मानी जाती है. इतिहास के पन्नों के अनुसार, इस मंदिर का निर्माण 17वीं शताब्दी में कछवाहा वंश के राजाओं के द्वारा करवाया गया था. मंदिर के पुराने दस्तावेजों और इतिहास के मुताबिक, बुद्धसेन मिश्र जो जयपुर नरेश महाराजा सवाई माधोसिंह के गुरु और राजनीतिक सलाहकार थे, उनके सानिध्य में इस मंदिर का निर्माण हुआ था. आज भी मंदिर में उनकी प्राचीन तस्वीर के साथ इतिहास की झलक देखी जा सकती है.
भगवान गणेश के साथ विराजमान हैं लड्डू गोपाल
काले गणेश जी के इस मंदिर की एक और खास विशेषता यह है कि यहाँ भगवान गणपति के बाल स्वरूप के साथ-साथ हिंदू धर्म के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण के बाल अवतार लड्डू गोपाल भी विराजमान हैं. जयपुर का यह शायद इकलौता ऐसा मंदिर है जहाँ भक्तों को एक ही छत के नीचे भगवान गणपति और लड्डू गोपाल दोनों के बाल स्वरूप के एक साथ दर्शन होते हैं. यही वजह है कि यहाँ रोजाना दर्शन के लिए भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है. मंदिर में भगवान गणपति की काली प्रतिमा के अलावा एक अन्य गणेश प्रतिमा भी है जिस पर सिंदूर का चौला चढ़ा हुआ है. मंदिर की वास्तुकला बहुत भव्य नहीं बल्कि एक छोटे और सरल स्वरूप में है, जहाँ पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ बनी हुई हैं.
बुधवार दर्शन की विशेष मान्यता और आसपास का परिवेश
हिन्दू धर्म में बुधवार का दिन गणेश जी को समर्पित होता है, और इस दिन जयपुर के सभी गणेश मंदिरों में भक्तों का तांता लगा रहता है. हालांकि, काले गणेश जी के इस मंदिर में बुधवार के दिन दर्शन करने का विशेष महत्व माना जाता है. ऐसी गहरी मान्यता है कि जो भक्त यहाँ लगातार 7 बुधवार तक सच्चे मन से दर्शन और पूजन करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं. इसी चमत्कारी मान्यता के चलते हर बुधवार को श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लगती हैं. इसके अलावा, मंदिर के बेहद नजदीक ही प्रसिद्ध ताड़केश्वर महादेव का प्राचीन मंदिर भी स्थित है, और चौड़ा रास्ता बाजार की यह पूरी गली हमेशा पारंपरिक और भक्तिमय माहौल से सराबोर रहती है.